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बकरीद 2026: खंडवा के काजी सैयद निसार अली की अपील — शांति, स्वच्छता और सद्भाव से मनाएं त्योहार

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बकरीद 2026: खंडवा के काजी सैयद निसार अली की अपील — शांति, स्वच्छता और सद्भाव से मनाएं त्योहार

सारांश

बकरीद से एक दिन पहले खंडवा के काजी सैयद निसार अली ने तीन अहम बातें कहीं — गाय की कुर्बानी का विरोध, सोशल मीडिया पर वीडियो न फैलाने की अपील, और स्वच्छता के साथ त्योहार मनाने का आग्रह। मिश्रित आबादी वाले शहर में यह बयान सांप्रदायिक सद्भाव की दिशा में एक सोचा-समझा कदम है।

मुख्य बातें

काजी सैयद निसार अली ने 27 मई 2026 को बकरीद पर शांति, स्वच्छता और सद्भाव से त्योहार मनाने की अपील की।
उन्होंने गाय की कुर्बानी का स्पष्ट विरोध किया और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का समर्थन किया।
सोशल मीडिया पर कुर्बानी की वीडियो या फोटो वायरल न करने की अपील की गई।
सड़क पर नमाज के मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया।
कुर्बानी को पशु-बलिदान के साथ-साथ आत्म-समर्पण और नफ्स की कुर्बानी का प्रतीक बताया।

खंडवा के प्रमुख धर्मगुरु काजी सैयद निसार अली ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) की पूर्व संध्या पर मुसलमानों से त्योहार को पूरी शांति, साफ-सफाई और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाने की अपील की है। 27 मई 2026 को दी गई इस अपील में उन्होंने कुर्बानी के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए गाय की कुर्बानी का स्पष्ट विरोध किया और सोशल मीडिया पर कुर्बानी की वीडियो या फोटो वायरल न करने की सलाह दी।

कुर्बानी का धार्मिक महत्व

काजी सैयद निसार अली ने कहा, "ईद-उल-अजहा 28 मई को पूरे भारत समेत दुनिया भर में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस्लाम में हर साहिब-ए-निसाब मुसलमान के लिए कुर्बानी जरूरी मानी गई है। यह अल्लाह के प्रति आस्था, श्रद्धा और आज्ञाकारिता का प्रतीक है।"

उन्होंने हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि अल्लाह ने हजरत इब्राहिम को अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी का हुक्म दिया था। जब वे अपने पुत्र को लेकर गए, तो अल्लाह उनकी नीयत और समर्पण से प्रसन्न हुए और पुत्र को बचा लिया। काजी साहब ने जोर देकर कहा कि कुर्बानी केवल पशु की नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और नफ्स की कुर्बानी का भी प्रतीक है।

गाय की कुर्बानी पर स्पष्ट विरोध

काजी सैयद निसार अली ने इस विषय पर बेबाकी से कहा, "हम हिंदुस्तान में रहते हैं। कुछ मजहबों में गाय पूजनीय मानी जाती है। मुसलमान भी आगे आकर मांग कर रहे हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। जो लोग बाजार में गाय बेच रहे हैं, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए — हम भी इस मांग का समर्थन करते हैं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में बकरीद से पहले सांप्रदायिक तनाव को लेकर संवेदनशीलता बढ़ी हुई है।

सड़क पर नमाज और संवैधानिक अधिकार

सड़कों पर नमाज को लेकर उठ रही आपत्तियों पर काजी ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि नमाज आमतौर पर मस्जिद और ईदगाह में अदा की जाती है, और जगह की कमी होने पर सड़क साफ करके नमाज पढ़ी जाती है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में मुसलमानों के चार त्योहार राजपत्रित अवकाश की श्रेणी में आते हैं और संविधान सभी नागरिकों को अपने त्योहार स्वतंत्रता से मनाने का अधिकार देता है।

स्वच्छता और सोशल मीडिया पर अपील

काजी साहब ने समुदाय से आग्रह किया कि सोशल मीडिया पर कुर्बानी की कोई वीडियो या फोटो वायरल न की जाए। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई और पूरी जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाया जाए ताकि किसी भी वर्ग को असुविधा न हो। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कुर्बानी से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बनते रहे हैं, और इस संदर्भ में यह अपील विशेष रूप से प्रासंगिक है।

सद्भाव की दिशा में कदम

खंडवा जैसे मिश्रित आबादी वाले शहर में एक वरिष्ठ धर्मगुरु का यह बयान सामाजिक सौहार्द की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काजी सैयद निसार अली की यह अपील न केवल धार्मिक दिशानिर्देश है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश है कि त्योहार आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी अवसर होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक संकेत भी है। सोशल मीडिया पर वीडियो न फैलाने की अपील इस बात की स्वीकृति है कि डिजिटल भड़काव अब त्योहारी तनाव का बड़ा कारण बन चुका है। हालांकि, सड़क पर नमाज के मुद्दे पर उनका 'दोनों पक्षों को सहिष्णु रहना चाहिए' वाला रुख उस असली प्रशासनिक जटिलता को नज़रअंदाज करता है जो कई शहरों में सालाना विवाद का रूप लेती है। इस तरह के बयान तब ज़्यादा असरदार होते हैं जब इनके पीछे स्थानीय प्रशासन और अंतर-धार्मिक मंचों का ठोस समन्वय हो।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काजी सैयद निसार अली ने बकरीद 2026 पर क्या अपील की?
काजी सैयद निसार अली ने मुसलमानों से ईद-उल-अजहा को शांति, सफाई और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने गाय की कुर्बानी का विरोध किया, सोशल मीडिया पर कुर्बानी की वीडियो वायरल न करने की सलाह दी और जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने का आग्रह किया।
काजी सैयद निसार अली ने गाय की कुर्बानी पर क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में गाय की कुर्बानी का विरोध किया और कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का वे समर्थन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में गाय बेचने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
सड़क पर नमाज के मुद्दे पर काजी का क्या रुख है?
काजी ने कहा कि नमाज आमतौर पर मस्जिद और ईदगाह में होती है, और जगह की कमी पर सड़क साफ करके नमाज पढ़ी जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे अन्य त्योहार सड़कों पर मनाए जाते हैं, वैसे ही इस पर भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
बकरीद पर सोशल मीडिया को लेकर क्या सलाह दी गई?
काजी सैयद निसार अली ने अपील की कि कुर्बानी की कोई भी वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर वायरल न की जाए। उनका मानना है कि इससे अनावश्यक विवाद और असुविधा पैदा होती है।
इस्लाम में कुर्बानी का क्या महत्व है?
काजी के अनुसार, कुर्बानी अल्लाह के प्रति आस्था, श्रद्धा और आज्ञाकारिता का प्रतीक है और हर साहिब-ए-निसाब मुसलमान पर यह जरूरी मानी गई है। यह केवल पशु-बलिदान नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और नफ्स की कुर्बानी का भी संदेश देती है।
राष्ट्र प्रेस
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