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बकरीद 2026: मौलाना मदनी की अपील — कुर्बानी ज़रूर करें, कानून और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं

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बकरीद 2026: मौलाना मदनी की अपील — कुर्बानी ज़रूर करें, कानून और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं

सारांश

बकरीद से पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने दोहरा संदेश दिया — कुर्बानी की इबादत से पीछे न हटें, लेकिन कानून, स्वच्छता और सांप्रदायिक सौहार्द से कोई समझौता न करें। सोशल मीडिया पर वीडियो साझा न करने की चेतावनी भी उल्लेखनीय है।

मुख्य बातें

मौलाना महमूद मदनी ने 23 मई 2026 को जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से बकरीद पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।
कुर्बानी को इस्लाम की अनिवार्य इबादत बताते हुए हर साहिबे हैसियत मुसलमान से इसे अदा करने की अपील की गई।
कानूनन प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से पूर्णतः परहेज और सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन का निर्देश।
जानवरों के अवशेष सड़कों या नालियों में न फेंकें — निर्धारित स्थानों पर ही निपटान करें।
कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करें ; उकसावे की स्थिति में पुलिस से शिकायत करें।
किसी भी विवाद में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की स्थानीय इकाइयों से संपर्क करने की सलाह।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) से ठीक पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने 23 मई 2026 को एक विस्तृत बयान जारी कर देशभर के मुसलमानों से आग्रह किया कि वे कुर्बानी की इबादत अदा करें, लेकिन सरकारी दिशा-निर्देशों, स्थानीय प्रशासन के नियमों और सफाई व्यवस्था का पूरी तरह पालन करें। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में पशु-कुर्बानी को लेकर विवाद गहराते जा रहे हैं।

मौलाना मदनी का मुख्य संदेश

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने स्पष्ट किया, 'कुर्बानी इस्लाम की एक महत्वपूर्ण इबादत है, जो हर साहिबे हैसियत मुसलमान पर वाजिब है। कुर्बानी के दिनों में इसका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए प्रत्येक साहिबे हैसियत मुसलमान अपने हिस्से की कुर्बानी अदा करने का हर संभव प्रयास करे।' उन्होंने यह भी कहा कि कानूनन प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से पूर्णतः परहेज किया जाए।

स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी पर जोर

मदनी ने साफ-सफाई को लेकर विशेष निर्देश दिए। उनके अनुसार, 'जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों या नालियों में हरगिज न फेंका जाए, बल्कि उन्हें प्लास्टिक बैग आदि में सुरक्षित रखकर निर्धारित स्थानों तक पहुँचाने की व्यवस्था की जाए।' उन्होंने नगरपालिका और सफाई कर्मचारियों के साथ पूरा सहयोग करने की भी अपील की, ताकि आसपास के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सोशल मीडिया और सांप्रदायिक सौहार्द पर चेतावनी

बयान में मौलाना मदनी ने कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने से पूरी तरह बचने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्थान पर सांप्रदायिक तत्वों की ओर से उकसावेबाजी, धमकी या उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो धैर्य और संयम से काम लिया जाए तथा मामले की तत्काल शिकायत संबंधित पुलिस थाना या प्रशासन के पास दर्ज कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लिया जाए।

पशु खरीद-फरोख्त और परिवहन में कानून का पालन

जमीयत प्रमुख ने जानवरों की खरीद-बिक्री और परिवहन के दौरान सभी कानूनी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करने पर विशेष बल दिया। यह निर्देश ऐसे समय महत्वपूर्ण है जब कई राज्यों में पशु परिवहन को लेकर नियम सख्त किए गए हैं।

विवाद में सहायता के लिए जमीयत से संपर्क करें

बयान में यह भी कहा गया कि यदि किसी स्थान पर कुर्बानी में किसी प्रकार की रुकावट या कठिनाई उत्पन्न हो, तो तत्काल जमीयत उलेमा-ए-हिंद अथवा उसकी स्थानीय इकाइयों से संपर्क किया जाए। यह अपील देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के बीच समुदाय को कानूनी और संस्थागत मार्ग अपनाने की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुरक्षात्मक रणनीति भी है — ऐसे समय में जब कुर्बानी को लेकर सांप्रदायिक तनाव और कानूनी पेचीदगियाँ दोनों बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो न डालने की अपील यह दर्शाती है कि समुदाय के भीतर यह समझ बन रही है कि ऑनलाइन सामग्री विवाद को भड़काने का माध्यम बन सकती है। हालाँकि, असली परीक्षा यह है कि जमीनी स्तर पर ये दिशा-निर्देश कितने प्रभावी रहते हैं — खासकर उन इलाकों में जहाँ प्रशासनिक तंत्र कमज़ोर है या सांप्रदायिक दबाव अधिक है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना महमूद मदनी ने बकरीद पर क्या अपील की है?
मौलाना महमूद मदनी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से अपील की है कि हर साहिबे हैसियत मुसलमान कुर्बानी अदा करे, लेकिन सरकारी दिशा-निर्देशों, स्वच्छता नियमों और स्थानीय प्रशासन के आदेशों का पूर्ण पालन करे। उन्होंने कानूनन प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से परहेज करने को भी कहा है।
कुर्बानी के बाद जानवरों के अवशेषों का निपटान कैसे करें?
मौलाना मदनी के अनुसार, जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों या नालियों में नहीं फेंकना चाहिए। इन्हें प्लास्टिक बैग में सुरक्षित रखकर नगरपालिका द्वारा निर्धारित स्थानों तक पहुँचाना चाहिए और सफाई कर्मचारियों के साथ सहयोग करना चाहिए।
क्या बकरीद पर कुर्बानी की वीडियो सोशल मीडिया पर डाल सकते हैं?
नहीं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने से पूरी तरह बचा जाए। यह निर्देश सांप्रदायिक तनाव को रोकने की दृष्टि से दिया गया है।
कुर्बानी के दौरान उकसावे या विवाद की स्थिति में क्या करें?
मौलाना मदनी ने कहा है कि सांप्रदायिक तत्वों की ओर से उकसावे या धमकी की स्थिति में धैर्य और संयम बरतें तथा तत्काल संबंधित पुलिस थाने या प्रशासन में शिकायत दर्ज कराएँ। किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें।
कुर्बानी में रुकावट आने पर किससे संपर्क करें?
यदि किसी स्थान पर कुर्बानी में किसी प्रकार की रुकावट या कठिनाई उत्पन्न हो, तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद अथवा उसकी स्थानीय इकाइयों से तत्काल संपर्क करने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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