महाअष्टमी पर मां अलोपशंकरी शक्तिपीठ में उमड़े लाखों श्रद्धालु, भोर से देर रात तक दर्शन-पूजन
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी तिथि पर 18 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित मां अलोपशंकरी शक्तिपीठ में आस्था का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह चार बजे से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और मंगला आरती के साथ विधिवत दर्शन-पूजन का क्रम आरंभ हुआ। मां महागौरी की आराधना के इस पावन अवसर पर भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
महाअष्टमी का धार्मिक महत्व
नवरात्र की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से माता की उपासना करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही आस्था हज़ारों श्रद्धालुओं को प्रयागराज के इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ की ओर खींच लाई।
अलोपशंकरी शक्तिपीठ की अनूठी धार्मिक पहचान
मां अलोपशंकरी मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ देवी की किसी पारंपरिक मूर्ति की नहीं, बल्कि फूलों से सजे पालने की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर देवी सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरकर अलोप हो गया था — इसी कारण इस शक्तिपीठ का नाम अलोपशंकरी पड़ा। गौरतलब है कि यह स्थल देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और नवरात्र के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
भक्तों का उत्साह और कन्या पूजन
हाथों में पूजा की थाली, नारियल, चुनरी, फूल और प्रसाद लिए महिलाएँ, बुज़ुर्ग, बच्चे और युवा घंटों कतार में खड़े रहे, फिर भी माता के दर्शन को लेकर उनका उत्साह बना रहा। इस अवसर पर कन्या पूजन का भी विशेष आयोजन हुआ — श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराया और मां दुर्गा से घर-परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर में भीड़ और घनी होती गई।
सुरक्षा और प्रशासनिक इंतज़ाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस एवं प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए गए। दर्शनार्थियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए लोहे की बैरिकेडिंग लगाई गई और मंदिर के अंदर व बाहर महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई। सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए भीड़ की निगरानी की जा रही थी, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
भक्तिमय वातावरण और आगे की उम्मीद
मंदिर के बाहर पूजा सामग्री, नारियल, चुनरी और मिठाइयों की दुकानों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। मां अलोपशंकरी के जयकारों से गूंजता मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो गया। भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का यह क्रम देर रात तक जारी रहने की उम्मीद है, और नवमी तिथि पर भी भारी भीड़ की संभावना बनी हुई है।