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बकरीद पर शादाब शम्स का संदेश: कुर्बानी सिर्फ जानवरों की नहीं, इंसानियत और देशभक्ति की भी हो

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बकरीद पर शादाब शम्स का संदेश: कुर्बानी सिर्फ जानवरों की नहीं, इंसानियत और देशभक्ति की भी हो

सारांश

बकरीद पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कुर्बानी को नए अर्थ दिए — पशु-बलिदान से आगे, यह पर्व इंसानियत, त्याग और मां भारती के लिए बलिदान की भावना सिखाता है। चंडीगढ़ के मुफ्ती समीर खान ने भी शांतिपूर्ण आचरण और सामाजिक सौहार्द का आह्वान किया।

मुख्य बातें

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 28 मई को बकरीद पर इंसानियत, त्याग और देशभक्ति का संदेश दिया।
शम्स ने कहा कि कुर्बानी केवल जानवरों तक सीमित नहीं — मां भारती की रक्षा के लिए बलिदान का जज्बा भी इसी पर्व की शिक्षा है।
मुफ्ती समीर खान ( चंडीगढ़ ) ने हजरत इब्राहिम की कहानी का हवाला देते हुए ख्वाहिशों की कुर्बानी का आह्वान किया।
मुफ्ती खान ने कहा कि कुरान में शांतिपूर्ण कुर्बानी का स्पष्ट निर्देश है; सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान जरूरी।
दोनों धार्मिक नेताओं ने सादगी, स्वच्छता और सामाजिक सौहार्द के साथ पर्व मनाने की अपील की।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 28 मई को देहरादून से देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कुर्बानी के व्यापक अर्थ को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पर्व केवल पशु-बलिदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे इंसानियत, त्याग और देशभक्ति की भावना को भी पोषित होना चाहिए।

कुर्बानी का असली अर्थ

शादाब शम्स ने कहा, "तमाम लोगों से अपील की गई थी कि वे सादगी के साथ ईद मनाएं और गंदगी बिल्कुल न करें। ईद उल अजहा में 'अजहा' का मतलब कुर्बानी है। कुर्बानी हर वो चीज है, जो हम अपनों के लिए कर सकते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "अपनी प्यारी चीजों की कुर्बानी देनी चाहिए। अगर मेरे पास पैसा है और मेरे दोस्त को उसकी जरूरत है, तो उस वक्त हमें अपने पैसों की कुर्बानी देनी चाहिए।"

देशभक्ति और बलिदान का आह्वान

शम्स ने राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए कहा, "अगर मुल्क पर कोई हमला हो और मां भारती को मेरे और मेरे बच्चों के खून की जरूरत पड़े, तो खुद को और अपने बच्चों को मां भारती पर कुर्बान करने का जज्बा पैदा करना ही ईद उल अजहा सिखाता है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यह भावना हम अपने अंदर विकसित कर सकें, तो भारत मजबूती के साथ खड़ा रहेगा।

हजरत इब्राहिम की कहानी का संदेश

चंडीगढ़ में बकरीद मना रहे मुफ्ती समीर खान ने हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की कहानी का उल्लेख करते हुए कहा, "अल्लाह ने जब इब्राहिम को हुक्म दिया कि अपनी सबसे प्यारी चीज को मेरे लिए कुर्बान करो, तो हर बाप के लिए अपनी औलाद सबसे प्यारी होती है। इस त्योहार का संदेश है कि आज के दिन सिर्फ जानवरों की नहीं, बल्कि अपनी ख्वाहिशों और मनमर्जियों की भी कुर्बानी देनी है।"

सामाजिक सौहार्द और शांतिपूर्ण आचरण

मुफ्ती समीर खान ने यह भी कहा कि कुर्बानी ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ किसी को तकलीफ न हो। उन्होंने कहा, "कुरान में साफ निर्देश है कि कुर्बानी शांतिपूर्ण तरीके से की जाए। हिंदुस्तान में हर धर्म के लोग रहते हैं, इसलिए हमें हर किसी की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। कुर्बानी ऐसी जगह हो कि उसकी आवाज भी बाहर न आए।"

यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक सौहार्द और पर्व-आयोजन की जिम्मेदारी पर व्यापक चर्चा होती रही है। धार्मिक नेताओं का यह आह्वान त्योहार को केवल अनुष्ठान से आगे ले जाकर नागरिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि यह संदेश जमीनी स्तर पर कितना उतरता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे आह्वानों को महज औपचारिकता मानकर छोड़ देती है — जबकि वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाओं द्वारा स्वच्छता और सौहार्द पर जोर देना नीतिगत दिशा का भी संकेत है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शादाब शम्स ने बकरीद पर क्या संदेश दिया?
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बकरीद केवल पशु-बलिदान का पर्व नहीं है, बल्कि इससे इंसानियत, त्याग और देशभक्ति की भावना विकसित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मां भारती की रक्षा के लिए बलिदान का जज्बा ही इस त्योहार की सच्ची सीख है।
ईद-उल-अजहा में 'अजहा' का क्या अर्थ है?
शादाब शम्स के अनुसार 'अजहा' का अर्थ कुर्बानी है — और कुर्बानी का मतलब है वह सब कुछ जो हम अपनों के लिए कर सकते हैं, चाहे वह धन हो, समय हो या देश के लिए बलिदान। यह अर्थ पशु-बलिदान से कहीं व्यापक है।
मुफ्ती समीर खान ने बकरीद के बारे में क्या कहा?
चंडीगढ़ में बकरीद मना रहे मुफ्ती समीर खान ने हजरत इब्राहिम की कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिन जानवरों के साथ-साथ अपनी ख्वाहिशों और मनमर्जियों की भी कुर्बानी देनी चाहिए। उन्होंने कुरान के हवाले से शांतिपूर्ण और सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए कुर्बानी करने का आह्वान किया।
बकरीद पर सामाजिक सौहार्द के लिए क्या अपील की गई?
मुफ्ती समीर खान ने कहा कि भारत में हर धर्म के लोग रहते हैं, इसलिए कुर्बानी ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ किसी को तकलीफ न हो। शादाब शम्स ने भी सादगी के साथ पर्व मनाने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन कौन हैं?
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स हैं, जिन्होंने 28 मई को देहरादून से बकरीद के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कुर्बानी के व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय अर्थ पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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