स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि 2025: गडकरी, CM योगी, धामी समेत दर्जनों नेताओं ने एक्स पर अर्पित की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर देशभर के प्रमुख नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके राष्ट्रवादी, आध्यात्मिक एवं युवा-प्रेरणा के संदेश को आज भी प्रासंगिक बताया। केंद्रीय मंत्री से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक, सभी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए स्वामीजी के आदर्शों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
गडकरी और CM योगी की श्रद्धांजलि
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, "अपने विचार और प्रभावी भाषण से स्वामी विवेकानंद जी ने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और परंपरा की छाप छोड़ी। भारत में राष्ट्रवाद की भावना को बल देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अपने विचारों और कर्तृत्व से वो युवाओं के प्रेरणास्रोत बने है। ऐसे महान राष्ट्रसेवक की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामीजी को 'राष्ट्रऋषि' की उपाधि देते हुए एक्स पर पोस्ट किया, "'गर्व से कहो, हम हिंदू हैं' का उद्घोष कर भारत की राष्ट्रवादी, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाले महान संत, 'राष्ट्रऋषि' स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उनका तपस्वी जीवन करोड़ों युवाओं को अपने राष्ट्र, संस्कृति और कर्तव्य के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है।"
दिल्ली और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के संदेश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वामीजी को 'भारतीय संस्कृति का वैश्विक संवाहक' बताते हुए कहा, "स्वामी विवेकानंद जी के विचार आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा का संदेश देते हैं। उनका प्रेरक व्यक्तित्व युवाओं में सेवा, अनुशासन और कर्तव्यबोध का भाव जगाता है।"
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, "उनके ओजस्वी विचार, राष्ट्र प्रथम का दृष्टिकोण और मानव सेवा का संदेश आज भी हमें कर्तव्य, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनके आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।"
उत्तराखंड, हरियाणा और UP के नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वामीजी को 'महान दार्शनिक और ओजस्वी वक्ता' कहते हुए उन्हें कोटिशः नमन किया। धामी ने कहा, "स्वामी विवेकानंद जी ने अपने ओजस्वी विचारों, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रवादी चिंतन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन एवं वेदांत की गौरवशाली परंपरा को विश्व पटल पर नई प्रतिष्ठा दिलाई।" उन्होंने नागरिकों से स्वामीजी के आदर्शों को आत्मसात कर 'विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु भारत' के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वामीजी को 'भारतीय संस्कृति, ज्ञान, अध्यात्म और राष्ट्र चेतना का अमर संवाहक' बताते हुए कहा कि उनका ओजस्वी व्यक्तित्व और प्रेरणादायी विचार सदैव राष्ट्रसेवा, आत्मबल और मानव कल्याण के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामीजी के प्रसिद्ध विचार — "बाह्य प्रकृति वास्तव में आंतरिक प्रकृति का ही विस्तृत रूप है" — का उल्लेख करते हुए उन्हें 'महान राष्ट्रचिंतक और आध्यात्मिक चेतना के अग्रदूत' बताया। मौर्य ने कहा कि स्वामीजी का जीवन युवाओं में आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति, सेवा और चरित्र निर्माण की प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।
स्वामी विवेकानंद की विरासत और आज की प्रासंगिकता
गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद का निधन 4 जुलाई 1902 को हुआ था — मात्र 39 वर्ष की आयु में। उनका 1893 में शिकागो धर्म संसद में दिया गया ऐतिहासिक भाषण भारतीय आध्यात्मिकता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का मील का पत्थर माना जाता है। हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर राजनीतिक दलों के पार जाकर नेता उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं, जो उनकी विचारधारा की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब युवा रोज़गार, शिक्षा और राष्ट्रीय पहचान जैसे प्रश्नों पर सक्रिय हैं — स्वामीजी का 'युवा-केंद्रित' दर्शन इस संदर्भ में और भी मुखर होकर उभरता है। नेताओं का एक्स पर एक साथ श्रद्धांजलि देना यह भी संकेत देता है कि डिजिटल माध्यम अब सार्वजनिक श्रद्धा और राजनीतिक संवाद का प्रमुख मंच बन चुका है।