25 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मन की बात में PM मोदी ने पंजाब की 'खेती विरासत मिशन' को सराहा, जैविक खेती और बुनकरी को मिली नई पहचान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मन की बात में PM मोदी ने पंजाब की 'खेती विरासत मिशन' को सराहा, जैविक खेती और बुनकरी को मिली नई पहचान

सारांश

मालवा की ज़मीन से उठी एक छोटी-सी पहल को मिला राष्ट्रीय मंच — 'खेती विरासत मिशन' की 'नव-त्रिन्जन' पहल न सिर्फ ऑर्गेनिक कपास उगा रही है, बल्कि रमनदीप, रेखा, सुनेहा और रजनी जैसी महिलाओं को मज़दूरी से कुशल बुनकर बना रही है। PM मोदी ने 'मन की बात' में की सराहना।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में पंजाब की संस्था 'खेती विरासत मिशन' की प्रशंसा की।
संस्था की पहल 'नव-त्रिन्जन' पंजाब के मालवा क्षेत्र में बिना रसायन के ऑर्गेनिक और प्राकृतिक रंगों वाली कपास उगाती है।
संस्था द्वारा स्थापित बुनाई स्कूल ने रमनदीप कौर, रेखा रानी, सुनेहा देवी और रजनी कौर सहित अनेक महिलाओं को कुशल बुनकर बनाया।
रेखा रानी द्वारा निर्मित शॉल भारत की राष्ट्रपति को भेंट की गई।
PM मोदी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर इस टीम से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में पंजाब की संस्था 'खेती विरासत मिशन' की प्रशंसा की, जो जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संस्था देश की उन परंपराओं को नई ऊर्जा दे रही है, जो पीढ़ियों से भारतीय पहचान का हिस्सा रही हैं।

मुख्य घोषणाएँ और संस्था का परिचय

प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में कहा, 'खेती विरासत मिशन' ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष पहल शुरू की, जिसे 'नव-त्रिन्जन' नाम दिया गया। मोदी ने कहा, 'हमारे देश में ऐसे अनेक पारंपरिक हुनर हैं, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं और सुखद ये है कि अब इन परंपराओं से जुड़कर अनेकविध नए प्रयोग भी हो रहे हैं।'

इस पहल के अंतर्गत बिना रासायनिक खाद के ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है। इसमें प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी शामिल है, जिससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अतिरिक्त रासायनिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बुनाई स्कूल और महिला सशक्तीकरण

'नव-त्रिन्जन' ने कुछ वर्ष पूर्व एक बुनाई स्कूल भी स्थापित किया, जिसका उद्देश्य बुनकरी के पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। इस स्कूल ने विशेष रूप से उन महिलाओं के जीवन में बदलाव लाया है, जो पहले असंगठित मज़दूरी पर निर्भर थीं।

प्रधानमंत्री ने पंजाब की रमनदीप कौर का उदाहरण दिया, जो पहले मज़दूर के रूप में कार्यरत थीं, किन्तु स्कूल से प्रशिक्षण के बाद आज एक कुशल बुनकर के रूप में पहचानी जाती हैं। एक अन्य महिला रेखा रानी ने प्रशिक्षण लेने से पूर्व कभी हैंडलूम नहीं देखा था, किन्तु उनके द्वारा बनाई गई शॉल भारत की राष्ट्रपति को भेंट की गई।

और भी प्रेरक कहानियाँ

प्रधानमंत्री ने सुनेहा देवी की भी सराहना की, जो पहले घरों में घरेलू कार्य करती थीं और अब हैंडलूम पर उत्कृष्ट कपड़ा तैयार कर रही हैं। रजनी कौर, जो पहले खेतों में मज़दूरी पर आश्रित थीं, अब नए हुनर की बदौलत अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं।

मोदी ने बताया कि स्कूल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ऐसी अनेक महिलाएँ अब स्वदेशी ऑर्गेनिक कपास से बने धागों का उपयोग कर शॉल, तौलिए और अन्य वस्त्र तैयार कर रही हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का अनुभव

प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि कुछ महीने पूर्व राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उन्हें 'खेती विरासत मिशन' की टीम से व्यक्तिगत रूप से मिलने का अवसर मिला। उस दौरान उन्होंने टीम के सदस्यों के कार्य के प्रति समर्पण और उत्साह को प्रत्यक्ष देखा।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दे रही है। 'मन की बात' जैसे मंच से मिली यह पहचान 'खेती विरासत मिशन' की पहुँच और प्रभाव को और व्यापक बना सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस तरह की जमीनी पहलों को नीतिगत और वित्तीय समर्थन भी उतनी ही तत्परता से मिलता है, जितनी तारीफ मिली है। पंजाब में रासायनिक खेती के दशकों पुराने चक्र को तोड़ना केवल एक संस्था के भरोसे संभव नहीं — इसके लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर ठोस नीतिगत हस्तक्षेप ज़रूरी है। महिला बुनकरों की सफलता की कहानियाँ प्रेरक हैं, किन्तु इनके उत्पादों के लिए बाज़ार तक स्थायी पहुँच सुनिश्चित करना अभी भी एक अनुत्तरित चुनौती है। 'मन की बात' में उल्लेख एक शुरुआत है — स्थायी बदलाव के लिए नीति और बजट दोनों को साथ चलना होगा।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'खेती विरासत मिशन' क्या है?
'खेती विरासत मिशन' पंजाब की एक संस्था है जो जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने का कार्य करती है। इसकी 'नव-त्रिन्जन' पहल मालवा क्षेत्र में बिना रासायनिक खाद के ऑर्गेनिक कपास उगाती है और एक बुनाई स्कूल के ज़रिये महिलाओं को हैंडलूम का प्रशिक्षण देती है।
PM मोदी ने 'खेती विरासत मिशन' की तारीफ कब और कहाँ की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में इस संस्था की सराहना की। उन्होंने संस्था के काम को पारंपरिक हुनर को आधुनिक समय के अनुकूल बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
'नव-त्रिन्जन' पहल क्या है और यह कैसे काम करती है?
'नव-त्रिन्जन' पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल है। इसमें बिना रसायन के ऑर्गेनिक कपास और प्राकृतिक रंगों वाली कपास उगाई जाती है, जिससे कपड़ा रंगाई के लिए अलग रासायनिक प्रक्रिया की ज़रूरत नहीं पड़ती।
इस पहल से महिलाओं को कैसे फ़ायदा हुआ है?
बुनाई स्कूल से प्रशिक्षण लेने के बाद रमनदीप कौर, रेखा रानी, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाएँ, जो पहले मज़दूरी या घरेलू काम पर निर्भर थीं, अब कुशल बुनकर बन चुकी हैं। रेखा रानी द्वारा बनाई गई शॉल भारत की राष्ट्रपति को भेंट की जा चुकी है।
क्या PM मोदी इस टीम से व्यक्तिगत रूप से मिले हैं?
हाँ, PM मोदी के अनुसार कुछ महीने पहले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उन्हें 'खेती विरासत मिशन' की टीम से मिलने का अवसर मिला था। उस दौरान उन्होंने टीम के कार्य के प्रति समर्पण और उत्साह को प्रत्यक्ष अनुभव किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले