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मन की बात के 136वें एपिसोड में PM मोदी की अपील — पानी की हर बूंद बचाएं, कुएं-तालाब पुनर्जीवित करें

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मन की बात के 136वें एपिसोड में PM मोदी की अपील — पानी की हर बूंद बचाएं, कुएं-तालाब पुनर्जीवित करें

सारांश

मन की बात के 136वें एपिसोड में PM मोदी ने 'कैच द रेन अभियान' को जन आंदोलन बनाने की अपील की। 4 जुलाई से चल रहे इस विशेष अभियान में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में तालाब, कुएँ और बावड़ियाँ पुनर्जीवित हो रही हैं।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 26 जुलाई 2026 को 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में 'कैच द रेन अभियान' पर विस्तार से चर्चा की।
4 जुलाई से देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन का विशेष अभियान जारी है।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में करीब डेढ़ हजार तालाब बनाए गए; नंदियाल की सभी ग्राम पंचायतें अभियान से जुड़ीं।
कोरबा, भुवनेश्वर और विजयनगरम जैसे शहरों में भी उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आस-पास के तालाब, कुएँ या बावड़ी की जिम्मेदारी लें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में देशवासियों से जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने 'कैच द रेन अभियान' को जन आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया और नागरिकों से अपने आस-पास के कुओं, बावड़ियों और तालाबों को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी लेने की अपील की।

कैच द रेन अभियान: क्या है संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'कैच द रेन का संदेश बहुत सीधा है — जहाँ बारिश गिरे, वहीं सहेजिए।' उन्होंने बताया कि 4 जुलाई से देशभर में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नई गति दी जा रही है। उन्होंने पिछले एपिसोड में इस अभियान का उल्लेख करते हुए इसे व्यापक जन भागीदारी से जोड़ने का आग्रह किया था।

देशभर में उत्साहजनक भागीदारी

मोदी ने कहा कि गाँव हो या शहर, पंचायतें हों या सामाजिक संस्थाएँ — हर जगह लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है। कहीं पुराने तालाबों से गाद निकाली जा रही है, तो कहीं कुएँ और बावड़ियों को नया जीवन मिल रहा है। बंद पड़े बोरवेल अब भूजल पुनर्भरण के माध्यम बन रहे हैं।

राज्यों में ज़मीनी बदलाव

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में करीब डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं। नरसीपुर में अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार किया गया है। महाराष्ट्र के नासिक में बड़ी मात्रा में जल संग्रहण क्षमता विकसित हुई है। आंध्र प्रदेश के नंदियाल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान से जुड़ी हैं और पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में भी इस अभियान के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।

आम जनता पर असर और आगे की राह

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आस-पास किसी एक तालाब, कुएँ या बावड़ी की देखरेख की जिम्मेदारी उठाएँ। उन्होंने कहा, 'आज बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए सबसे बड़ी पूंजी है।' यह अभियान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का वितरण अनिश्चित होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके ज़मीनी क्रियान्वयन की है। डेढ़ हजार तालाब और पुनर्जीवित बावड़ियाँ उत्साहजनक हैं, परंतु देश में भूजल संकट की गहराई को देखते हुए ये प्रयास अभी भी बूंद-बूंद जैसे हैं। यह अभियान तभी टिकाऊ बनेगा जब इसे स्थानीय शासन की जवाबदेही और दीर्घकालिक बजट आवंटन से जोड़ा जाए — केवल रेडियो संबोधन से नहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मन की बात के 136वें एपिसोड में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने 26 जुलाई 2026 को 'कैच द रेन अभियान' को जन आंदोलन बनाने की अपील की और नागरिकों से कुओं, बावड़ियों व तालाबों को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी लेने को कहा। उन्होंने 4 जुलाई से चल रहे विशेष जल संरक्षण अभियान की प्रगति भी साझा की।
'कैच द रेन अभियान' क्या है?
'कैच द रेन अभियान' का मूल संदेश है — जहाँ बारिश गिरे, वहीं पानी सहेजिए। इसके तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस अभियान में किन राज्यों ने भाग लिया है?
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में करीब डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं। महाराष्ट्र के नासिक, आंध्र प्रदेश के नंदियाल, छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में भी उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।
यह अभियान कब से चल रहा है और इसका लक्ष्य क्या है?
4 जुलाई 2026 से देशभर में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका लक्ष्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आम नागरिक इस अभियान में कैसे भाग ले सकते हैं?
PM मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आस-पास के किसी एक तालाब, कुएँ या बावड़ी की देखरेख की जिम्मेदारी उठाएँ। पंचायतें और सामाजिक संस्थाएँ भी इस अभियान से जुड़ सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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