खड़गे का बड़ा आरोप: 'देश में अघोषित आपातकाल', सोमवार को CJI से मिलेगा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 11 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — उनका कहना है कि देश में फिलहाल 'अघोषित आपातकाल' जैसे हालात बन चुके हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पुलिस बल का बेजा इस्तेमाल कर रही है और युवाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश हो रही है।
मुख्य आरोप: आपातकाल से तुलना
खड़गे ने हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब 32 हज़ार पुलिसकर्मियों की तैनाती का हवाला देते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बल का प्रयोग सरकार की घबराहट को उजागर करता है। उन्होंने कहा, 'सरकार युवाओं के प्रदर्शन से डर रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में लोगों को बिना पर्याप्त आधार के गिरफ्तार किया जा रहा है।
खड़गे ने इसकी तुलना आपातकाल के दौर से करते हुए एक दिलचस्प तर्क दिया — उनके अनुसार 1975-77 के आपातकाल में भी ट्रेनें और उड़ानें नहीं रोकी गई थीं, और मनमाने तरीके से गिरफ्तारियाँ नहीं होती थीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात उस दौर से भी ज़्यादा चिंताजनक हैं।
खड़गे का व्यक्तिगत अनुभव
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि आपातकाल के दौरान वे कर्नाटक में शिक्षा मंत्री थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री देवराज उर्स के नेतृत्व में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय भी प्रशासन नागरिकों को बेवजह गिरफ्तार करने से बचता था। यह अनुभव उनकी मौजूदा आलोचना को एक ऐतिहासिक संदर्भ देता है।
CJI से मुलाकात की तैयारी
खड़गे ने घोषणा की कि सोमवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात करेगा। इसके लिए उन्होंने स्वयं और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पत्र लिखकर शाम 4 से 5 बजे के बीच का समय माँगा है।
खड़गे ने स्पष्ट किया कि इस मुलाकात में कोई माँगपत्र नहीं सौंपा जाएगा, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों से CJI को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना है कि न्यायपालिका के समक्ष नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी चिंताएँ व्यक्त करना उनका उद्देश्य है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि खड़गे के इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार केंद्र पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के आरोप लगाते रहे हैं।
आगे क्या होगा
CJI से कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की यह मुलाकात राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि न्यायपालिका के माध्यम से भी नागरिक अधिकारों की लड़ाई लड़ी जाएगी। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और न्यायपालिका का रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।