'मन की बात' के 134वें एपिसोड में PM मोदी ने बस्ती के आकाश गुप्ता की नदी सफाई मुहिम को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 31 मई 2026 को 'मन की बात' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के युवा आकाश गुप्ता की प्रेरणादायक पहल का विशेष उल्लेख किया। आकाश ने अपने गाँव की मनोरमा नदी को प्लास्टिक और कचरे से मुक्त कराने के लिए जो संकल्प लिया, उसे मोदी ने 'शिकायत नहीं, शुरुआत' के मंत्र के रूप में देश के सामने रखा।
मनोरमा नदी की दुर्दशा और आकाश का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि आकाश गुप्ता बचपन में जिस मनोरमा नदी को साफ और जीवंत देखते थे, समय के साथ उसमें प्लास्टिक और गंदगी का ढेर लगता गया। इस दृश्य ने आकाश को भीतर से झकझोर दिया। लेकिन उन्होंने शिकायत करने की बजाय बदलाव की शुरुआत करने का रास्ता चुना — और यही 'शिकायत नहीं, शुरुआत' उनका जीवन-मंत्र बन गया।
युवाओं की टीम और सफाई अभियान
आकाश ने अपने दोस्तों को साथ लिया और एक अनौपचारिक सफाई दल तैयार किया। इस दल के पास संसाधन सीमित थे — जाल, फावड़ा और टोकरी — लेकिन इरादा अटल था। ये युवा नदी में उतरकर जलकुंभी निकालते, प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते। मोदी ने बताया कि कई बार एक ही दिन में 50 से 60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया। धीरे-धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से स्वच्छ दिखने लगा और आसपास के लोगों में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी।
गोवा के सेवानिवृत्त शिक्षक बालकृष्ण अइया की कहानी
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने गोवा के सेवानिवृत्त शिक्षक बालकृष्ण अइया का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की गंभीर समस्या से परेशान बालकृष्ण जी ने सेवानिवृत्ति के बाद भी हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठे। उन्होंने पाइपलाइन बिछाने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे कई घरों तक पेयजल पहुँचा। जिन परिवारों को पहले पानी के लिए रोज़ संघर्ष करना पड़ता था, उनके लिए यह राहत बेहद बड़ी साबित हुई।
आम जनता पर असर और व्यापक संदेश
मोदी ने इन दोनों उदाहरणों के ज़रिये यह संदेश दिया कि नागरिक-स्तर की पहल — बिना किसी सरकारी संसाधन या बड़े बजट के — भी समाज में ठोस बदलाव ला सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में नदियों की सफाई और पेयजल आपूर्ति जैसे मुद्दे नीतिगत एजेंडे पर प्रमुखता से हैं। गौरतलब है कि 'मन की बात' के ज़रिये प्रधानमंत्री नियमित रूप से ऐसे ज़मीनी नायकों को राष्ट्रीय मंच देते आए हैं, जो बिना किसी चर्चा के चुपचाप समाज के लिए काम करते हैं।
आने वाले समय में यदि ऐसी पहलों को स्थानीय प्रशासन और जल संरक्षण अभियानों से जोड़ा जाए, तो ये छोटे प्रयास बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं।