जनता दर्शन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सख्त चेतावनी, लापरवाही नहीं सहेंगे!
सारांश
Key Takeaways
- लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण की आवश्यकता।
- महिलाओं और बुजुर्गों के मामलों को प्राथमिकता।
- जन समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता।
- कठोर कार्रवाई का आश्वासन।
लखनऊ, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज जनता दर्शन कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया कि जन समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
राजधानी लखनऊ स्थित 7-कालिदास मार्ग पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान, उन्होंने कई मामलों में संबंधित अधिकारियों से तुरंत फोन पर बात कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, ताकि समस्याओं का निस्तारण तेजी से हो सके।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रत्येक पीड़ित को न्याय दिलाना शासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण किया जाए, जिससे आमजन को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े। जनता दर्शन के दौरान भूमि विवाद, अवैध कब्जा, उत्पीड़न, सड़क एवं विद्युत समस्याएं, दुर्घटनाएं, आवास आवंटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और पारिवारिक विवाद जैसे विभिन्न मुद्दों पर फरियादियों ने बात की।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत में जिम्मेदारी तय की जाए और मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि शासन की मंशा के अनुसार पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनी रहे।
जनसुनवाई के दौरान महिलाओं, दिव्यांगजनों और बुजुर्गों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए। विभिन्न जिलों से आए लोगों ने अतिक्रमण हटाने, भूमि पर कब्जा दिलाने और आरोपियों की गिरफ्तारी जैसे कई मुद्दे उठाए, जिन पर उपमुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी शिकायतों का निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रभावी निस्तारण किया जाए, ताकि शासन-प्रशासन के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।