मन की बात में PM मोदी ने पंजाब की 'खेती विरासत मिशन' को सराहा, जैविक खेती और बुनकरी को मिली नई पहचान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में पंजाब की संस्था 'खेती विरासत मिशन' की प्रशंसा की, जो जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संस्था देश की उन परंपराओं को नई ऊर्जा दे रही है, जो पीढ़ियों से भारतीय पहचान का हिस्सा रही हैं।
मुख्य घोषणाएँ और संस्था का परिचय
प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में कहा, 'खेती विरासत मिशन' ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष पहल शुरू की, जिसे 'नव-त्रिन्जन' नाम दिया गया। मोदी ने कहा, 'हमारे देश में ऐसे अनेक पारंपरिक हुनर हैं, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं और सुखद ये है कि अब इन परंपराओं से जुड़कर अनेकविध नए प्रयोग भी हो रहे हैं।'
इस पहल के अंतर्गत बिना रासायनिक खाद के ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है। इसमें प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी शामिल है, जिससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अतिरिक्त रासायनिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बुनाई स्कूल और महिला सशक्तीकरण
'नव-त्रिन्जन' ने कुछ वर्ष पूर्व एक बुनाई स्कूल भी स्थापित किया, जिसका उद्देश्य बुनकरी के पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। इस स्कूल ने विशेष रूप से उन महिलाओं के जीवन में बदलाव लाया है, जो पहले असंगठित मज़दूरी पर निर्भर थीं।
प्रधानमंत्री ने पंजाब की रमनदीप कौर का उदाहरण दिया, जो पहले मज़दूर के रूप में कार्यरत थीं, किन्तु स्कूल से प्रशिक्षण के बाद आज एक कुशल बुनकर के रूप में पहचानी जाती हैं। एक अन्य महिला रेखा रानी ने प्रशिक्षण लेने से पूर्व कभी हैंडलूम नहीं देखा था, किन्तु उनके द्वारा बनाई गई शॉल भारत की राष्ट्रपति को भेंट की गई।
और भी प्रेरक कहानियाँ
प्रधानमंत्री ने सुनेहा देवी की भी सराहना की, जो पहले घरों में घरेलू कार्य करती थीं और अब हैंडलूम पर उत्कृष्ट कपड़ा तैयार कर रही हैं। रजनी कौर, जो पहले खेतों में मज़दूरी पर आश्रित थीं, अब नए हुनर की बदौलत अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं।
मोदी ने बताया कि स्कूल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ऐसी अनेक महिलाएँ अब स्वदेशी ऑर्गेनिक कपास से बने धागों का उपयोग कर शॉल, तौलिए और अन्य वस्त्र तैयार कर रही हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का अनुभव
प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि कुछ महीने पूर्व राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उन्हें 'खेती विरासत मिशन' की टीम से व्यक्तिगत रूप से मिलने का अवसर मिला। उस दौरान उन्होंने टीम के सदस्यों के कार्य के प्रति समर्पण और उत्साह को प्रत्यक्ष देखा।
यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दे रही है। 'मन की बात' जैसे मंच से मिली यह पहचान 'खेती विरासत मिशन' की पहुँच और प्रभाव को और व्यापक बना सकती है।