कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती पर खड़गे, शिवकुमार और विजयेंद्र ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की वीरांगना और ऐतिहासिक कित्तूर रियासत की रानी चेन्नम्मा की जयंती पर 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के नेताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक सहित दलगत सीमाओं से परे कई नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर रानी चेन्नम्मा के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया।
खड़गे और शिवकुमार ने दी श्रद्धांजलि
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'अद्वितीय देशभक्त, साहसी महिला और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली पहली स्वतंत्रता सेनानी, कित्तूर रानी चेन्नम्मा की जयंती के अवसर पर, मैं उन्हें सादर नमन करता हूँ।' मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कित्तूर चेन्नम्मा ने दुनिया को यह संदेश दिया कि 'महिला कमजोर नहीं, बल्कि सशक्त होती है।'
शिवकुमार ने आगे लिखा कि ब्रिटिश अत्याचार के विरुद्ध तलवार उठाने का गौरव कर्नाटक की इस गौरवशाली बेटी को जाता है। उन्होंने कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती के अवसर पर सभी कन्नड़ भाषियों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि रानी का साहस और बलिदान सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
भाजपा नेताओं ने भी किया नमन
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने एक्स पोस्ट में लिखा, 'कित्तूर की वीर रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।' उन्होंने रानी को 'देशभक्ति, साहस और नारी शक्ति की अद्वितीय प्रतीक' बताया और कहा कि उनकी शौर्यगाथा हर भारतीय के मन में राष्ट्रप्रेम की लौ जलाती रहेगी।
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में रानी चेन्नम्मा को 'कन्नड़ भूमि की वीरांगना' कहते हुए उनकी वीरता को हमेशा याद रखने की बात कही।
रानी चेन्नम्मा का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि रानी चेन्नम्मा ने सन् 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की अन्यायी 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के विरुद्ध पहली बार सशस्त्र प्रतिरोध का बिगुल फूंका था। वे भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध हथियार उठाने वाली अग्रणी महिला शासकों में से एक मानी जाती हैं — 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी तीन दशक पहले।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में ऐतिहासिक नायकों को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज़ है। दलगत भिन्नताओं के बावजूद रानी चेन्नम्मा की जयंती पर सर्वदलीय नमन, उनकी विरासत के सर्वस्वीकृत महत्व को रेखांकित करता है।
आम जनता और सांस्कृतिक असर
कर्नाटक में कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और राज्य में बड़े स्तर पर मनाई जाती है। रानी का नाम कन्नड़ अस्मिता और नारी सशक्तीकरण का पर्याय बन चुका है। राजनेताओं की ओर से दी गई इस सामूहिक श्रद्धांजलि से यह संदेश जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम के योगदानकर्ताओं की स्मृति आज भी प्रासंगिक और एकताबद्ध करने वाली है।