राष्ट्रपति मुर्मु को 'मौन राष्ट्रपति' कहने पर कुमारस्वामी का विरोध, मधु बंगारप्पा से माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा की उस टिप्पणी की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 'मौन राष्ट्रपति' बताया था। कुमारस्वामी ने बंगारप्पा से तत्काल सार्वजनिक माफी की माँग की है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बंगारप्पा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में यह टिप्पणी की थी। यह बातचीत उस संदर्भ में हुई थी जब कांग्रेस नेतृत्व की राष्ट्रपति से मुलाकात की योजनाओं पर चर्चा हो रही थी — विशेष रूप से मतदाता सूची में हेराफेरी के आरोपों और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के मुद्दों पर। बंगारप्पा ने कहा था कि 'सभी जानते हैं यह एक मौन राष्ट्रपति हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के 'अत्यधिक प्रभाव या दबाव' में हैं।
कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कुमारस्वामी ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के प्रति यह टिप्पणी 'अत्यंत निंदनीय' है। उन्होंने आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति मुर्मु के प्रति इस तरह की भाषा को 'कांग्रेस पार्टी की संविधान-विरोधी और अहंकारी मानसिकता' का प्रतिबिंब बताया।
कुमारस्वामी ने तीखे शब्दों में कहा, 'कर्नाटक के ऐसे कांग्रेस नेताओं से और क्या उम्मीद की जा सकती है जो गांधी परिवार की गुलामी में लिप्त हैं?' उन्होंने मांग की कि बंगारप्पा राष्ट्रपति से तुरंत माफी माँगें, अन्यथा यह संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की खुली अवहेलना मानी जाएगी।
बंगारप्पा के अन्य आरोप
शुक्रवार को दिए बयान में बंगारप्पा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के माध्यम से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता मुख्य चुनाव आयुक्त को 'कठपुतली की तरह' इस्तेमाल कर रहे हैं। बंगारप्पा ने यह भी दावा किया कि 'पाकिस्तान और धर्म के नाम पर' भड़काने की भाजपा की राजनीतिक रणनीति अप्रभावी हो चुकी है और इसीलिए भाजपा ने कथित तौर पर चुनावी धोखाधड़ी का सहारा लिया है।
गौरतलब है कि इन आरोपों को भाजपा की ओर से अब तक कोई औपचारिक खंडन नहीं किया गया है। बंगारप्पा ने मीडिया से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर 'गंभीरता से सवाल उठाएँ।'
राजनीतिक महत्व
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच चुनावी तैयारियों को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति के संदर्भ में की गई किसी भी टिप्पणी का राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील प्रभाव पड़ता है — विशेषकर जब राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला हों, जो पहले ऐसे समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं जिसे राजनीतिक दलों की व्यापक चुनावी रणनीति में एक महत्वपूर्ण वर्ग माना जाता है।
आगे क्या होगा
अभी तक शिक्षा मंत्री बंगारप्पा की ओर से कोई सार्वजनिक माफी नहीं आई है। कांग्रेस नेतृत्व की भी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।