30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मन की बात में मैथिली भुए का जिक्र: देबरीगढ़ समुदाय में उत्साह, 60 से अधिक महिलाएं वन संरक्षण में सक्रिय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मन की बात में मैथिली भुए का जिक्र: देबरीगढ़ समुदाय में उत्साह, 60 से अधिक महिलाएं वन संरक्षण में सक्रिय

सारांश

मन की बात के 137वें एपिसोड में PM मोदी ने ओडिशा के धोड़रोकुसुम गांव की मैथिली भुए की कहानी सुनाई — एक महिला जो जंगल से लकड़ी काटने वाली से वन्यजीव संरक्षक बन गई। आज उनकी प्रेरणा से 60 से अधिक महिलाएं देबरीगढ़ में वन संरक्षण और इको-टूरिज्म से जुड़ चुकी हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में ओडिशा की मैथिली भुए का उल्लेख किया।
मैथिली भुए 2023 से देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ी हैं और वन संरक्षण को आजीविका का माध्यम बना चुकी हैं।
उनकी प्रेरणा से 60 से अधिक महिलाएं वन्यजीव सुरक्षा, घास के मैदान विकास और इको-टूरिज्म में सक्रिय हो चुकी हैं।
डीएफओ अंशुप्रज्ञा डैश ने कहा कि PM के जिक्र से समुदाय और स्टाफ में उत्साह बढ़ा है और सैंक्चुअरी की सुरक्षा और मजबूत होगी।
मैथिली ने 'ग्रीन विलेज' अभियान के तहत गांव को प्लास्टिक-मुक्त बनाने और हर घर में शौचालय सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में ओडिशा के देबरीगढ़ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से जुड़ी मैथिली भुए का उल्लेख किया, जिसके बाद बरगढ़ जिले के स्थानीय समुदाय और सैंक्चुअरी के कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मैथिली धोड़रोकुसुम गांव की निवासी हैं और 2023 से देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़कर जंगल संरक्षण को अपनी आजीविका का माध्यम बना चुकी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैथिली पहले जलावन की लकड़ी, महुआ, केंदु पत्ता और बांस की कोपलों के लिए जंगल पर निर्भर थीं। इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद उनका जंगल के साथ रिश्ता एक नई दिशा में बदल गया और अब वन संरक्षण ही उनकी आजीविका का आधार है।

मोदी ने आगे कहा, 'मैथिली के जीवन में आए इस बदलाव ने दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित किया। आज 60 से अधिक महिलाएं जंगल के संरक्षण में जुड़ चुकी हैं।' इनमें से कुछ वन्यजीव सुरक्षा का दायित्व संभाल रही हैं, कुछ घास के मैदानों के विकास में लगी हैं और कई इको-टूरिज्म गतिविधियों में सक्रिय हैं।

मैथिली भुए का योगदान

मैथिली भुए 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं। इससे पहले उन्होंने 'ग्रीन विलेज' अभियान के तहत हर घर में शौचालय और डस्टबिन सुनिश्चित करने और गांव को प्लास्टिक-मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने होमस्टे को पर्यावरण-अनुकूल बनाने और स्थानीय महिलाओं को इको-टूरिज्म गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने का काम भी किया।

पुरुष-प्रधान सामाजिक परिवेश में काम करते हुए मैथिली ने अपनी लगन, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता से न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी संरक्षण कार्यों में सहभागी बनाया।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

देबरीगढ़ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के डीएफओ अंशुप्रज्ञा डैश ने कहा कि समुदाय के सभी सदस्य और सैंक्चुअरी का पूरा स्टाफ प्रधानमंत्री मोदी का आभारी है। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी ने हमारे समुदाय के बारे में बोला, जिसकी वजह से सभी बहुत खुश हैं। मन की बात का कार्यक्रम पूरा गांव देख रहा था।'

डैश ने आगे बताया कि यह उल्लेख यहां के लोगों को आने वाले समय में और कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे संस्था को भी फायदा होगा और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की सुरक्षा और मजबूत होगी।

