क्या आप सत्व, रजस या तमस का भोजन करते हैं? जानें सिद्ध चिकित्सा क्या कहती है
सारांश
Key Takeaways
- सत्व आहार स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए लाभकारी है।
- रजस आहार ऊर्जा बढ़ाता है, लेकिन सीमित मात्रा में लेना चाहिए।
- तमस आहार से बचें, क्योंकि यह सुस्ती लाता है।
- भोजन का चुनाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है।
- सात्विक आहार को प्राथमिकता दें।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक पुरानी कहावत है, "जैसा अन्न, वैसा मन और वैसी ही सेहत।" इसका मतलब है कि जो हम खाते हैं, उसका सीधा प्रभाव हमारे मन और शरीर पर पड़ता है। प्राचीन सिद्ध चिकित्सा प्रणाली में भी भोजन को इसी दृष्टिकोण से देखा जाता है। इस चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत भोजन को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जो हमारे तीन गुणों- सत्व (उत्तम और शुद्ध), रजस (सक्रिय और उत्तेजक) और तमस (निष्क्रिय और सुस्त) को प्रभावित करते हैं।
केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय के अनुसार, सही भोजन का चयन कर हम अपने मन को शांत, शरीर को स्वस्थ और जीवन को संतुलित रख सकते हैं। सिद्ध चिकित्सा में भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और मन के लिए एक दवा है।
सिद्ध चिकित्सा दक्षिण भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर ध्यान केंद्रित करती है। इसमें भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जो मनुष्य के गुणों- सत्व (उत्तम), रजस (सक्रिय) और तमस (निष्क्रिय) को प्रभावित करते हैं।
पहला प्रकार है सत्तुवम या सत्व, जिसे उत्तम गुणों को बढ़ावा देने वाला भोजन माना जाता है। यह सात्विक भोजन के समान होता है, जो शुद्ध, ताजा और प्राकृतिक होता है। इसमें ताजे फल, सब्जियां, अनाज, दूध और हल्के मसाले शामिल हैं। ऐसा भोजन मन को शांत रखता है, शरीर को पोषण देता है और एकाग्रता बढ़ाता है। सिद्ध चिकित्सा में इसे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। नियमित सेवन से व्यक्ति में सकारात्मकता, शुद्धता और संतुलन आता है।
दूसरा प्रकार है इराकतम या रजस, जो सक्रिय गुणों को बढ़ावा देने वाला भोजन है। यह राजसिक भोजन की श्रेणी में आता है, जिसमें मसालेदार, तीखा, नमकीन या उत्तेजक चीजें होती हैं। जैसे प्याज, लहसुन, मिर्च, चाय-कॉफी और तले हुए पदार्थ। यह भोजन ऊर्जा प्रदान करता है और सक्रियता बढ़ाता है, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से चिड़चिड़ापन, बेचैनी या आक्रामकता हो सकती है।
तीसरा प्रकार है तमकम या तमस, जो निष्क्रिय गुणों को बढ़ावा देने वाला भोजन है। यह तामसिक श्रेणी का होता है, जिसमें बासी, भारी, प्रोसेस्ड या मांसाहारी भोजन शामिल हैं। जैसे बचा हुआ खाना, शराब, ज्यादा तला हुआ या बासी भोजन। ऐसा भोजन सुस्ती, आलस्य और मानसिक भ्रम पैदा करता है। सिद्ध चिकित्सा में इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है और कम से कम सेवन करने की सिफारिश की जाती है।
विशेषज्ञसात्विक आहार को प्राथमिकता दें। भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मन की दवा माना जाता है। सत्व प्रधान आहार अपनाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है। आज के तनावपूर्ण जीवन में यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।