कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो बोले — पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है पूरी सरकार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान हुई भगदड़ की दर्दनाक घटना पर सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने 18 अक्टूबर 2026 को गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों इस हादसे पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं, और पूरी सरकार पीड़ित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
सांसद महतो की प्रतिक्रिया
सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा, 'जो लोग हमें छोड़कर चले गए हैं, उन्हें हम वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन पूरी सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है।' उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वयं अस्पताल पहुँचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और इसके बाद घटनास्थल का भी जायजा लिया। मुख्यमंत्री रात के दो बजे तक स्थिति को संभालने में लगे रहे।
मुआवज़े की घोषणा
राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को ₹25-25 लाख की आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है। अस्पताल में भर्ती घायलों को ₹5-5 लाख की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से मृतकों के परिजनों को ₹2-2 लाख और घायलों को ₹50-50 हज़ार की अलग से आर्थिक मदद देने का ऐलान किया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह का दौरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कोलकाता पहुँचे और उन्होंने घटना से जुड़ी हर जानकारी का जायजा लिया। सांसद महतो ने बताया कि गृह मंत्री ने अपने बाकी कार्यक्रम रद्द कर अस्पताल में भर्ती पीड़ितों से मुलाकात करने का निर्णय लिया। यह इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार इस हादसे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है।
सरकारी उत्सव कार्यक्रम रद्द
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर राज्य में सभी सरकारी उत्सव कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है। सांसद महतो ने स्पष्ट किया कि अब केवल पूजा-पाठ होगा — उत्सव का माहौल नहीं रहेगा। गौरतलब है कि यह निर्णय शोक की इस घड़ी में सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना
सांसद महतो ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि करीब एक वर्ष पहले दार्जिलिंग में बाढ़ के कारण लगभग सौ लोगों की मौत हुई थी, और तब वह दांडिया कार्यक्रमों में व्यस्त थीं। आलोचकों का कहना है कि ममता बनर्जी अब सोशल मीडिया पर वर्तमान सरकार के काम पर सवाल उठा रही हैं, जबकि उनके अपने कार्यकाल में आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए थे। यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद दोनों पक्षों के बीच तुलनात्मक शासन का मुद्दा तीखा बना हुआ है।
आने वाले दिनों में प्रशासन से यह अपेक्षा है कि वह मुआवज़े के वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी रखे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में इस तरह की भीड़-प्रबंधन चूक न दोहराई जाए।