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महालया अमावस्या 2026: गंगा घाटों पर पितृ तर्पण, सुवेंदु अधिकारी और हिमंता बिस्वा सरमा ने दी शुभकामनाएं

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महालया अमावस्या 2026: गंगा घाटों पर पितृ तर्पण, सुवेंदु अधिकारी और हिमंता बिस्वा सरमा ने दी शुभकामनाएं

सारांश

महालया अमावस्या पर कोलकाता के घाट पितृ तर्पण से गूंज उठे और दुर्गा पूजा की उल्टी गिनती शुरू हो गई। पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी, असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा और राज्यपाल आर. एन. रवि ने देवी पक्ष के आगमन पर शुभकामनाएं दीं।

मुख्य बातें

महालया अमावस्या 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे से 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे तक रही।
कोलकाता के बागबाजार गंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पितृ तर्पण किया।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने महालया की शुभकामनाएं दीं।
रवि ने दुर्गा पूजा को 'विकसित भारत 2047' की यात्रा से जोड़ा।
कुमोरटुली में प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है; ईडन गार्डन्स में ऐतिहासिक महालया कार्यक्रम की तैयारी पूरी।

महालया अमावस्या के पावन अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के गंगा घाटों पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए और अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण एवं श्राद्ध कर्म किया। यह पर्व 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहा। पितृ पक्ष के समापन और देवी पक्ष के आरंभ के इस संधि-काल ने पूरे बंगाल और असम में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना दिया।

महालया अमावस्या का धार्मिक महत्व

महालया अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि अज्ञात हो। यह पितृ पक्ष का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

भाजपा नेता अरविंद कुमार त्रिपाठी ने एक्स पर लिखा, 'सनातन धर्म में महालया का विशेष महत्व है। यह पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष के आरंभ का प्रतीक माना जाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महालया के दिन ही देवी दुर्गा को महिषासुर के वध के लिए आमंत्रित किया गया था।'

गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़

सुबह की पहली किरण के साथ ही कोलकाता के बागबाजार स्थित शारदा माँ के मंदिर के निकट गंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट गए। धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच लोगों ने जल अर्पित कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी। इसी के साथ कुमोरटुली की गलियों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है और ईडन गार्डन्स में एक ऐतिहासिक महालया कार्यक्रम की तैयारी भी जोरों पर है।

मुख्यमंत्रियों और राज्यपाल की शुभकामनाएं

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर लिखा, 'शुभ महालया, देवी पक्ष की इस शुभ शुरुआत पर, मैं सभी को अपना हार्दिक प्यार और शुभकामनाएं देता हूं। मां आ रही हैं; मां का आगमन हर जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि लाए।' उन्होंने पश्चिम बंगाल में विरासत, संस्कृति, एकता और भाईचारे को और मजबूत करने की प्रार्थना भी की।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'आज महालया के शुभ अवसर पर, चंडी पाठ की गूंज के साथ देवी पक्ष की शुरुआत हो रही है और इसी के साथ दुर्गा पूजा की उल्टी गिनती भी आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है।' उन्होंने बताया कि पूरे असम में कलाकार माँ और उनके बच्चों की मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि के कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल से भी शुभकामनाएं दी गईं। उन्होंने लिखा, 'मां दुर्गा, आदि शक्ति का सर्वोच्च रूप हैं; वे वह शाश्वत शक्ति हैं जो अधर्म का नाश करती हैं, धर्म की रक्षा करती हैं और सच्चाई की जीत सुनिश्चित करती हैं।' उनके संदेश में 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में बंगाल की अग्रणी भूमिका का भी उल्लेख था।

दुर्गा पूजा की उल्टी गिनती शुरू

बंगाल भाजपा ने एक्स पर पोस्ट किया कि कुमोरटुली की शांत गलियों में पुआल, मिट्टी और श्रद्धा मिलकर देवी-देवताओं को रूप दे रहे हैं। कारीगर माँ दुर्गा की मूर्तियों के लिए पवित्र 'चक्षु दान' की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि महालया के साथ ही शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा के उत्सव की आधिकारिक तैयारी शुरू हो जाती है, और शहर कोलकाता का रंग-रूप ही बदल जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल और असम दोनों राज्यों में सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों को राजनीतिक नेतृत्व की ओर से विशेष प्रोत्साहन मिल रहा है। महालया न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह पूर्वी भारत की सामूहिक पहचान का उत्सव भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली खबर यह है कि इन शुभकामनाओं में बंगाल की 'खोई हुई गरिमा' को फिर पाने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी साफ झलकती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महालया अमावस्या 2026 कब है और इसका क्या महत्व है?
महालया अमावस्या 9 अक्टूबर 2026 की रात 9:35 बजे से 10 अक्टूबर 2026 की रात 9:19 बजे तक रही। यह पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जिसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या भी कहते हैं — इस दिन उन पितरों का तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि अज्ञात हो।
महालया पर तर्पण कहाँ और कैसे किया जाता है?
महालया अमावस्या पर श्रद्धालु गंगा नदी के घाटों पर एकत्र होकर धार्मिक मंत्रों के साथ जल अर्पित करते हैं। कोलकाता में बागबाजार स्थित शारदा माँ के मंदिर के निकट गंगा घाट पर विशेष रूप से बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी ने महालया पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर लिखा कि मां का आगमन हर जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि लाए और पश्चिम बंगाल में विरासत, संस्कृति, एकता एवं भाईचारे के बंधन और भी मजबूत हों।
महालया के बाद दुर्गा पूजा की तैयारियाँ कहाँ तक पहुंची हैं?
महालया के साथ ही दुर्गा पूजा की उल्टी गिनती आधिकारिक रूप से शुरू हो जाती है। कोलकाता के कुमोरटुली में कारीगर माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं और ईडन गार्डन्स में एक ऐतिहासिक महालया कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।
असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने महालया पर क्या संदेश दिया?
CM हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर बताया कि चंडी पाठ की गूंज के साथ देवी पक्ष शुरू हो रहा है और पूरे असम में कलाकार माँ दुर्गा व उनके बच्चों की मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। उन्होंने 'जय-जय माँ दुर्गा' के साथ अपना संदेश समाप्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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