31 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जमीयत उलमा-ए-हिंद का वार्षिक अधिवेशन नूह में शुरू, मदरसों-मस्जिदों और यूसीसी पर प्रस्ताव पारित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जमीयत उलमा-ए-हिंद का वार्षिक अधिवेशन नूह में शुरू, मदरसों-मस्जिदों और यूसीसी पर प्रस्ताव पारित

सारांश

जमीयत उलमा-ए-हिंद का वार्षिक अधिवेशन नूह में दो हज़ार प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुआ। पहले ही सत्र में मदरसों, मस्जिदों और यूसीसी पर तीन बड़े प्रस्ताव पारित हुए। सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2024 के आदेश के पालन और 1991 के वर्शिप एक्ट की रक्षा की माँग इस अधिवेशन का केंद्रीय संदेश रही।

मुख्य बातें

जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-मुन्तजिमा का वार्षिक अधिवेशन 30 अक्टूबर 2026 को नूह, हरियाणा में अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के ध्वजारोहण से शुरू हुआ।
अधिवेशन में देशभर से करीब दो हज़ार सदस्य, उलमा और प्रमुख हस्तियाँ शामिल हैं।
मदरसों की सुरक्षा, मस्जिदों व धार्मिक स्थलों पर ध्वस्तीकरण रोक, और यूसीसी को अस्वीकार करने संबंधी तीन प्रमुख प्रस्ताव पारित।
प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 के पालन और सर्वोच्च न्यायालय के 12 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश को लागू करने की माँग।
सभी प्रांतीय-जिला इकाइयाँ एक तय तारीख पर ज्ञापन देंगी; मस्जिद दस्तावेज़ छह महीनों में दुरुस्त कराने का निर्देश।
अधिवेशन 31 अक्टूबर दोपहर तक जारी रहेगा; अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी का विस्तृत संबोधन प्रतीक्षित।

जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-मुन्तजिमा का वार्षिक अधिवेशन 30 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के जिला नूह (मेवात) स्थित डीएलएफ स्प्रिंगफील्ड, सहसौला पट्टी, पीपाका में संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के ध्वजारोहण के साथ औपचारिक रूप से शुरू हुआ। देशभर से करीब दो हज़ार सदस्य, प्रमुख हस्तियाँ और प्रतिष्ठित उलमा इस अधिवेशन में भाग ले रहे हैं। प्रारंभिक सत्र में ही इस्लामी मदरसों के संरक्षण, मस्जिदों व अन्य धार्मिक स्थलों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयों पर रोक तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।

अधिवेशन की शुरुआत और प्रारंभिक कार्यवाही

मौलाना मुहम्मद याह्या करीमी, महासचिव जमीयत उलमा हरियाणा, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश, ने स्वागत भाषण से कार्यवाही का आगाज़ किया। इसके बाद महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली कार्यवाही का वाचन किया और सचिवीय रिपोर्ट पेश की। प्रसिद्ध शायर कारी एहसान मोहसिन ने भी अपना कलाम प्रस्तुत किया, जबकि मौलाना मुफ्ती ज़ाकिर हुसैन कासमी ने प्रस्ताव-ए-ताजियत पेश किया।

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, 29 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित मदनी हॉल, केंद्रीय कार्यालय में मजलिस-ए-आमिला की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों के प्रारूपों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ था। उसी बैठक में स्वीकृत प्रस्ताव आज मजलिस-ए-मुन्तजिमा के सामने रखे और पारित किए गए।

मदरसों के संरक्षण पर प्रस्ताव

अधिवेशन में पारित पहले प्रमुख प्रस्ताव में मदरसों को मान्यता और जाँच के नाम पर परेशान किए जाने, उनके विरुद्ध निराधार प्रचार चलाए जाने तथा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को विवादों में घसीटने की कोशिशों पर गहरी चिंता जताई गई। भारत सरकार और संबंधित कानूनी संस्थाओं से माँग की गई कि ऐसी कार्रवाइयाँ तत्काल बंद हों और भारतीय संविधान के अंतर्गत मदरसों को प्राप्त अधिकारों एवं संरक्षण की गारंटी सुनिश्चित की जाए।

इस प्रस्ताव में मदरसा प्रबंधकों को भी निर्देश दिया गया कि वे भूमि संबंधी दस्तावेज़, स्वीकृत नक्शे, छात्रावास निवासियों का पहचान-विवरण तथा वित्तीय खातों का ऑडिट पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार और सुरक्षित रखें। यह प्रस्ताव मौलाना शम्सुद्दीन बजली ने पेश किया; इसका समर्थन मुफ्ती अब्दुल कवी, अध्यक्ष दीन तालीमी बोर्ड जमीयत उलमा तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश, ने किया।

मस्जिदों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर प्रस्ताव

दूसरे प्रमुख प्रस्ताव में देशभर में मस्जिदों, ईदगाहों, दरगाहों और अन्य इस्लामी धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि मस्जिदें केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के अंतर्गत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता की व्यावहारिक अभिव्यक्ति हैं।

