15 सितंबर 2026
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के. एस. सुदर्शन पुण्यतिथि: गडकरी, योगी, शिवराज सहित दर्जनभर नेताओं ने आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक को किया नमन

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के. एस. सुदर्शन पुण्यतिथि: गडकरी, योगी, शिवराज सहित दर्जनभर नेताओं ने आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक को किया नमन

सारांश

आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक के. एस. सुदर्शन की पुण्यतिथि पर 15 सितंबर को केंद्रीय मंत्रियों से लेकर छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने सोशल मीडिया पर एकस्वर से श्रद्धांजलि दी। स्वदेशी चिंतन और सामाजिक समरसता की उनकी विरासत आज भी संघ परिवार की प्रेरणा का केंद्र है।

मुख्य बातें

15 सितंबर 2026 को आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक के.
सुदर्शन की पुण्यतिथि मनाई गई।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और बिहार के मुख्यमंत्रियों ने भी नमन किया।
सुदर्शन जी ने 2000 से 2009 तक आरएसएस का नेतृत्व किया; स्वदेशी चिंतन उनकी वैचारिक पहचान रही।
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य सहित कई अन्य नेताओं ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पांचवें सरसंघचालक के. एस. सुदर्शन की पुण्यतिथि पर 15 सितंबर 2026 को देशभर के वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक — राजनीतिक जगत ने सोशल मीडिया पर एकस्वर से उनके योगदान को याद किया।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक परम पूजनीय के. एस. सुदर्शन जी के स्मृति दिवस पर उन्हें विनम्र अभिवादन।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लिखा, 'राष्ट्र एवं समाज के उत्थान के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन होम कर देने वाले आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक, परम पूज्य के.एस. सुदर्शन जी की पुण्यतिथि पर उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं।'

मुख्यमंत्रियों ने किया स्मरण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, 'राष्ट्र साधना, स्वदेशी चिंतन और सामाजिक समरसता को अपना जीवन-ध्येय बनाने वाले आरएसएस के पंचम सरसंघचालक श्रद्धेय के. एस. सुदर्शन जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। 'राष्ट्र प्रथम' के भाव से अनुप्राणित उनका तपस्वी जीवन और प्रखर राष्ट्रवादी वैचारिक विरासत सदैव राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।'

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'स्वदेशी चिंतन, ग्राम विकास, गौसंवर्धन, कृषि और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर उनका गहन मंथन राष्ट्र जीवन को सशक्त दिशा देने वाला रहा।' मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी दर्शन, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय चिंतन परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने में सुदर्शन जी का योगदान अतुलनीय रहा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें 'मां भारती के परम उपासक' बताते हुए कोटि-कोटि नमन किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सुदर्शन जी का 'सहज व्यक्तित्व, गहन चिंतन और राष्ट्रहित के प्रति अटूट समर्पण' सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें कोटि-कोटि नमन अर्पित किया।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा कि सुदर्शन जी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर अपना संपूर्ण जीवन संगठन और समाज की सेवा में समर्पित किया। दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि व्यक्त की। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लिखा कि राष्ट्रसेवा, समाजहित और मानव कल्याण के प्रति उनका समर्पित जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

के. एस. सुदर्शन: एक परिचय

कुप्पाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक थे, जिन्होंने 2000 से 2009 तक संगठन का नेतृत्व किया। स्वदेशी विचार, भारतीय संस्कृति का संरक्षण और ग्रामोत्थान उनकी वैचारिक पहचान के केंद्र में रहे। उनके कार्यकाल में संघ ने नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का व्यापक कार्य किया। गौरतलब है कि उनकी विरासत को आज भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ परिवार के नेता बड़ी श्रद्धा के साथ याद करते हैं।

आगे की राह

सुदर्शन जी की पुण्यतिथि पर इस वर्ष भी देशभर में संघ के कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों को याद करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। उनकी वैचारिक विरासत — विशेषकर स्वदेशी चिंतन और सामाजिक समरसता — आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस वर्ष की एकजुटता यह भी दर्शाती है कि संघ परिवार की वैचारिक विरासत भाजपा शासित राज्यों में कितनी केंद्रीय भूमिका निभाती है। उल्लेखनीय यह है कि सुदर्शन जी के स्वदेशी और ग्रामोत्थान के विचार आज की सरकारी नीतियों में कितना प्रतिबिंबित होते हैं, यह सवाल अक्सर अनुत्तरित रह जाता है। मुख्यधारा की कवरेज श्रद्धांजलि की सूची तक सिमट जाती है — सुदर्शन जी के वास्तविक वैचारिक योगदान और उसकी समसामयिक प्रासंगिकता पर विमर्श प्रायः गायब रहता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. एस. सुदर्शन कौन थे और आरएसएस में उनकी क्या भूमिका थी?
के. एस. सुदर्शन आरएसएस के पांचवें सरसंघचालक थे, जिन्होंने 2000 से 2009 तक संगठन का नेतृत्व किया। स्वदेशी चिंतन, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए वे विशेष रूप से जाने जाते हैं।
2026 में के. एस. सुदर्शन की पुण्यतिथि कब मनाई गई?
उनकी पुण्यतिथि 15 सितंबर 2026 को मनाई गई। इस अवसर पर देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
पुण्यतिथि पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
के. एस. सुदर्शन की वैचारिक विरासत क्या थी?
सुदर्शन जी स्वदेशी दर्शन, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता के प्रबल पक्षधर थे। उनके कार्यकाल में आरएसएस ने नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का व्यापक काम किया।
के. एस. सुदर्शन के बाद आरएसएस का नेतृत्व किसने संभाला?
2009 में सुदर्शन जी के कार्यकाल की समाप्ति के बाद मोहन भागवत आरएसएस के छठे सरसंघचालक बने, जो वर्तमान में भी इस पद पर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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