ईद-उल-अजहा पर जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष हुसैनी का संदेश: न्याय और दृढ़ता का पर्व
सारांश
मुख्य बातें
जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने 27 मई को मीडिया को जारी एक बयान में ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि तौहीद, वफादारी और बलिदान की जीवंत मिसाल है। उन्होंने कहा, 'अल्लाह इस बकरीद को सुख और चैन का माध्यम बनाए, शांति और सुरक्षा का अग्रदूत बनाए, और एक ऐसे नए दौर की शुरुआत बनाए, जो न्याय, विनम्रता और कल्याण के प्रकाश से अलंकृत हो।'
ईद-उल-अजहा का आध्यात्मिक अर्थ
हुसैनी ने ईद-उल-अजहा को तौहीद का त्योहार बताया — एक ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, बहुदेववाद और हर प्रकार के मिथ्या मोह से मुक्ति का उत्सव। उनके अनुसार यह वफादारी का पर्व है: अल्लाह के साथ किए गए वादे के प्रति, कठिन परीक्षाओं में सत्य के प्रति, और बिना संकोच के बलिदान की भावना के प्रति।
उन्होंने सय्यदना इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के उदाहरण को केंद्र में रखते हुए कहा कि यह ईद हमारी आँखों के सामने उस तेजस्वी आदर्श को फिर से जीवंत कर देती है, जो सबसे कठिन परीक्षाओं में भी सत्य और दृढ़ विश्वास के साथ पर्वत की तरह अटल रहे। उन्होंने कुरआन-ए-पाक की एक आयत का हवाला देते हुए कहा कि यह उदाहरण हर युग में मानवता का मार्गदर्शन करता रहता है।
मुस्लिम समुदाय की चुनौतियाँ और इब्राहीमी आदर्श
हुसैनी ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कहा कि मुस्लिम समुदाय आज दुनिया भर में और भारत में भी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, 'सय्यदना इब्राहीम (अस) का आदर्श प्रदर्शित करता है कि ऐसी चुनौतियाँ ईमान वालों का इम्तिहान लेती हैं, और यह अल्लाह की सुन्नत है कि उन्होंने बड़ी कामयाबियों को पक्के संकल्प और दृढ़ता जैसे गुणों से जोड़ा है।'
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईद-उल-अजहा केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय में इब्राहीम (अस) जैसे चारित्रिक विकास के लिए एक ईश्वरीय मार्गदर्शन है।
समुदाय के लिए संदेश
जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने आह्वान किया कि इस ईद की सभी रस्में उसके मूल उद्देश्य को समझते हुए निभाई जाएँ। उन्होंने कहा, 'आइए! हम सब इस ईद को ईमान और दृढ़ता के गुणों को बढ़ाने का एक माध्यम बनाएँ। अगर ये गुण हमारे अंदर पैदा हो गए तो अल्लाह की मर्ज़ी से हमारे रास्ते रोशन होंगे और हमारा भविष्य भी उज्ज्वल होगा।'
दुआ और समापन
अपने बयान के अंत में सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने अल्लाह से दुआ की कि वह सबको इब्राहीम जैसा ईमान, इब्राहीम जैसी दृढ़ता और इब्राहीम जैसा समर्पण प्रदान करे, और मौजूदा जिम्मेदारियों को एकाग्रता के साथ पूरा करने की क्षमता दे। यह संदेश ऐसे समय आया है जब देश और दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय ईद-उल-अजहा 2026 की तैयारियों में जुटा है।