प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन्स) एक्ट, 1991 के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा गया कि इस कानून का मूल उद्देश्य धार्मिक स्थलों की यथास्थिति बनाए रखना और ऐतिहासिक विवादों को फिर से खोलने से रोकना है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या फैसले में भी इस कानून को संविधान के मूल धर्मनिरपेक्ष ढाँचे का अहम हिस्सा बताया था।

अधीनस्थ अदालतों द्वारा धार्मिक स्थलों के सर्वेक्षण के आदेश जारी किए जाने पर चिंता जताते हुए संभल की ऐतिहासिक जामा मस्जिद का विशेष उल्लेख किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि एकतरफा सर्वेक्षण आदेश के बाद पैदा हुई स्थिति ने शांति और कानून-व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया। मजलिस-ए-मुन्तजिमा ने भारत सरकार और उच्च न्यायपालिका से माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय के 12 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और 1991 के एक्ट के विपरीत नए दावों को प्रारंभिक चरण में ही खारिज किया जाए। यह प्रस्ताव मौलाना प्रोफेसर नोमान शाहजहांपुरी, उपाध्यक्ष जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश, ने पेश किया।

यूसीसी पर प्रस्ताव और संगठनात्मक निर्देश

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित प्रस्ताव में इस कानून को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए इसे 'अपने स्वरूप में ही भेदभावपूर्ण' बताया गया। यह प्रस्ताव मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री, महासचिव जमीयत उलमा राजस्थान, ने पेश किया; इसका समर्थन मौलाना इस्लामुल हक असजद, मौलाना महमूद हसन खैरवा और मौलाना मुफ्ती अब्दुर्रज्जाक अमरोहवी ने किया।

संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि जमीयत की सभी प्रांतीय, जिला और तहसील इकाइयाँ केंद्रीय जमीयत द्वारा निर्धारित एक ही तारीख और समय पर अपने-अपने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगी। इसके अलावा सभी इकाइयों को निर्देश दिया गया कि मस्जिदों की भूमि, खसरा-खतौनी के अभिलेख, नगरपालिका करों और अन्य कानूनी दस्तावेज़ों की जाँच और दुरुस्तगी का काम आगामी छह महीनों में पूरा कराया जाए।

आगे क्या

अधिवेशन 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर तक जारी रहेगा। इस दौरान देश की वर्तमान स्थिति और मुसलमानों के समक्ष मौजूद सामाजिक, शैक्षिक, राष्ट्रीय तथा संगठनात्मक चुनौतियों पर कई अन्य प्रस्ताव पेश किए जाएँगे। अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी का विस्तृत संबोधन भी अधिवेशन का प्रमुख हिस्सा होगा, जो फिलहाल बाद के सत्र के लिए निर्धारित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तैयारी की राजनीति कर रहा है। यूसीसी-विरोध नया नहीं, लेकिन इसे राष्ट्रीय मंच पर दोहराना राजनीतिक संकेत भी देता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-मुन्तजिमा का अधिवेशन कहाँ और कब हुआ?
यह अधिवेशन 30 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के जिला नूह (मेवात) स्थित डीएलएफ स्प्रिंगफील्ड, सहसौला पट्टी, पीपाका में शुरू हुआ। अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के ध्वजारोहण के साथ अधिवेशन का उद्घाटन हुआ और यह 31 अक्टूबर दोपहर तक जारी रहेगा।
अधिवेशन में मदरसों के बारे में क्या प्रस्ताव पारित हुआ?
प्रस्ताव में मदरसों को मान्यता और जाँच के नाम पर परेशान किए जाने पर चिंता जताई गई और सरकार से माँग की गई कि संविधान के तहत उनके अधिकारों की गारंटी दी जाए। साथ ही मदरसा प्रबंधकों को भूमि दस्तावेज़, स्वीकृत नक्शे और वित्तीय ऑडिट पारदर्शिता से तैयार रखने के निर्देश दिए गए।
मस्जिदों की सुरक्षा को लेकर क्या माँगें रखी गईं?
अधिवेशन ने भारत सरकार और उच्च न्यायपालिका से माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय के 12 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश का पूरी तरह पालन हो और 1991 के प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट के विपरीत नए दावों को प्रारंभिक चरण में खारिज किया जाए। उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना मस्जिद ध्वस्तीकरण पर रोक और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की भी माँग की गई।
जमीयत ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर क्या रुख अपनाया?
अधिवेशन ने यूसीसी को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए इसे 'अपने स्वरूप में ही भेदभावपूर्ण' बताया। यह प्रस्ताव मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री, महासचिव जमीयत उलमा राजस्थान, ने पेश किया।
अधिवेशन के बाद जमीयत की इकाइयाँ क्या कार्रवाई करेंगी?
सभी प्रांतीय, जिला और तहसील इकाइयाँ केंद्रीय जमीयत द्वारा निर्धारित एक ही तारीख और समय पर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगी। इसके अलावा मस्जिदों के भूमि अभिलेख, खसरा-खतौनी और अन्य कानूनी दस्तावेज़ आगामी छह महीनों में दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले