राजस्थान में ईद का त्योहार: अजमेर दरगाह पर अमन की दुआ और बीकानेर में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम

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राजस्थान में ईद का त्योहार: अजमेर दरगाह पर अमन की दुआ और बीकानेर में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम

सारांश

इस वर्ष ईद-उल-फितर का त्योहार अजमेर दरगाह में उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। बीकानेर में गंगा जमुनी तहजीब की अद्भुत मिसाल देखने को मिली, जिससे त्योहार की रंगत और भी बढ़ गई।

Key Takeaways

  • ईद-उल-फितर का त्योहार उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया।
  • अजमेर में दरगाह पर श्रद्धालुओं ने अमन की दुआ मांगी।
  • बीकानेर में गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली।

जयपुर, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में ईद-उल-फितर का यह शुभ पर्व उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अजमेर में स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में विशेष रौनक देखने को मिली। दरगाह परिसर में स्थित ऐतिहासिक शाहजहानी मस्जिद में ईद की नमाज अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।

सुबह से ही दरगाह में जायरीनों का तांता लगा रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने नमाज अदा कर खुदा से देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते रहे।

ईद के अवसर पर अजमेर दरगाह का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और उत्सवी रंग में नजर आया, जहां हर तरफ खुशियों और भाईचारे का संदेश गूंजता रहा। दरगाह क्षेत्र में सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रही।

अजमेर दरगाह के पीर सैयद नफीस मियां चिश्ती ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक महीने तक रोजा रखा। शनिवार को ईद-उल-फितर की नमाज अदा की गई। यहां तमाम लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और देश में अमन-चैन व शांति के लिए दुआ की।

चिश्ती फाउंडेशन के चैयरमेन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा, "हम दुआ करते हैं कि हमारे देश भारत में अमन कायम रहे और पूरी दुनिया में शांति रहे। ईद के इस खास मौके पर हम 140 करोड़ देशवासियों के लिए दुआ करते हैं।"

वहीं, राजस्थान के बीकानेर शहर में गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली। एक तरफ ईद की नमाज मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा अदा की गई। वहीं दूसरी तरफ हिंदू परिवारों की लड़कियां गणगौर का पूजन करती नजर आईं।

एक मकान पर कुछ लड़कियां गीत गाते हुए अपना त्योहार गणगौर मना रही थीं। वहीं, बिल्कुल पास में ईद के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपनी नमाज अदा की।

Point of View

NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

ईद-उल-फितर क्या है?
ईद-उल-फितर एक इस्लामी त्योहार है जो रमजान के महीने के अंत में मनाया जाता है। यह दिन रोजों के समाप्त होने का प्रतीक है।
अजमेर दरगाह क्यों प्रसिद्ध है?
अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह भारत में सूफी परंपरा का एक प्रमुख स्थल है, जहां लाखों श्रद्धालु आते हैं।
गंगा जमुनी तहजीब क्या है?
गंगा जमुनी तहजीब भारतीय संस्कृति में हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का मिलन दर्शाती है, जहां दोनों समुदाय एक साथ त्योहार मनाते हैं।
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