मन की बात 135: मोदी की अपील पर देशवासियों का संयम, सोना खरीद और विदेश यात्रा में कमी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसी स्थिति के बीच उनकी पिछली अपीलों पर नागरिकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। सोना खरीदने से परहेज़, विदेश यात्राएँ टालने और कार पूलिंग अपनाने जैसे कदमों में लोगों की भागीदारी देखी गई है।
मोदी की पिछली अपीलें और उनका संदर्भ
प्रधानमंत्री ने इससे पहले नागरिकों से आग्रह किया था कि जहाँ तक संभव हो, कुछ समय के लिए सोना खरीदने से बचें और विदेश यात्राओं को स्थगित करें। इसके साथ ही उन्होंने कार पूलिंग को बढ़ावा देने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने तथा किसानों से रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक एवं रसायन-मुक्त खेती और जैविक खाद के उपयोग की सलाह दी थी। यह अपील वैश्विक संकट के बीच आत्मनिर्भर व्यवहार की दिशा में एक नागरिक-केंद्रित पहल के रूप में देखी गई।
देशवासियों की प्रतिक्रिया
मोदी ने बताया कि कई परिवारों ने यह निर्णय लिया है कि वे पारिवारिक आयोजनों में नया सोना नहीं खरीदेंगे और आवश्यकता पड़ने पर पुराने सोने को रीसायकल करके उपयोग करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई नागरिकों ने सोशल मीडिया के ज़रिए साझा किया है कि उन्होंने इस बार विदेश यात्राएँ टाल दी हैं।
कार पूलिंग को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है — लोग एक ही दिशा में जाने के लिए साझा वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ यातायात और प्रदूषण में भी कमी दर्ज की जा रही है।
सार्वजनिक परिवहन और प्राकृतिक खेती में बदलाव
प्रधानमंत्री ने बताया कि अब लोग बसों और मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संकेत है। देश के कई हिस्सों में प्राकृतिक खेती और जैविक खाद की माँग में वृद्धि भी दर्ज की गई है।
मोदी का संदेश
मोदी ने कहा, 'मुझे इस बात की खुशी है कि इस ग्लोबल क्राइसिस का हम भारतीय मिलकर मुकाबला कर रहे हैं। मुझे विश्वास है जन भागीदारी की यही शक्ति हमें मजबूती देगी, हमें सफल बनाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक बाज़ारों में उथल-पुथल जारी है और भारत पर भी इसके आर्थिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आगे क्या
गौरतलब है कि 'मन की बात' के ज़रिए प्रधानमंत्री ने पहले भी नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाने के प्रयास किए हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की अपीलों का दीर्घकालिक असर मापना कठिन होता है, लेकिन सरकार का कहना है कि जन भागीदारी ही संकट से उबरने की असली कुंजी है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये बदलाव टिकाऊ साबित होते हैं।