23 अक्टूबर 2026
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कोलकाता भगदड़: दूसरे आरोपी की पत्नी का खुलासा, 'पूजा समिति ने पंडाल गिरने की घोषणा करवाई'

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कोलकाता भगदड़: दूसरे आरोपी की पत्नी का खुलासा, 'पूजा समिति ने पंडाल गिरने की घोषणा करवाई'

सारांश

कोलकाता भगदड़ की जाँच में नया मोड़ — दूसरे आरोपी की पत्नी का दावा है कि पूजा समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने न केवल पंडाल गिरने की भ्रामक घोषणा करवाई, बल्कि बाद में 27 अक्टूबर तक फरार रहने की सलाह भी दी। 19 मौतों के इस मामले में अब तक 9 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

17 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी।
दूसरे आरोपी बाबू मजूमदार को 23 अक्टूबर को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया।
उनकी पत्नी कोयल मजूमदार का आरोप — पूजा समिति के वरिष्ठ अधिकारियों ने पंडाल गिरने की भ्रामक घोषणा करवाई।
कथित तौर पर बाबू को घटना के बाद 27 अक्टूबर तक अंडरग्राउंड रहने की सलाह दी गई।
मुख्य आरोपी संजीब राहा उर्फ सेंटू (समिति कोषाध्यक्ष) गुरुवार को गिरफ्तार हुए; अब तक कुल 9 गिरफ्तारियाँ ।

कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर 2026 को मची भगदड़ मामले में एक नया और गंभीर आरोप सामने आया है। मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी बाबू मजूमदार उर्फ कुशल उर्फ कालिया की पत्नी कोयल मजूमदार ने दावा किया है कि उनके पति को पूजा समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश पर ही पंडाल गिरने की भ्रामक घोषणा करनी पड़ी थी। इस भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

क्या है कोयल मजूमदार का आरोप

कोयल मजूमदार ने पति की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि पूजा समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनके पति को यह घोषणा करने का निर्देश दिया कि पंडाल गिर रहा है। उनके अनुसार, उनके पति ने यह सोचकर घोषणा की थी कि इससे श्रद्धालुओं को संभावित खतरे से बचाया जा सकेगा।

कोयल ने यह भी आरोप लगाया कि भगदड़ की स्थिति गंभीर होने के बाद पूजा समिति के कुछ अधिकारियों ने उनके पति को फरार होकर 27 अक्टूबर तक अंडरग्राउंड रहने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि उनके पति घटना वाली रात ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहते थे और वे लगातार पछतावे में थे।

आरोपी की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

कोयल के मुताबिक, उनके पति पेशे से ऐप आधारित कैब चालक हैं और करीब 18 वर्षों से चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति से जुड़े हैं। उनका घर अमर बोस लेन में पंडाल के नज़दीक ही है। कोयल ने यह भी बताया कि उनके पति को पहले कभी सार्वजनिक घोषणाएँ करने की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी, क्योंकि वे मौखिक संवाद में विशेष रूप से पारंगत नहीं थे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद बाबू मजूमदार कुछ समय के लिए अपने घर लौटे, लेकिन अपना मोबाइल फोन वहीं छोड़कर चले गए। कोलकाता पुलिस ने 23 अक्टूबर को सुबह उन्हें गिरफ्तार किया।

भगदड़ की रात का माहौल

घटना के समय बारिश के कारण पंडाल में पहले से ही अफरा-तफरी का माहौल था। बाहर प्रतीक्षारत श्रद्धालु अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पंडाल के भीतर मौजूद लोग बारिश के चलते बाहर निकलने से हिचकिचा रहे थे। इसी दौरान पंडाल गिरने की चेतावनी देते हुए तुरंत बाहर निकलने की घोषणा की गई।

इस घोषणा के बाद भीड़ में दहशत फैल गई और श्रद्धालु निकास द्वार की ओर भागने लगे। कुछ लोग प्रवेश द्वार से भी बाहर निकलने लगे, जिससे भीड़ बेकाबू हो गई और देखते ही देखते भगदड़ मच गई, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई।

अब तक की गिरफ्तारियाँ और जाँच की स्थिति

इस मामले में इससे पहले गुरुवार को कोलकाता पुलिस ने चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीब राहा उर्फ सेंटू को गिरफ्तार किया था, जो इस मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, अब तक इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

गौरतलब है कि जाँच एजेंसियाँ घटनाक्रम की कड़ियाँ जोड़ने के साथ-साथ पूजा समिति के आयोजकों की कथित भूमिका की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और जिम्मेदारी तय करने के सवाल एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं।

आगे की कार्रवाई

जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित भ्रामक घोषणा के निर्देश की श्रृंखला कहाँ से शुरू हुई और पूजा समिति के किन-किन पदाधिकारियों की इसमें भूमिका थी। कोयल मजूमदार के आरोपों को देखते हुए जाँच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर सही साबित होते हैं, तो यह मामला महज एक व्यक्ति की भूल से बढ़कर एक संगठित लापरवाही का मामला बन जाता है। असली सवाल यह है कि क्या 18 वर्षों से समिति से जुड़े एक कैब चालक को पहली बार घोषणा की जिम्मेदारी देना खुद में एक चूक थी, या यह जानबूझकर किया गया था? जाँच एजेंसियाँ पूजा समिति के पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं, लेकिन भगदड़ जैसी घटनाओं में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अक्सर धीमी रहती है। सार्वजनिक मेलों और धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की जवाबदेही का सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में क्या हुआ था?
17 अक्टूबर 2026 की रात उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मच गई, जिसमें 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। बारिश के कारण पंडाल में पहले से भीड़ का दबाव था और पंडाल गिरने की कथित भ्रामक घोषणा के बाद लोगों में दहशत फैल गई।
बाबू मजूमदार कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
बाबू मजूमदार उर्फ कुशल उर्फ कालिया पेशे से कैब चालक हैं और करीब 18 वर्षों से चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति से जुड़े हैं। उन पर 17 अक्टूबर की रात भ्रामक घोषणा करने का आरोप है, जिसके बाद भगदड़ मची। उन्हें 23 अक्टूबर को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया।
कोयल मजूमदार ने पूजा समिति पर क्या आरोप लगाए हैं?
कोयल मजूमदार ने आरोप लगाया है कि पूजा समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनके पति को पंडाल गिरने की घोषणा करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के बाद समिति के कुछ अधिकारियों ने बाबू को 27 अक्टूबर तक अंडरग्राउंड रहने की सलाह दी।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस के अनुसार इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीब राहा उर्फ सेंटू को गुरुवार को और बाबू मजूमदार को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।
जाँच एजेंसियाँ अब किस दिशा में आगे बढ़ रही हैं?
जाँच एजेंसियाँ अब पूजा समिति के आयोजकों की कथित भूमिका की गहन पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भ्रामक घोषणा का निर्देश किसने और क्यों दिया था। कोयल मजूमदार के आरोपों के बाद जाँच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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