22 अगस्त 2026
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एकनाथ रानडे पुण्यतिथि: विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी को नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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एकनाथ रानडे पुण्यतिथि: विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी को नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सारांश

विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी और RSS के वरिष्ठ प्रचारक एकनाथ रानडे की पुण्यतिथि पर 22 अगस्त को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मुंबई महापौर रितू तावड़े समेत अनेक नेताओं ने उन्हें नमन किया। रानडे ने 1963 से 1970 के बीच अनगिनत बाधाओं के बावजूद कन्याकुमारी में यह ऐतिहासिक स्मारक खड़ा किया था।

मुख्य बातें

22 अगस्त को एकनाथ रानडे की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी , बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मुंबई महापौर रितू तावड़े समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
रानडे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और विवेकानंद केंद्र के संस्थापक थे।
1962 में अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख बनने के बाद उन्हें 1963 में कन्याकुमारी स्मारक निर्माण का दायित्व सौंपा गया।
अनेक बाधाओं के बावजूद जन-भागीदारी से धन जुटाकर 1970 में राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकटगिरि से स्मारक का उद्घाटन कराया।
1972 में विवेकानंद केंद्र की गतिविधियाँ सेवा की दिशा में मोड़ी गईं — वनवासी अंचलों में युवाओं को प्रशिक्षित कर भेजा गया, जो कार्य आज भी जारी है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और कन्याकुमारी स्थित विश्वविख्यात विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी एकनाथ रानडे की पुण्यतिथि पर 22 अगस्त को देशभर के राजनेताओं और सामाजिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री तक — सभी ने उनके राष्ट्रसेवा के संकल्प और संगठन-कौशल को नमन किया।

केंद्रीय मंत्री और राज्य नेताओं की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'विश्व विख्यात विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी श्रद्धेय एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन।' बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्रद्धेय एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन। राष्ट्रसेवा एवं समाज जागरण के प्रति उनका जीवन समर्पण और अनुशासन की प्रेरणादायी मिसाल रहा। संगठन को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना के विस्तार में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।'

बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर लिखा, 'विश्वविख्यात विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं राष्ट्रसेवा को समर्पित महान कर्मयोगी श्री एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनका समर्पण, संगठन कौशल और सेवा भाव सदैव हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा।'

स्मारक निर्माण का ऐतिहासिक संघर्ष

भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने एक्स पर इस स्मारक के निर्माण की पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने लिखा कि 1962 में एकनाथ रानडे अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख बने। 1963 में स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी के अवसर पर कन्याकुमारी की उस शिला पर स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया, जहाँ स्वामी जी ने ध्यान किया था — और यह दायित्व रानडे को सौंपा गया।

शर्मा के अनुसार, उस समय दक्षिण भारत में कुछ वर्गों तथा राज्य एवं केंद्र सरकार ने इस निर्माण कार्य में अनेक बाधाएँ उत्पन्न कीं, परंतु रानडे ने धैर्यपूर्वक हर समस्या का समाधान निकाला। स्मारक के लिए आवश्यक धनराशि जुटाने हेतु उन्होंने एक अभिनव योजना तैयार की — विवेकानंद को युवाओं के आदर्श के रूप में स्थापित करते हुए देशभर के विद्यालयों, छात्रों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और उद्योगपतियों से सहयोग प्राप्त किया।

1970 में उद्घाटन, 1972 में विवेकानंद केंद्र की स्थापना

डॉ. शर्मा ने बताया कि इस सामूहिक प्रयास के फलस्वरूप बने स्मारक का उद्घाटन 1970 में तत्कालीन राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकटगिरि के हाथों हुआ। इसके बाद 1972 में रानडे ने विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों को सेवा की दिशा में मोड़ा — युवक और युवतियों को प्रशिक्षण देकर देश के वनवासी अंचलों में भेजा गया। केंद्र से अनेक पुस्तकों तथा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन भी हुआ, जो आज भी जारी है।

मुंबई महापौर की भावभीनी श्रद्धांजलि

मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'कन्याकुमारी में समुद्र की उत्ताल तरंगों के बीच भव्य विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निर्माण के मुख्य सूत्रधार एवं विवेकानंद केंद्र के संस्थापक श्रद्धेय एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। उनका त्यागमय जीवन और राष्ट्र-प्रथम का संकल्प हम सभी को निरंतर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।'

यह ऐसे समय में है जब विवेकानंद शीला स्मारक न केवल एक धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक बना हुआ है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और युवा प्रेरणा का केंद्र भी है — जिसकी नींव रानडे के अदम्य संकल्प और जन-भागीदारी से पड़ी थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह आज के कॉर्पोरेट CSR और सरकारी अनुदान-आधारित निर्माण से सर्वथा भिन्न था। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर स्मारक के उद्घाटन तक सिमट जाती है, परंतु 1972 में शुरू हुआ विवेकानंद केंद्र का वनवासी सेवा कार्य — जो आज भी जारी है — रानडे की असली विरासत है। यह प्रश्न भी उठता है कि क्या इस विरासत को स्मरण करने वाले नेता उसी जन-भागीदारी की भावना को नीति-निर्माण में भी आत्मसात करते हैं।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवेकानंद शीला स्मारक का निर्माण कब और कैसे हुआ?
1963 में स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी के अवसर पर कन्याकुमारी की उस शिला पर स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया जहाँ स्वामी जी ने ध्यान किया था। एकनाथ रानडे ने देशभर के विद्यालयों, छात्रों, राज्य सरकारों और उद्योगपतियों से जन-भागीदारी के माध्यम से धन जुटाया और अनेक बाधाओं के बावजूद 1970 में इसे पूर्ण किया।
विवेकानंद केंद्र की स्थापना कब हुई और इसका उद्देश्य क्या है?
1972 में एकनाथ रानडे ने विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों को सेवा की दिशा में मोड़ा। युवक-युवतियों को प्रशिक्षित कर देश के वनवासी अंचलों में सेवा कार्य के लिए भेजा गया; केंद्र से अनेक पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन भी होता है, जो आज भी जारी है।
22 अगस्त को किन नेताओं ने एकनाथ रानडे को श्रद्धांजलि दी?
22 अगस्त को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा, भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा और मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने एक्स पर पोस्ट कर रानडे को श्रद्धांजलि अर्पित की।
एकनाथ रानडे का RSS में क्या योगदान था?
एकनाथ रानडे 1962 में RSS के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख बने। उन्होंने संगठन को सशक्त बनाने, राष्ट्रीय चेतना के विस्तार और सेवा कार्यों के माध्यम से समाज जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विवेकानंद शीला स्मारक और विवेकानंद केंद्र की स्थापना उनकी सबसे दीर्घकालिक विरासत मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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