कलबुर्गी में पकड़ा गया संदिग्ध आतंकी ममताज मल्लिक, लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों की जांच
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक पुलिस ने 19 अक्टूबर 2026 को कलबुर्गी में गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी ममताज मल्लिक के पाकिस्तान मूल के व्यक्तियों और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के साथ कथित संबंधों की जांच शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल निवासी इस युवक को उत्तरी कर्नाटक के कलबुर्गी में जांच एजेंसियों ने रविवार को हिरासत में लिया।
गिरफ्तारी और मामला दर्ज
ब्रह्मपुरा पुलिस स्टेशन में चौक पुलिस इंस्पेक्टर सुशील कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। मामले में आतंकवादी कृत्य अथवा उसकी तैयारियों के लिए साजिश रचने, प्रयास करने, उकसाने, सलाह देने, भड़काने या जानबूझकर सहायता प्रदान करने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। इसके अतिरिक्त धारा 197(1) भी शामिल है, जो उन आरोपों से संबंधित है जिनमें किसी समूह के बारे में यह कहा जाता है कि वह धर्म, नस्ल, भाषा, जाति, क्षेत्र या समुदाय के आधार पर संविधान के प्रति निष्ठा नहीं रख सकता अथवा भारत की संप्रभुता को बनाए नहीं रख सकता।
व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम से जुड़े कथित संबंध
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि मल्लिक व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के माध्यम से संदिग्ध आतंकी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों और समूहों के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार, वह 'इमाम महदी' नामक एक व्हाट्सऐप ग्रुप का सदस्य था। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि पाकिस्तान के बताए जा रहे जैनुल आबदीन नामक व्यक्ति ने उसे इस ग्रुप में जोड़ा था।
जांचकर्ताओं को मिली जानकारी के अनुसार, जैनुल आबदीन पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' के कमांडर के रूप में कार्यरत बताया जा रहा है। पुलिस इस सुराग की पुष्टि करने में जुटी है ताकि कथित संबंधों की प्रकृति और उनके दायरे को स्पष्ट किया जा सके।
संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियाँ
पुलिस के अनुसार, आरोपी 'कश्मीर टाइगर 313', 'आई लव पाकिस्तान, आई लव कश्मीर' और 'मेजर इकबाल आईएसआई' जैसे इंस्टाग्राम पेजों को फॉलो करता था। वह पाकिस्तान से जुड़े वीडियो और रील्स को लाइक और फॉलो करता था। जांचकर्ताओं ने उसके मोबाइल फोन में मौजूद फोटो और वीडियो जब्त कर लिए हैं और डिजिटल साक्ष्य जुटाने का काम जारी है।
जांच का दायरा और अगला कदम
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में डिजिटल माध्यमों के ज़रिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और संदिग्ध नेटवर्क बनाने की घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग आतंकी संगठनों द्वारा भर्ती और प्रचार के लिए किए जाने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ब्रह्मपुरा पुलिस आरोपी के कथित नेटवर्क, ऑनलाइन संपर्कों और भारत-विरोधी गतिविधियों में संभावित संलिप्तता की जांच जारी रखे हुए है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपी की भूमिका का पूर्ण स्वरूप स्पष्ट हो सकेगा।