लखनऊ: अमौसी एयरपोर्ट पर बम की झूठी कॉल करने वाला श्याम सुंदर गिरफ्तार, नशे में दी थी भ्रामक सूचना
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर 24 जुलाई 2026 की रात बम होने की झूठी सूचना देकर सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचाने वाले आरोपी श्याम सुंदर (35) को सरोजनीनगर थाना पुलिस ने 26 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने शराब के नशे में डायल-112 पर फोन कर यह भ्रामक सूचना दी थी, जिसके बाद बम निरोधक दस्ते सहित कई सुरक्षा एजेंसियाँ तत्काल सक्रिय हो गई थीं।
घटनाक्रम: कैसे मची थी अफरातफरी
24 जुलाई 2026 की रात करीब रात 11:45 बजे डायल-112 पर सूचना मिली कि अमौसी एयरपोर्ट परिसर में बम रखा गया है। सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता (BDDS) और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मौके पर पहुँचीं और एयरपोर्ट में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। हालाँकि, घंटों की जाँच के बाद कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई और सूचना को भ्रामक पाया गया।
पुलिस की कार्रवाई और मामला दर्ज
उपनिरीक्षक नीशू चौधरी की तहरीर पर सरोजनीनगर थाने में एनसीआर संख्या 79/2026 के तहत धारा 212(ए) बीएनएस में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की और 26 जुलाई 2026 को किसानपथ स्थित दरोगाखेड़ा क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के विरुद्ध धारा 170/126/135 बीएनएसएस के तहत भी कार्रवाई की गई है।
आरोपी की पहचान और पूछताछ में खुलासा
जाँच में आरोपी की पहचान श्याम सुंदर (35), पुत्र राज किशोर, निवासी ग्राम जयसिंहपुर, थाना बिधनू, जनपद कानपुर के रूप में हुई। पूछताछ में श्याम सुंदर ने स्वीकार किया कि वह शराब पीने का आदी है और घटना वाले दिन नशे की हालत में था, जिसके चलते उसने यह झूठी सूचना दे दी। आरोपी एक चमड़ा फैक्ट्री में मज़दूरी करता है और 11वीं तक शिक्षित है। पुलिस ने उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है।
गिरफ्तारी में शामिल पुलिस टीम
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में उपनिरीक्षक अवनीश कुमार वर्मा, उपनिरीक्षक नीशू चौधरी और उपनिरीक्षक मोहित सिंह शामिल रहे। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
आम जनता और सुरक्षा तंत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के हवाई अड्डों पर बम की झूठी सूचनाओं के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। गौरतलब है कि इस तरह की भ्रामक सूचनाएँ न केवल यात्रियों में दहशत फैलाती हैं, बल्कि वास्तविक आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को भी कमज़ोर करती हैं। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी कि आरोपी को किस हद तक जवाबदेह ठहराया जाता है।