मन की बात में मैथिली भुए का जिक्र: देबरीगढ़ समुदाय में उत्साह, 60 से अधिक महिलाएं वन संरक्षण में सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में ओडिशा के देबरीगढ़ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से जुड़ी मैथिली भुए का उल्लेख किया, जिसके बाद बरगढ़ जिले के स्थानीय समुदाय और सैंक्चुअरी के कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मैथिली धोड़रोकुसुम गांव की निवासी हैं और 2023 से देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़कर जंगल संरक्षण को अपनी आजीविका का माध्यम बना चुकी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैथिली पहले जलावन की लकड़ी, महुआ, केंदु पत्ता और बांस की कोपलों के लिए जंगल पर निर्भर थीं। इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद उनका जंगल के साथ रिश्ता एक नई दिशा में बदल गया और अब वन संरक्षण ही उनकी आजीविका का आधार है।
मोदी ने आगे कहा, 'मैथिली के जीवन में आए इस बदलाव ने दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित किया। आज 60 से अधिक महिलाएं जंगल के संरक्षण में जुड़ चुकी हैं।' इनमें से कुछ वन्यजीव सुरक्षा का दायित्व संभाल रही हैं, कुछ घास के मैदानों के विकास में लगी हैं और कई इको-टूरिज्म गतिविधियों में सक्रिय हैं।
मैथिली भुए का योगदान
मैथिली भुए 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं। इससे पहले उन्होंने 'ग्रीन विलेज' अभियान के तहत हर घर में शौचालय और डस्टबिन सुनिश्चित करने और गांव को प्लास्टिक-मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने होमस्टे को पर्यावरण-अनुकूल बनाने और स्थानीय महिलाओं को इको-टूरिज्म गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने का काम भी किया।
पुरुष-प्रधान सामाजिक परिवेश में काम करते हुए मैथिली ने अपनी लगन, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता से न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी संरक्षण कार्यों में सहभागी बनाया।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
देबरीगढ़ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के डीएफओ अंशुप्रज्ञा डैश ने कहा कि समुदाय के सभी सदस्य और सैंक्चुअरी का पूरा स्टाफ प्रधानमंत्री मोदी का आभारी है। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी ने हमारे समुदाय के बारे में बोला, जिसकी वजह से सभी बहुत खुश हैं। मन की बात का कार्यक्रम पूरा गांव देख रहा था।'
डैश ने आगे बताया कि यह उल्लेख यहां के लोगों को आने वाले समय में और कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे संस्था को भी फायदा होगा और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की सुरक्षा और मजबूत होगी।
आम जनता पर असर
अलग-अलग गांवों के लोगों ने एकत्र होकर यह कार्यक्रम देखा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के इस जिक्र ने उन्हें वन्यजीव और जंगल के संरक्षण के लिए और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी है। स्थानीय लोगों को यह भी उम्मीद है कि इस राष्ट्रीय पहचान से संरक्षण प्रयासों के लिए व्यापक जन-समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सामुदायिक वन-प्रबंधन मॉडल को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज हो रही हैं। देबरीगढ़ का यह उदाहरण दर्शाता है कि इको-टूरिज्म आजीविका और संरक्षण को एक साथ साध सकता है।
क्या होगा आगे
प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के बाद देबरीगढ़ इको-टूरिज्म की ओर पर्यटकों की रुचि बढ़ने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इससे और अधिक महिलाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिलेगा और सैंक्चुअरी की राष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।