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कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती पर खड़गे, शिवकुमार और विजयेंद्र ने किया नमन

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कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती पर खड़गे, शिवकुमार और विजयेंद्र ने किया नमन

सारांश

दलगत सीमाओं से परे, कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेताओं ने कित्तूर रानी चेन्नम्मा की जयंती पर श्रद्धांजलि दी — जिन्होंने 1824 में ब्रिटिश 'हड़प नीति' के विरुद्ध 1857 से भी पहले सशस्त्र संघर्ष छेड़ा था। कर्नाटक की यह वीरांगना आज भी नारी सशक्तीकरण और देशभक्ति की अप्रतिम प्रतीक हैं।

मुख्य बातें

कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती पर 23 अक्टूबर 2026 को सर्वदलीय नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें 'अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली पहली स्वतंत्रता सेनानी' बताया।
शिवकुमार ने रानी को 'कन्नड़ पहचान की प्रतीक' और नारी सशक्तीकरण की मिसाल कहा।
भाजपा अध्यक्ष बी.वाई.
विजयेंद्र और नेता प्रतिपक्ष आर.
अशोक ने भी रानी के साहस और बलिदान को नमन किया।
रानी चेन्नम्मा ने 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' के विरुद्ध पहली सशस्त्र क्रांति की थी।

कर्नाटक की वीरांगना और ऐतिहासिक कित्तूर रियासत की रानी चेन्नम्मा की जयंती पर 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के नेताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक सहित दलगत सीमाओं से परे कई नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर रानी चेन्नम्मा के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया।

खड़गे और शिवकुमार ने दी श्रद्धांजलि

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'अद्वितीय देशभक्त, साहसी महिला और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली पहली स्वतंत्रता सेनानी, कित्तूर रानी चेन्नम्मा की जयंती के अवसर पर, मैं उन्हें सादर नमन करता हूँ।' मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कित्तूर चेन्नम्मा ने दुनिया को यह संदेश दिया कि 'महिला कमजोर नहीं, बल्कि सशक्त होती है।'

शिवकुमार ने आगे लिखा कि ब्रिटिश अत्याचार के विरुद्ध तलवार उठाने का गौरव कर्नाटक की इस गौरवशाली बेटी को जाता है। उन्होंने कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती के अवसर पर सभी कन्नड़ भाषियों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि रानी का साहस और बलिदान सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

भाजपा नेताओं ने भी किया नमन

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने एक्स पोस्ट में लिखा, 'कित्तूर की वीर रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।' उन्होंने रानी को 'देशभक्ति, साहस और नारी शक्ति की अद्वितीय प्रतीक' बताया और कहा कि उनकी शौर्यगाथा हर भारतीय के मन में राष्ट्रप्रेम की लौ जलाती रहेगी।

विधानसभा नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में रानी चेन्नम्मा को 'कन्नड़ भूमि की वीरांगना' कहते हुए उनकी वीरता को हमेशा याद रखने की बात कही।

रानी चेन्नम्मा का ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि रानी चेन्नम्मा ने सन् 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की अन्यायी 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के विरुद्ध पहली बार सशस्त्र प्रतिरोध का बिगुल फूंका था। वे भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध हथियार उठाने वाली अग्रणी महिला शासकों में से एक मानी जाती हैं — 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी तीन दशक पहले।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में ऐतिहासिक नायकों को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज़ है। दलगत भिन्नताओं के बावजूद रानी चेन्नम्मा की जयंती पर सर्वदलीय नमन, उनकी विरासत के सर्वस्वीकृत महत्व को रेखांकित करता है।

आम जनता और सांस्कृतिक असर

कर्नाटक में कित्तूर रानी चेन्नम्मा जयंती सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और राज्य में बड़े स्तर पर मनाई जाती है। रानी का नाम कन्नड़ अस्मिता और नारी सशक्तीकरण का पर्याय बन चुका है। राजनेताओं की ओर से दी गई इस सामूहिक श्रद्धांजलि से यह संदेश जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम के योगदानकर्ताओं की स्मृति आज भी प्रासंगिक और एकताबद्ध करने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों का एकसाथ नमन करना कर्नाटक की राजनीति में उनकी केंद्रीय प्रासंगिकता को दर्शाता है — वे किसी एक दल की विरासत नहीं, बल्कि कन्नड़ अस्मिता का साझा प्रतीक हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 1824 का कित्तूर विद्रोह 1857 से तीन दशक पहले हुआ था, फिर भी राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में इसे वह स्थान नहीं मिला जिसका वह हकदार है। राजनेताओं की सोशल मीडिया श्रद्धांजलि स्वागत योग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह स्मरण स्कूली पाठ्यपुस्तकों और नीतिगत पहलों में भी उतना ही सक्रिय है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कित्तूर रानी चेन्नम्मा कौन थीं?
कित्तूर रानी चेन्नम्मा कर्नाटक की ऐतिहासिक कित्तूर रियासत की शासक थीं, जिन्होंने 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया था। वे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले ब्रिटिश शासन का सशस्त्र प्रतिरोध करने वाली अग्रणी भारतीय महिला शासकों में गिनी जाती हैं।
रानी चेन्नम्मा जयंती 2026 पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
23 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने एक्स पर पोस्ट कर रानी चेन्नम्मा को नमन किया। दलगत सीमाओं से परे यह सर्वदलीय श्रद्धांजलि उनकी विरासत के व्यापक महत्व को रेखांकित करती है।
कित्तूर विद्रोह 1824 क्यों हुआ था?
1824 का कित्तूर विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के विरोध में हुआ था, जिसके तहत कंपनी ने उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में रियासतों को हड़पने की कोशिश की। रानी चेन्नम्मा ने इस अन्यायी नीति को अस्वीकार कर सशस्त्र संघर्ष का रास्ता चुना, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
रानी चेन्नम्मा का कर्नाटक की राजनीति और संस्कृति में क्या महत्व है?
रानी चेन्नम्मा कन्नड़ अस्मिता, नारी सशक्तीकरण और देशभक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। कर्नाटक में उनकी जयंती राज्यस्तरीय आयोजनों के साथ मनाई जाती है और वे कांग्रेस से लेकर भाजपा तक सभी दलों के लिए आदर का केंद्र हैं, जो उनकी विरासत की सर्वस्वीकृत प्रासंगिकता दर्शाता है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने रानी चेन्नम्मा को क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रानी चेन्नम्मा को 'अद्वितीय देशभक्त, साहसी महिला और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली पहली स्वतंत्रता सेनानी' बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर उनकी जयंती पर सादर नमन किया।
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