10 अगस्त 2026
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'द केरल स्टोरी 2' के निर्माता विपुल शाह को केरल हाईकोर्ट का नोटिस, सर्टिफिकेशन और शीर्षक पर उठे सवाल

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'द केरल स्टोरी 2' के निर्माता विपुल शाह को केरल हाईकोर्ट का नोटिस, सर्टिफिकेशन और शीर्षक पर उठे सवाल

सारांश

केरल हाईकोर्ट ने 'द केरल स्टोरी 2' के निर्माता विपुल शाह को नोटिस जारी किया। याचिका में सर्टिफिकेशन को चुनौती और शीर्षक से 'केरल' हटाने की माँग है। ओटीटी पर उपलब्धता के कारण याचिकाकर्ता का कहना है कि विवाद अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 18 जून 2026 को निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' पर नोटिस जारी किया।
याचिका में फिल्म के सर्टिफिकेशन को चुनौती और शीर्षक से 'केरल' शब्द हटाने की माँग की गई है।
फिल्म 1 मई को ज़ी एंटरटेनमेंट के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई; याचिका में प्लेटफॉर्म को भी पक्षकार बनाने की माँग।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करती है और सामाजिक एकता को प्रभावित करती है।
कुनिहिकृष्णन की एकल पीठ ने सुनवाई की; पूर्व में डिवीजन बेंच फिल्म पर अस्थायी रोक हटा चुकी है।

केरल हाईकोर्ट ने 18 जून 2026 को फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस याचिका में फिल्म के सर्टिफिकेशन को चुनौती दी गई है और फिल्म के शीर्षक से 'केरल' शब्द हटाने की माँग की गई है। कोच्चि में दायर यह याचिका तब सामने आई है जब फिल्म सिनेमाघरों के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है।

अदालत में क्या हुआ

न्यायमूर्ति पी.वी. कुनिहिकृष्णन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि क्या यह याचिका अब प्रासंगिक रह गई है, क्योंकि फिल्म पहले ही रिलीज हो चुकी है और बड़ी संख्या में दर्शक इसे देख चुके हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ, क्योंकि फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने के कारण इसका प्रभाव निरंतर बना हुआ है।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं

याचिकाकर्ता का कथित तौर पर कहना है कि फिल्म का कंटेंट केरल की सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचाता है और समाज में भ्रामक संदेश फैलाता है। याचिका के अनुसार, फिल्म के कुछ हिस्से समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, राष्ट्रीय एकता को क्षति पहुँचाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसे मामलों को बढ़ावा दे सकते हैं। याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि फिल्म का कंटेंट भारतीय न्याय संहिता के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म को भी पक्षकार बनाने की माँग

याचिका में ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को भी पक्षकार बनाने की माँग की गई है, क्योंकि फिल्म को इसी प्लेटफॉर्म पर 1 मई को डिजिटल रूप से रिलीज किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब फिल्म डिजिटल माध्यम से उपलब्ध है, तो प्लेटफॉर्म की भी जिम्मेदारी बनती है। याचिका के समर्थन में ओटीटी प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी को भेजा गया ईमेल और सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट अदालत में पेश किए गए हैं।

पहले भी हो चुका है विवाद

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब यह मामला अदालत की दहलीज तक पहुँचा हो। फिल्म की रिलीज से पहले भी कई याचिकाएँ दाखिल की गई थीं। उस दौरान न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया था, जबकि एक डिवीजन बेंच ने फिल्म पर लगी अस्थायी रोक हटाते हुए इसे रिलीज की अनुमति दी थी। यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म की पहली कड़ी को लेकर भी देशभर में व्यापक विवाद हुआ था।

आगे क्या होगा

अदालत ने नोटिस जारी कर निर्माता विपुल अमृतलाल शाह से जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि याचिकाकर्ता की माँगें सुनवाई योग्य हैं या नहीं। ओटीटी पर फिल्म की उपलब्धता को देखते हुए डिजिटल कंटेंट की जवाबदेही का सवाल भी इस मामले में केंद्रीय मुद्दा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रिलीज के बाद ओटीटी पर चुनौती। सवाल यह है कि अदालतें कब तक सर्टिफिकेशन बोर्ड के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा करती रहेंगी, जबकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) पहले ही अपनी मंजूरी दे चुका है। ओटीटी प्लेटफॉर्म को पक्षकार बनाने की माँग डिजिटल कंटेंट की जवाबदेही पर एक नई बहस खोलती है, जिसका कोई स्पष्ट कानूनी ढाँचा अभी तक नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह मामला केवल एक फिल्म के बारे में नहीं, बल्कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामुदायिक प्रतिनिधित्व की सीमाओं के बीच बढ़ते तनाव का प्रतिबिंब है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाईकोर्ट ने 'द केरल स्टोरी 2' पर नोटिस क्यों जारी किया?
केरल हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को नोटिस जारी किया, जिसमें फिल्म के सर्टिफिकेशन को चुनौती दी गई है और शीर्षक से 'केरल' शब्द हटाने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म का कंटेंट सामाजिक एकता और धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करता है।
याचिका में ओटीटी प्लेटफॉर्म को क्यों शामिल किया गया है?
फिल्म 1 मई को ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि डिजिटल उपलब्धता के कारण फिल्म का प्रभाव जारी है, इसलिए प्लेटफॉर्म की भी कंटेंट के प्रति जिम्मेदारी बनती है।
क्या इससे पहले भी 'द केरल स्टोरी 2' पर अदालत में मामला आया था?
हाँ, फिल्म की रिलीज से पहले भी कई याचिकाएँ दाखिल हुई थीं। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया था, जबकि एक डिवीजन बेंच ने अस्थायी रोक हटाकर फिल्म को रिलीज की अनुमति दी थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत में क्या सबूत पेश किए हैं?
याचिकाकर्ता ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी को भेजा गया ईमेल और सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट अदालत में पेश किए हैं। इनके जरिए दावा किया गया है कि फिल्म को कुछ जगहों पर वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताया जा रहा है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत ने निर्माता विपुल शाह से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। ओटीटी को पक्षकार बनाने की माँग पर भी अदालत का रुख स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
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