लखनऊ: सैन्यकर्मी मंजूर अली पर 5 साल बंधक बनाकर दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन दबाव का आरोप, गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक महिला ने सैन्यकर्मी मंजूर अली पर मार्च 2021 से लगातार पाँच वर्षों तक बंधक बनाकर दुष्कर्म करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने 30 मई को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सोमवार को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया; अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की जाँच अभी जारी है।
मामले का घटनाक्रम
पीड़िता सैरपुर थाना क्षेत्र की निवासी हैं और उनका विवाह सीतापुर जिले में हुआ था। उनकी शिकायत के अनुसार, मार्च 2021 में वे मायके आई हुई थीं, तभी लखीमपुर खीरी जिले के महंगूखेड़ा निवासी मंजूर अली ने देर रात उन्हें कथित तौर पर नशीला पदार्थ सुंघाकर अगवा कर लिया। आरोप है कि इसके बाद उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर छिपाया जाता रहा, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।
बंधक रखने का तरीका और धमकियाँ
एफआईआर के अनुसार, जब मंजूर अली ड्यूटी पर जाता था, तब वह पीड़िता को अपने भाई कमाल और रिश्तेदार सलमान की निगरानी में छोड़ देता था। महिला का आरोप है कि दोनों उसे जान से मारने की धमकियाँ देकर बाहरी दुनिया से पूरी तरह काटकर रखते थे। विरोध करने पर डराया-धमकाया जाता था और धर्म परिवर्तन के लिए लगातार दबाव बनाया जाता था।
पीड़िता की रिहाई और शिकायत
महिला के अनुसार, कुछ दिन पहले एक पड़ोसी की मदद से उन्हें अपने पिता से फोन पर संपर्क करने का मौका मिला। सूचना मिलते ही उनके पिता बताए गए पते पर पहुँचे और उन्हें सैरपुर स्थित घर वापस ले आए। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क कर 30 मई को मंजूर अली, उसके भाई कमाल और रिश्तेदार सलमान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जाँच शुरू की गई और सोमवार को मुख्य आरोपी मंजूर अली को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्य नामजद आरोपियों — कमाल और सलमान — की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जाँच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और 'लव जिहाद' से जुड़े आरोपों पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है। गौरतलब है कि आरोपी सक्रिय सैन्यकर्मी बताया जा रहा है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। सभी आरोप अभी तक न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं और जाँच जारी है।