ईद उल अजहा 2026: मौलाना मुमताज अहमद कासमी और सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने दिया एकता और भाईचारे का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
बकरीद के पावन अवसर पर देश के प्रमुख धार्मिक नेताओं ने 28 मई 2026 को इंसानियत, त्याग और सांप्रदायिक सौहार्द का आह्वान किया। मौलाना मुमताज अहमद कासमी ने ईद उल अजहा के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को रेखांकित किया, जबकि अजमेर शरीफ के सज्जादानशीन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने भारत की बहुलतावादी संस्कृति की ताकत को याद दिलाया। दोनों नेताओं ने नागरिकों से अपील की कि त्योहार को आपसी प्रेम और जिम्मेदारी के साथ मनाएं।
तौहीद और कुर्बानी का सच्चा संदेश
मौलाना मुमताज अहमद कासमी ने कहा, 'इस्लाम में सबसे बड़ा संदेश तौहीद का है, यानी अल्लाह को एक मानना और उसी की इबादत करना। हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी यही शिक्षा दी कि अल्लाह एक है।' उन्होंने कुर्बानी की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल पशुबलि तक सीमित नहीं है — इसका वास्तविक अर्थ है इंसान के भीतर त्याग और समर्पण की भावना को जीवित करना।
मौलाना कासमी ने कहा, 'हमें देश, प्रदेश और पूरी इंसानियत के लिए कुर्बानी देने वाला बनना चाहिए।' उन्होंने समाज में व्याप्त नफरत और वैमनस्य को समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि ईद उल अजहा का सबसे बड़ा संदेश इंसानियत, एकता और प्रेम है।
अजमेर शरीफ से सद्भाव की पुकार
अजमेर शरीफ के सज्जादानशीन और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने देशवासियों को बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'भारत की असली ताकत इसी में है कि यहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहार मिलकर मनाते हैं।' उन्होंने पूरी दुनिया को ईद की मुबारकबाद दी और वैश्विक शांति तथा संघर्षों के खात्मे के लिए दुआ की।
चिश्ती ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे सभी जारी निर्देशों का पालन करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे दूसरे नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचे। कुर्बानी केवल उन्हीं जानवरों की दी जानी चाहिए जिनकी अनुमति है।'
स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने त्योहार के दौरान सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भाईचारे का त्योहार तभी सार्थक होता है जब समाज के हर वर्ग की संवेदनाओं का ध्यान रखा जाए। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक सौहार्द को लेकर जागरूकता अभियान तेज हो रहे हैं।
आगे का संदर्भ
गौरतलब है कि ईद उल अजहा इस्लामी कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, जो हजरत इब्राहीम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। दोनों धार्मिक नेताओं के संदेश भारत की उस साझा सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करते हैं, जिसमें विविधता में एकता को सर्वोच्च मूल्य माना जाता है। आने वाले दिनों में देशभर में ईद की नमाज और सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन की उम्मीद है।