किरेन रिजिजू का ऐलान: अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ लगातार होंगी अपडेट, राज्यों से प्रस्ताव जल्द भेजने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 मई 2025 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं को निरंतर अद्यतन और परिष्कृत करती रहेगी। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अल्पसंख्यक कल्याण से संबंधित प्रस्ताव शीघ्र भेजें, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी हो सके।
सम्मेलन का संदर्भ और उद्देश्य
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा सुषमा स्वराज भवन में आयोजित राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के एक दिवसीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए रिजिजू ने कहा, 'हम लगातार अपडेट करते रहेंगे। इसीलिए हम अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में संशोधन करते रहते हैं। राज्य सरकारों से अनुरोध है कि वे प्रस्ताव जल्द से जल्द भेजें।' इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के कामकाज की समीक्षा करना और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन करना था। कई राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री इस अवसर पर उपस्थित रहे।
हज सब्सिडी विवाद पर सरकार का पक्ष
कुछ राजनीतिक दलों द्वारा हज पर लगाए जा रहे आरोपों को सीधे खारिज करते हुए रिजिजू ने कहा, 'हज पर जाने वाले मुसलमान अपने पैसे से जाते हैं। भारत सरकार हज के लिए एक रुपया भी नहीं देती है। जो लोग हज पर जाते हैं, वे खुद खर्च उठाते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कुछ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जो ठीक नहीं है।' गौरतलब है कि हज सब्सिडी का मुद्दा भारत में वर्षों से राजनीतिक बहस का विषय रहा है।
अल्पसंख्यक समुदायों की विविधता पर मंत्री का बयान
रिजिजू ने भारत के अल्पसंख्यक समुदायों की विविधता को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि भारत की मुस्लिम आबादी को एक अलग देश के रूप में देखा जाए, तो वह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। वहीं पारसी समुदाय की आबादी केवल करीब 52-53 हज़ार है, जो एक बड़े गाँव के बराबर है — फिर भी दोनों समुदायों को अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है। यह तुलना अल्पसंख्यक नीति-निर्माण की जटिलता को उजागर करती है।
आयोगों को और प्रभावी बनाने पर जोर
मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य अल्पसंख्यक आयोगों को और अधिक सक्षम बनाना आवश्यक है, ताकि विकास की योजनाएँ अंतिम पायदान तक पहुँच सकें। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ राज्यों में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर अभी और सुधार की आवश्यकता है।
आगे की राह
रिजिजू ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की टीम की सराहना करते हुए कहा कि इस सम्मेलन से विकास संबंधी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई और राज्यों के प्रदर्शन का समग्र आकलन किया गया। राज्यों से प्रस्ताव समय पर मिलने पर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आने की उम्मीद है।