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केदारनाथ आपदा की 13वीं बरसी: धाम में शोक सभा, हजारों दिवंगतों को श्रद्धांजलि

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केदारनाथ आपदा की 13वीं बरसी: धाम में शोक सभा, हजारों दिवंगतों को श्रद्धांजलि

सारांश

2013 की केदारनाथ त्रासदी की 13वीं बरसी पर धाम में केदारसभा, बदरी-केदार मंदिर समिति और प्रशासन ने संयुक्त शोक सभा आयोजित की। हजारों दिवंगतों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया और सामूहिक प्रार्थना की गई।

मुख्य बातें

17 जून 2026 को केदारनाथ धाम में 2013 की आपदा की 13वीं बरसी पर शोक सभा आयोजित की गई।
केदारसभा , बदरी-केदार मंदिर समिति , स्थानीय प्रशासन और पंडा-पुरोहित समाज ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन किया।
मृत और लापता लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने 2013 की आपदा को उत्तराखंड के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया।
16 और 17 जून 2013 को आई इस त्रासदी में हजारों श्रद्धालु और स्थानीय निवासी मारे गए या लापता हो गए थे।

केदारनाथ धाम में 17 जून 2026 को 2013 की विनाशकारी आपदा की 13वीं बरसी पर एक गंभीर शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें उस त्रासदी में जान गंवाने वाले हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केदारसभा, बदरी-केदार मंदिर समिति, स्थानीय प्रशासन और पंडा-पुरोहित समाज ने संयुक्त रूप से इस स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया।

त्रासदी की पृष्ठभूमि

16 और 17 जून 2013 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम और उसके आसपास के क्षेत्रों में भीषण बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचाई थी। यह आपदा उत्तराखंड के इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक त्रासदियों में से एक मानी जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और स्थानीय लोग मारे गए या लापता हो गए। गौरतलब है कि केदारनाथ मंदिर हिंदुओं के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

शोक सभा का आयोजन

13वीं बरसी के अवसर पर केदारनाथ धाम में आयोजित शोक सभा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। आपदा में मृत और लापता हुए लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया और सामूहिक प्रार्थना की गई। मंदिर परिसर में एकत्र हुए श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर दिवंगत आत्माओं को नमन किया।

केदारसभा अध्यक्ष का संदेश

केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा उत्तराखंड के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। उन्होंने सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। तिवारी ने यह भी कहा कि इस त्रासदी से मिले सबक को हमेशा स्मरण रखना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

आगे की राह

यह स्मरण सभा केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। हर वर्ष इस तिथि पर आयोजित होने वाले ये कार्यक्रम उन परिवारों के लिए एक भावनात्मक सहारा बनते हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को उस त्रासदी में खोया था। केदारनाथ धाम में सुरक्षा और पुनर्निर्माण के प्रयास जारी हैं, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित बनी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर मानसून सीजन में केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या यह तैयारी पर्याप्त है। श्रद्धांजलि सभाएँ भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हैं, परंतु असली श्रद्धांजलि तब होगी जब तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीतिगत ढाँचा सुनिश्चित किया जाए।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केदारनाथ आपदा 2013 क्या थी?
16 और 17 जून 2013 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में भीषण बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने केदारनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी। इस त्रासदी में हजारों श्रद्धालु और स्थानीय निवासी मारे गए या लापता हो गए, जिसे उत्तराखंड के इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है।
13वीं बरसी पर केदारनाथ में क्या कार्यक्रम हुए?
17 जून 2026 को केदारनाथ धाम में केदारसभा, बदरी-केदार मंदिर समिति, प्रशासन और पंडा-पुरोहित समाज ने संयुक्त शोक सभा आयोजित की। आपदा में मृत और लापता लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया और सामूहिक प्रार्थना की गई।
केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने क्या कहा?
केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि 2013 की आपदा उत्तराखंड के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। उन्होंने इस त्रासदी से मिले सबक को हमेशा याद रखने और दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि देने का आह्वान किया।
केदारनाथ आपदा की बरसी पर यह स्मरण सभा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सभा उन परिवारों के लिए भावनात्मक सहारा है जिन्होंने 2013 की त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोया था। साथ ही, यह आपदा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के प्रति सामूहिक जागरूकता बनाए रखने का भी अवसर है।
केदारनाथ धाम किस जिले में स्थित है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?
केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और यह हिंदुओं के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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