रानी चेन्नम्मा जयंती 2026: गडकरी, मनोहर लाल समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने कित्तूर वीरांगना को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
कित्तूर की वीरांगना रानी चेन्नम्मा की जयंती पर 23 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 1824 में सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व करने वाली इस वीरांगना को आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अग्रदूत माना जाता है।
केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मातृभूमि के गौरव एवं सम्मान की रक्षा हेतु अंग्रेजों से लड़ने वाली महान वीरांगना कित्तूर की रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें सादर नमन।'
केंद्रीय आवास व शहरी मामलों एवं विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने अपनी श्रद्धांजलि में लिखा, 'नारी शक्ति के अद्भुत शौर्य की प्रतीक, कित्तूर की महारानी, महान स्वतंत्रता सेनानी रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन! अपने शौर्य, पराक्रम और बुद्धिमत्ता से ब्रिटिश सेना को लोहे के चने चबाने पर मजबूर कर देने वाली वीरांगना की गौरव गाथा पर युगों-युगों तक एक कृतज्ञ देश को सर्वदा गर्व रहेगा।'
केंद्रीय आयुष एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी एक्स पर लिखा, 'महान वीरांगना कित्तूर की रानी चेन्नम्मा जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।'
राज्य नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली कित्तूर की वीरांगना रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन! उनका अदम्य साहस, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।'
मध्य प्रदेश सरकार में पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने लिखा, 'साहस, देशभक्ति और नारी शक्ति की अमर प्रतीक, महान वीरांगना रानी चेन्नम्मा जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रानी चेन्नम्मा ने 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' के विरुद्ध पहली बार सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया था।
रानी चेन्नम्मा का ऐतिहासिक महत्व
कर्नाटक की कित्तूर रियासत की महारानी चेन्नम्मा उन प्रथम भारतीय शासकों में से एक थीं जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विस्तारवादी षड्यंत्र का सशस्त्र प्रतिरोध किया। 1824 के विद्रोह में उन्होंने ब्रिटिश सेना को पीछे हटने पर विवश किया, जो उस काल में एक असाधारण उपलब्धि थी। गौरतलब है कि यह विद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से तीन दशक से भी पहले हुआ था, जो रानी चेन्नम्मा को भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की शुरुआती प्रेरणाओं में से एक बनाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब नारी सशक्तीकरण और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को पुनः राष्ट्रीय स्मृति में स्थापित करने की मुहिम जोर पकड़ रही है।
राष्ट्रीय प्रेरणा का स्रोत
रानी चेन्नम्मा की विरासत आज भी कर्नाटक और पूरे भारत में नारी शक्ति, देशभक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक के रूप में जीवित है। उनकी जयंती पर हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं, शिक्षाविदों और आम नागरिकों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। आने वाली पीढ़ियों के लिए उनका बलिदान और अदम्य साहस सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।