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बकरीद 28 मई को: नखोदा मस्जिद के इमाम बोले — 'असली कुर्बानी अहंकार और स्वार्थ त्यागने में है'

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बकरीद 28 मई को: नखोदा मस्जिद के इमाम बोले — 'असली कुर्बानी अहंकार और स्वार्थ त्यागने में है'

सारांश

बकरीद से एक दिन पहले नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने कहा — मवेशियों की कुर्बानी महज प्रतीक है, असली कुर्बानी अहंकार और स्वार्थ त्यागने में है। पश्चिम बंगाल के नियमों पर उन्होंने कहा कि समुदाय कानून का सम्मान करता है और शांति के साथ त्योहार मनाएगा।

मुख्य बातें

देशभर में 28 मई 2025 (गुरुवार) को ईद-उल-अजहा (बकरीद) मनाई जाएगी।
नखोदा मस्जिद, कोलकाता के इमाम शफीक कासमी ने कहा — असली कुर्बानी अहंकार, स्वार्थ और बुराइयों को त्यागने में है।
इमाम कासमी ने पश्चिम बंगाल के नियमों पर कहा — पुराने कानूनों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है, समुदाय कानून का सम्मान करता है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा — सभी को अपने-अपने धर्म और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
प्रशासन ने देशभर में सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।

देशभर में 28 मई 2025 (गुरुवार) को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश के विभिन्न धार्मिक नेताओं और सामुदायिक प्रतिनिधियों ने भाईचारे, त्याग और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया है। प्रशासन ने भी सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।

इमाम शफीक कासमी का संदेश

कोलकाता स्थित नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने सभी धर्मों के लोगों को बकरीद की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'हम पूरे देश के हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय को बकरीद की बधाई देते हैं। बकरीद पर मवेशियों की कुर्बानी केवल एक प्रतीक है। असली कुर्बानी अपने अहंकार, स्वार्थ और बुराइयों को त्यागने में है। यदि हम अपने भाई की तरक्की के लिए खुद पीछे हट जाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और सच के लिए आवाज उठाएं, तो यही सच्ची कुर्बानी है।'

इमाम कासमी ने यह भी कहा कि यदि किसी की बात से दूसरे को ठेस पहुँचती हो, तो शांत रहना और संयम बनाए रखना भी एक प्रकार की कुर्बानी है। उनके अनुसार, समाज में दिखावे के बजाय त्याग और इंसानियत की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

पश्चिम बंगाल के नियमों पर प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल सरकार के ईद-उल-अजहा से जुड़े नियमों पर टिप्पणी करते हुए इमाम शफीक कासमी ने कहा कि वर्तमान में लागू किए गए नियम नए नहीं हैं, बल्कि पुराने कानूनों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय कानून का सम्मान करता है और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के साथ त्योहार मनाने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, 'अगर गोवंश की कुर्बानी की अनुमति नहीं है तो हम बकरे की कुर्बानी देकर बकरीद मनाएंगे। इसमें किसी प्रकार की चिंता की बात नहीं है। हमारा उद्देश्य शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाना है।'

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का रुख

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदस्य मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपने धर्म के बारे में किसी अन्य से सीखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मुसलमान होने के नाते वे किसी दूसरे धर्म में हस्तक्षेप नहीं करते और न ही किसी को यह बताते हैं कि उन्हें अपने त्योहार कैसे मनाने चाहिए। उनके अनुसार, सभी को अपने-अपने धर्म और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी

देशभर में ईद-उल-अजहा को लेकर तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक इंतजाम किए हैं। यह त्योहार ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी समझ को बढ़ावा देने की बात हर तरफ से उठ रही है।

गौरतलब है कि ईद-उल-अजहा इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाई जाती है और इसे त्याग के सर्वोच्च प्रतीक के रूप में देखा जाता है। धार्मिक नेताओं का यह संदेश बहु-धार्मिक भारतीय समाज में एकता की भावना को और मजबूत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पश्चिम बंगाल के कुर्बानी-नियमों पर इमाम कासमी की टिप्पणी एक महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक तनाव को उजागर करती है — कि धार्मिक परंपराएँ और राज्य के कानून कहाँ टकराते हैं। यह पहली बार नहीं है जब बकरीद के मौसम में राज्य-स्तरीय पशु-बलि नियम सुर्खियों में आए हों; हर साल यह बहस नए सिरे से उठती है। असली सवाल यह है कि क्या 'कानून का सम्मान' करने की बात पर्याप्त है, या समुदाय और प्रशासन के बीच संवाद का एक स्थायी ढाँचा बनाने की जरूरत है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में बकरीद 2025 कब है?
भारत में बकरीद (ईद-उल-अजहा) 28 मई 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है।
नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने बकरीद पर क्या कहा?
इमाम शफीक कासमी ने कहा कि मवेशियों की कुर्बानी केवल एक प्रतीक है — असली कुर्बानी अहंकार, स्वार्थ और बुराइयों को त्यागने में है। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को बकरीद की शुभकामनाएँ दीं और शांति व भाईचारे के साथ त्योहार मनाने का आह्वान किया।
पश्चिम बंगाल में बकरीद पर कुर्बानी के क्या नियम हैं?
इमाम शफीक कासमी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लागू नियम नए नहीं हैं, बल्कि पुराने कानूनों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गोवंश की कुर्बानी की अनुमति न होने पर समुदाय बकरे की कुर्बानी देकर त्योहार मनाएगा।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बकरीद पर क्या रुख अपनाया?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदस्य मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय किसी अन्य धर्म में हस्तक्षेप नहीं करता और सभी को अपने-अपने धर्म व परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
बकरीद पर प्रशासन ने क्या तैयारियाँ की हैं?
देशभर में ईद-उल-अजहा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए आवश्यक इंतजाम पूरे कर लिए हैं। स्थानीय स्तर पर शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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