प्रयागराज में अष्टमी पर अलोपी शंकरी देवी शक्तिपीठ मंदिर में श्रद्धालुओं की बेमिसाल भीड़
सारांश
Key Takeaways
- अष्टमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़
- मंदिर में पूजा की अनोखी पद्धति
- कन्या पूजन का विशेष महत्व
- माता रानी की प्रकटता की मान्यता
- धार्मिक आस्था का गहरा प्रभाव
प्रयागराज, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के अवसर पर प्रयागराज में स्थित प्रतिष्ठित अलोपी शंकरी देवी शक्तिपीठ मंदिर में आज सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुँच रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर के प्रांगण में भक्तों की भीड़ जुटने लगी, जो दिनभर और देर रात तक बनी रहेगी।
अष्टमी के इस पवित्र दिन पर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया है। यहाँ की एक अनोखी विशेषता यह है कि इस शक्तिपीठ में माता की पारंपरिक मूर्ति नहीं है, बल्कि एक रहस्यमय झूले की पूजा होती है। यही इस मंदिर की पहचान है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। भक्तजन इस झूले को माता का स्वरूप मानकर, श्रद्धा के साथ जल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
एक श्रद्धालु ने बताया कि आज अष्टमी का दिन है, और इस मंदिर का बहुत बड़ा महत्व है। मान्यता है कि यहाँ माता रानी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे अलोपी शंकरी के नाम से जाना जाता है। यह एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जहाँ दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज सुबह से ही सैकड़ों महिलाएँ और पुरुष पूजा के लिए पहुंच रहे हैं, और यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहेगा।
दूसरे श्रद्धालु ने कहा कि आज का दिन बहुत खास है। सभी लोग बड़ी श्रद्धा और शांति के साथ माता की पूजा कर रहे हैं। हम अपने परिवार एवं पूरे देश की खुशहाली एवं तरक्की के लिए प्रार्थना करने आए हैं। मंदिर में हर ओर 'जय माता दी' के जयकारे गूंज रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।
एक अन्य भक्त ने मंदिर की विशेषता बताते हुए कहा कि यह नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। यहाँ माता की मूर्ति नहीं बल्कि पालने की पूजा होती है, जो एक रहस्य और आस्था का प्रतीक है। इसी कारण यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु के मन में एक अलग ही भाव रहता है। उन्होंने बताया कि भक्तजन पूरी श्रद्धा से जल, प्रसाद और अन्य सामग्री अर्पित करते हैं।
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है और मंदिर परिसर में कई भक्तों ने कन्या पूजन कर आशीर्वाद लिया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता जरूर पूरी करती हैं। यही वजह है कि यहाँ इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।