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मन की बात के 134वें एपिसोड में मनोरमा नदी सफाई अभियान की सराहना, बस्ती के आकाश गुप्ता बोले — 'पूरे गांव के लिए गर्व'

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मन की बात के 134वें एपिसोड में मनोरमा नदी सफाई अभियान की सराहना, बस्ती के आकाश गुप्ता बोले — 'पूरे गांव के लिए गर्व'

सारांश

बस्ती के एक छोटे गांव का युवक, चार साथी, 65 दिन और 300 मीटर की सफाई — और फिर PM मोदी ने 'मन की बात' में नाम लिया। आकाश गुप्ता की मनोरमा नदी पहल अब सिर्फ स्थानीय नहीं, राष्ट्रीय प्रेरणा बन चुकी है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में बस्ती के आकाश गुप्ता के मनोरमा नदी सफाई अभियान की सराहना की।
चार सदस्यीय टीम ने लगातार 65 दिनों में लगभग 300 मीटर नदी क्षेत्र बिना सरकारी सहायता के साफ किया।
अभियान हर्रैया विधानसभा क्षेत्र के लजघटा गांव से शुरू हुआ; अब स्थानीय लोग नदी में स्नान कर रहे हैं और पशु पानी पी रहे हैं।
टीम का अगला कदम — वर्षा ऋतु में नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान ।
आकाश गुप्ता ने नमामि गंगे और स्वच्छता अभियान की सराहना करते हुए सामूहिक भागीदारी की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के युवा समाजसेवी आकाश गुप्ता और उनकी टीम द्वारा चलाए जा रहे मनोरमा नदी सफाई अभियान का विशेष उल्लेख किया। राष्ट्रीय मंच पर इस पहल को मान्यता मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह की लहर है।

राष्ट्रीय पहचान से उत्साहित आकाश गुप्ता

आकाश गुप्ता और उनकी टीम ने गांव में बैठकर 'मन की बात' का यह एपिसोड सुना। जब प्रधानमंत्री ने उनके अभियान का नाम लिया, तो टीम के सदस्यों की आँखें भर आईं। आकाश ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे सफाई अभियान की सराहना की — यह मेरे और पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।' उन्होंने आगे कहा कि बस्ती जिले के एक छोटे से गांव के काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना बेहद प्रेरणादायक है और पूरा गांव प्रधानमंत्री का आभारी है।

मनोरमा नदी की दुर्दशा और अभियान की शुरुआत

बस्ती जिले की पौराणिक मनोरमा नदी लंबे समय से अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही थी। कभी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रही यह नदी प्लास्टिक कचरे, जलकुंभी और अन्य अपशिष्ट से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी थी। कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि यह नदी कम और नाला अधिक दिखने लगी थी।

यह ऐसे समय में आया जब देशभर में जल-निकायों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। करीब दो महीने पहले हर्रैया विधानसभा क्षेत्र के लजघटा गांव से शुरू हुए इस अभियान में आकाश और उनके साथियों ने बिना किसी सरकारी सहायता के श्रमदान किया और नदी से प्लास्टिक, जलकुंभी तथा अन्य कचरा हटाने का बीड़ा उठाया।

मुख्य घटनाक्रम और उपलब्धियाँ

आकाश की चार सदस्यीय टीम ने लगातार 65 दिनों तक अथक परिश्रम करके लगभग 300 मीटर नदी क्षेत्र को साफ किया है। टीम ने सफाई कार्य के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों और प्रशासन का ध्यान भी इस समस्या की ओर खींचा। इसका असर अब साफ दिखने लगा है — जहां पहले नदी गंदगी से पटी थी, वहाँ अब स्थानीय लोग स्नान कर रहे हैं और पशु भी पानी पीने लगे हैं।

गौरतलब है कि हर्रैया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अजय सिंह करते हैं, और यह अभियान क्षेत्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।

सामूहिक प्रयास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

आकाश गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी के नमामि गंगे और स्वच्छता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छता किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, यह सामूहिक प्रयास से ही संभव है। उनका कहना है कि जब तक देश का प्रत्येक नागरिक इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक स्वच्छता का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि नदी सफाई पूरी होने के बाद उनकी टीम वर्षा ऋतु में नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाएगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण को और बल मिल सके।

आगे क्या

'मन की बात' में उल्लेख के बाद यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। आकाश गुप्ता को उम्मीद है कि अधिक लोग इस पहल से जुड़ेंगे, जिससे सफाई कार्य और तेज़ी से आगे बढ़ेगा। यह पहल देशभर के युवाओं को जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रेरित करने की मिसाल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या यह दृश्यता दीर्घकालिक संसाधन और प्रशासनिक समर्थन में बदलती है। आकाश गुप्ता की टीम ने बिना किसी सरकारी मदद के 65 दिन में 300 मीटर साफ किए — यह उपलब्धि उतनी ही व्यवस्थागत विफलता की गवाही है जितनी व्यक्तिगत समर्पण की। असली परीक्षा यह है कि क्या इस राष्ट्रीय पहचान के बाद प्रशासन और स्थानीय निकाय सक्रिय होंगे, या अगली 'मन की बात' तक यह नदी फिर अपने हाल पर छोड़ दी जाएगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोरमा नदी सफाई अभियान क्या है और इसे किसने शुरू किया?
यह उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के लजघटा गांव से शुरू किया गया एक स्वैच्छिक सफाई अभियान है, जिसे युवा समाजसेवी आकाश गुप्ता और उनकी चार सदस्यीय टीम ने बिना किसी सरकारी सहायता के चलाया। टीम ने लगातार 65 दिनों में लगभग 300 मीटर नदी क्षेत्र को प्लास्टिक, जलकुंभी और कचरे से मुक्त किया।
'मन की बात' के 134वें एपिसोड में इस अभियान का उल्लेख क्यों हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में जमीनी स्तर पर चल रहे पर्यावरण संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए आकाश गुप्ता के मनोरमा नदी सफाई अभियान का विशेष उल्लेख किया। इससे यह स्थानीय पहल राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई।
मनोरमा नदी की स्थिति पहले कैसी थी और अब क्या बदला?
मनोरमा नदी प्लास्टिक कचरे और जलकुंभी से इतनी प्रदूषित हो गई थी कि वह नाले जैसी दिखने लगी थी। सफाई अभियान के बाद अब स्थानीय लोग नदी में स्नान कर रहे हैं और पशु भी पानी पीने लगे हैं — जो इसकी बेहतर होती स्थिति का प्रमाण है।
आकाश गुप्ता की टीम का अगला कदम क्या है?
नदी की सफाई पूरी होने के बाद टीम वर्षा ऋतु में नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाने की योजना बना रही है। आकाश गुप्ता का मानना है कि अधिक लोगों के जुड़ने से यह कार्य और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
इस अभियान से आम जनता को क्या प्रेरणा मिलती है?
यह अभियान यह संदेश देता है कि सामूहिक इच्छाशक्ति से बिना सरकारी सहायता के भी पर्यावरण संरक्षण संभव है। आकाश गुप्ता के अनुसार, जब तक देश का हर नागरिक स्वच्छता अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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