ईद-उल-अजहा पर सपा नेता की माँग: गाय को मिले राष्ट्रमाता का दर्जा, भाईचारे का दिया संदेश
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 28 मई 2026 को कहा कि बकरीद का त्योहार भाईचारे और एकता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय के नेता पहले ही गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग कर चुके हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का बयान
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के नेता पहले ही यह माँग उठा चुके हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा, 'हमें किसी के बयान में नहीं पड़ना है और उनके बयान का कोई मतलब नहीं है।' नमाज के बाद गले मिलने की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाईचारे को मज़बूत करने का आह्वान किया।
रविदास मेहरोत्रा की अपील
सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने ईद-उल-अजहा पर देशवासियों को बधाई देते हुए हिंदू-मुस्लिम एकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि 'हम लोग आपस में गले मिलकर एकता को इतना मज़बूत कर दें कि कोई भी सांप्रदायिक ताकत इसे तोड़ न पाए।' मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए ज़रूरत पड़ी तो कुर्बानी देने को भी तैयार हैं।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अनर्गल विवाद खड़े करती है। साथ ही उन्होंने शंकराचार्य के 'धर्मयुद्ध' के ऐलान का समर्थन करते हुए माँग की कि गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए।
ईदगाह में नमाज़ और दुआ
लखनऊ के著名 धर्मगुरु मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने बताया कि ईदगाह में बड़ी संख्या में मुसलमानों ने शांतिपूर्ण माहौल में नमाज़ अदा की। नमाज़ के बाद देश की तरक्की, भीषण गर्मी से राहत और जनगणना में सक्रिय भागीदारी के लिए दुआ माँगी गई।
मौलाना फिरंगी महली ने कुर्बानी को लेकर जारी एडवाइज़री का पालन करने की अपील की और कहा कि केवल उन्हीं जानवरों की कुर्बानी की जाए जिन पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने त्योहार को मिलजुलकर और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाने पर बल दिया।
सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब गाय को लेकर धार्मिक और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हुई है। गौरतलब है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की माँग को लेकर 'धर्मयुद्ध' का ऐलान किया था, जिस पर अब विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। सपा नेताओं का यह रुख दर्शाता है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से बचते हुए समावेशी संदेश देना चाहते हैं।