मौलाना महमूद मदनी का जमीयत पदाधिकारियों को निर्देश: सेवा को प्राथमिकता दें, युवाओं को नेतृत्व की ज़िम्मेदारी सौंपें
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत उलमा-ए-हिंद की प्रांतीय और क्षेत्रीय इकाइयों के अध्यक्षों तथा महासचिवों की नौवीं केंद्रीय छमाही बैठक राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में आयोजित हुई। इस तीन दिवसीय मशविरे में देशभर के विभिन्न राज्यों से संगठन के पदाधिकारियों और नाजिम-ए-तंजीम ने भाग लिया। सम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने देश और समाज की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए युवा पीढ़ी को नेतृत्व की जिम्मेदारियाँ सौंपने का आह्वान किया।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक की शुरुआत उत्तर प्रदेश जमीयत के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी की तिलावत-ए-कुरआन से हुई। दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण के विद्यार्थियों ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मेजबान एवं जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद अमीन तथा मदरसे के शिक्षक मुफ्ती फजलुद्दीन कासमी ने स्वागत भाषण दिया।
नाजिम-ए-उमूमी मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली बैठक की कार्यवाही प्रस्तुत की। इसके बाद विभिन्न विभागों की रिपोर्टें और प्रस्तुतिकरण ओवैस सुल्तान खान, मुफ्ती महदी हसन ऐनी, डॉ. शब्बीर मुश्ताक मीर, मौलाना मुहम्मद अखलाक और मौलाना मुहम्मद उमर कासमी ने पेश किए। जमीयत उलमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने पैरा-लीगल प्रशिक्षण की जानकारी दी।
छह महीने की उपलब्धियाँ और आगामी लक्ष्य
प्रस्तुत रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2026 के दौरान विभिन्न प्रांतीय इकाइयों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। पिछले छह महीनों में 5,352 नए मक्तब स्थापित किए गए, जबकि आगामी छह महीनों में 5,332 और मक्तब स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। जमीयत के माध्यम से पहले से 63 हजार से अधिक मक्तब संचालित हो रहे हैं।
इसी अवधि में 5,860 नए स्थानों पर दर्स-ए-कुरआन और 8,848 नए स्थानों पर दर्स-ए-हदीस की शुरुआत हुई। नैतिक प्रशिक्षण और सामाजिक सुधार के लिए 7,351 सुधारात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए, तथा अगले चरण में 8,383 कार्यक्रम आयोजित करने का लक्ष्य है। राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए 356 कार्यक्रम हुए; अगले छह महीनों में 1,091 कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
युवाओं को संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए 9,400 युवाओं को जमीयत के विभाग-ए-रफीक से जोड़ा गया; अगले चरण में 9,753 युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य है। मस्जिदों को धार्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक सेवा के केंद्र बनाने के लिए 1,806 आदर्श मस्जिदें स्थापित की गईं, और इनकी संख्या 2,556 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। 484 गाँवों का सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए चयन हुआ; अगले छह महीनों में 748 और गाँव जोड़े जाएंगे।
कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के लिए 115 कार्यशालाएँ आयोजित हुईं, और अगले चरण में 386 कार्यशालाएँ प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त पाँच हजार से अधिक संगठनात्मक बैठकें भी आयोजित की गईं।
मौलाना मदनी का संबोधन
अपने मुख्य संबोधन में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि विभिन्न विभागों में प्रगति हुई है, लेकिन मिल्लत की आवश्यकताओं और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जिम्मेदारियाँ बहुत व्यापक हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि 'हमारे लिए मुल्क और मिल्लत की सेवा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।'
पूर्वजों के बलिदानों का उल्लेख करते हुए मदनी ने कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद असाधारण संकल्प के साथ काम किया और कठिनाइयों के सामने कभी हिम्मत नहीं हारी। गौरतलब है कि यह संदेश ऐसे समय में आया है जब संगठन अपनी गतिविधियों का व्यापक विस्तार कर रहा है।
युवा नेतृत्व पर मदनी ने स्पष्ट कहा कि युवाओं को काम करने के अवसर और जिम्मेदारियाँ दी जाएँ, ताकि वे भविष्य में वर्तमान जिम्मेदारों का प्रभावी विकल्प बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि मिल्लत के साझा उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समान विचार रखने वाले लोगों को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
अन्य वक्ताओं के विचार
जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने कहा कि जब कार्य व्यक्तिगत प्रसिद्धि और निजी स्वार्थ के बजाय निःस्वार्थ भाव से किए जाते हैं, तो उनका वास्तविक मूल्य बना रहता है। मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने बुनियादी दीनी शिक्षा के विस्तार, नए मक्तबों की स्थापना, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों की प्रभावी निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
मशविरे के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी, मौलाना कारी मुहम्मद अमीन, अध्यक्ष मजलिस-ए-कायमा मुफ्ती रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी, जमीयत उलमा कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी तथा जमीयत उलमा-असम के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल कादिर ने की।
प्रस्तावित नई पहलें
बैठक में आदर्श मस्जिदों के विकास, प्रत्येक इकाई में इस्लाह-ए-मुआशरा समिति के गठन तथा आदर्श जिलों में फैमिली काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण ने सम्मेलन की मेजबानी सफलतापूर्वक निभाई, और संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रबंधन ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आने वाले छह महीनों में निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए संगठन की सभी प्रांतीय इकाइयाँ सक्रिय रूप से कार्य करेंगी।