23 अक्टूबर 2026
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रानी चेन्नम्मा जयंती 2026: गडकरी, मनोहर लाल समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने कित्तूर वीरांगना को किया नमन

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रानी चेन्नम्मा जयंती 2026: गडकरी, मनोहर लाल समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने कित्तूर वीरांगना को किया नमन

सारांश

कित्तूर की वीरांगना रानी चेन्नम्मा की जयंती पर 23 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनोहर लाल, प्रतापराव जाधव और यूपी उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने वाली इस वीरांगना को 1857 से तीन दशक पहले संघर्ष छेड़ने का गौरव प्राप्त है।

मुख्य बातें

23 अक्टूबर 2026 को कित्तूर वीरांगना रानी चेन्नम्मा की जयंती पर राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि दी गई।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल ने एक्स पर पोस्ट कर नमन किया।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मध्य प्रदेश के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भी श्रद्धाँजलि दी।
रानी चेन्नम्मा ने 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' के विरुद्ध कित्तूर में पहली सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया था।
यह विद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लगभग तीन दशक पहले हुआ था।

कित्तूर की वीरांगना रानी चेन्नम्मा की जयंती पर 23 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 1824 में सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व करने वाली इस वीरांगना को आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अग्रदूत माना जाता है।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मातृभूमि के गौरव एवं सम्मान की रक्षा हेतु अंग्रेजों से लड़ने वाली महान वीरांगना कित्तूर की रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें सादर नमन।'

केंद्रीय आवास व शहरी मामलों एवं विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने अपनी श्रद्धांजलि में लिखा, 'नारी शक्ति के अद्भुत शौर्य की प्रतीक, कित्तूर की महारानी, महान स्वतंत्रता सेनानी रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन! अपने शौर्य, पराक्रम और बुद्धिमत्ता से ब्रिटिश सेना को लोहे के चने चबाने पर मजबूर कर देने वाली वीरांगना की गौरव गाथा पर युगों-युगों तक एक कृतज्ञ देश को सर्वदा गर्व रहेगा।'

केंद्रीय आयुष एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी एक्स पर लिखा, 'महान वीरांगना कित्तूर की रानी चेन्नम्मा जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।'

राज्य नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली कित्तूर की वीरांगना रानी चेन्नम्मा की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन! उनका अदम्य साहस, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।'

मध्य प्रदेश सरकार में पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने लिखा, 'साहस, देशभक्ति और नारी शक्ति की अमर प्रतीक, महान वीरांगना रानी चेन्नम्मा जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रानी चेन्नम्मा ने 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' के विरुद्ध पहली बार सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया था।

रानी चेन्नम्मा का ऐतिहासिक महत्व

कर्नाटक की कित्तूर रियासत की महारानी चेन्नम्मा उन प्रथम भारतीय शासकों में से एक थीं जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विस्तारवादी षड्यंत्र का सशस्त्र प्रतिरोध किया। 1824 के विद्रोह में उन्होंने ब्रिटिश सेना को पीछे हटने पर विवश किया, जो उस काल में एक असाधारण उपलब्धि थी। गौरतलब है कि यह विद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से तीन दशक से भी पहले हुआ था, जो रानी चेन्नम्मा को भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की शुरुआती प्रेरणाओं में से एक बनाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब नारी सशक्तीकरण और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को पुनः राष्ट्रीय स्मृति में स्थापित करने की मुहिम जोर पकड़ रही है।

राष्ट्रीय प्रेरणा का स्रोत

रानी चेन्नम्मा की विरासत आज भी कर्नाटक और पूरे भारत में नारी शक्ति, देशभक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक के रूप में जीवित है। उनकी जयंती पर हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं, शिक्षाविदों और आम नागरिकों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। आने वाली पीढ़ियों के लिए उनका बलिदान और अदम्य साहस सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पाठ्यक्रम और सार्वजनिक स्मृति में उन्हें वह स्थान मिला है जिसकी वे हकदार हैं। 1824 का कित्तूर विद्रोह 1857 से पहले का है, फिर भी राष्ट्रीय विमर्श में इसे वह केंद्रीयता नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। नारी सशक्तीकरण की राजनीतिक भाषा तब और विश्वसनीय होगी जब ऐसी वीरांगनाओं की गाथाएँ केवल जयंती तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और सांस्कृतिक संस्थानों में स्थायी स्थान पाएँ।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रानी चेन्नम्मा कौन थीं?
रानी चेन्नम्मा कर्नाटक की कित्तूर रियासत की महारानी थीं, जिन्होंने 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 'हड़प नीति' के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया। वे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लगभग तीन दशक पहले अंग्रेजों से लड़ने वाली प्रमुख भारतीय शासकों में से एक थीं।
2026 में रानी चेन्नम्मा जयंती पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
23 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनोहर लाल, प्रतापराव जाधव, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मध्य प्रदेश के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सोशल मीडिया पर उन्हें नमन किया।
कित्तूर विद्रोह 1824 क्यों महत्वपूर्ण है?
कित्तूर विद्रोह 1824 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से तीन दशक पहले हुआ था। रानी चेन्नम्मा ने इस विद्रोह में ब्रिटिश सेना को पीछे हटने पर विवश किया, जो उस काल में एक असाधारण उपलब्धि थी।
रानी चेन्नम्मा को नारी शक्ति का प्रतीक क्यों माना जाता है?
रानी चेन्नम्मा उन प्रथम महिला शासकों में से थीं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद का सशस्त्र प्रतिरोध किया। उनके अदम्य साहस, रणनीतिक कुशलता और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च बलिदान ने उन्हें भारतीय इतिहास में नारी सशक्तीकरण का अमर प्रतीक बना दिया।
कित्तूर कहाँ स्थित है?
कित्तूर वर्तमान कर्नाटक राज्य में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। यह 19वीं सदी में एक स्वतंत्र रियासत थी जहाँ रानी चेन्नम्मा ने शासन किया और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया।
राष्ट्र प्रेस
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