आम जनता पर असर

अलग-अलग गांवों के लोगों ने एकत्र होकर यह कार्यक्रम देखा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के इस जिक्र ने उन्हें वन्यजीव और जंगल के संरक्षण के लिए और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी है। स्थानीय लोगों को यह भी उम्मीद है कि इस राष्ट्रीय पहचान से संरक्षण प्रयासों के लिए व्यापक जन-समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सामुदायिक वन-प्रबंधन मॉडल को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज हो रही हैं। देबरीगढ़ का यह उदाहरण दर्शाता है कि इको-टूरिज्म आजीविका और संरक्षण को एक साथ साध सकता है।

क्या होगा आगे

प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के बाद देबरीगढ़ इको-टूरिज्म की ओर पर्यटकों की रुचि बढ़ने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इससे और अधिक महिलाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिलेगा और सैंक्चुअरी की राष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सामुदायिक इको-टूरिज्म मॉडल का प्रमाण है जो आजीविका और संरक्षण को एक साथ साध सकता है। गौरतलब है कि देश के कई वन्यजीव अभयारण्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन-निर्भरता आज भी बड़ी चुनौती है — देबरीगढ़ का यह मॉडल उन क्षेत्रों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प प्रस्तुत करता है। असली परीक्षा यह है कि क्या इस प्रेरणा को नीतिगत समर्थन और संसाधन मिलेंगे, ताकि 60 महिलाओं की यह पहल एक टिकाऊ और दोहराने योग्य राष्ट्रीय मॉडल बन सके।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैथिली भुए कौन हैं और उन्हें मन की बात में क्यों जगह मिली?
मैथिली भुए ओडिशा के बरगढ़ जिले के धोड़रोकुसुम गांव की निवासी हैं, जो 2023 से देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़कर वन संरक्षण में सक्रिय हैं। PM मोदी ने मन की बात के 137वें एपिसोड में उनकी कहानी को इसलिए उजागर किया क्योंकि उन्होंने जंगल-निर्भर जीवन से इको-टूरिज्म की ओर बदलाव कर 60 से अधिक महिलाओं को प्रेरित किया।
देबरीगढ़ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में महिलाएं किस तरह का काम कर रही हैं?
देबरीगढ़ में 60 से अधिक महिलाएं वन्यजीव सुरक्षा, घास के मैदानों के विकास और इको-टूरिज्म गतिविधियों में योगदान दे रही हैं। मैथिली भुए के नेतृत्व में इन महिलाओं ने गांव को प्लास्टिक-मुक्त बनाने और होमस्टे को पर्यावरण-अनुकूल बनाने का काम भी किया है।
मन की बात के 137वें एपिसोड में PM मोदी ने ओडिशा के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि मैथिली भुए पहले जलावन की लकड़ी और वन उपज के लिए जंगल पर निर्भर थीं, लेकिन इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद जंगल का संरक्षण ही उनकी आजीविका का माध्यम बन गया। उन्होंने यह भी कहा कि मैथिली और देबरीगढ़ की इन महिलाओं ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा और जीवन में समृद्धि एक साथ संभव है।
देबरीगढ़ का 'ग्रीन विलेज' अभियान क्या है?
ग्रीन विलेज अभियान के तहत देबरीगढ़ के गांवों में हर घर में शौचालय और डस्टबिन सुनिश्चित किए गए और प्लास्टिक के उपयोग को धीरे-धीरे बंद किया गया। इस अभियान में मैथिली भुए की केंद्रीय भूमिका रही और उन्होंने गांव की महिलाओं को इसमें सहभागी बनाया।
PM मोदी के जिक्र से देबरीगढ़ समुदाय पर क्या असर पड़ा?
डीएफओ अंशुप्रज्ञा डैश के अनुसार, समुदाय के सभी सदस्यों और सैंक्चुअरी के स्टाफ में उत्साह बढ़ा है और यह उल्लेख लोगों को और कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित करेगा। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इससे संरक्षण प्रयासों के लिए व्यापक जन-समर्थन मिलेगा और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की सुरक्षा और मजबूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले