10 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पितृ अमावस्या 2026: गया के देवघाट और जींद के सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पितृ अमावस्या 2026: गया के देवघाट और जींद के सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

सारांश

पितृ पक्ष के अंतिम और सबसे पवित्र दिन — पितृ अमावस्या — पर गया के देवघाट और जींद के सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में हज़ारों श्रद्धालु उमड़े। मान्यता है कि आज किया गया पिंडदान और तर्पण पूर्वजों को सभी दिनों का फल दिलाता है।

मुख्य बातें

पितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर 2026 को गया के देवघाट और जींद के सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में हज़ारों श्रद्धालु एकत्रित हुए।
श्रद्धालु पंकज पाठक के अनुसार आज के दिन दान, तर्पण और पिंडदान — तीनों अनुष्ठान एक साथ करने से पितरों को 'सभी दिनों का फल' मिलता है।
राघव नंद जी महाराज ने बताया कि पांडवों ने यहाँ 12 वर्ष निवास किया था और भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर यहाँ पिंडदान किया था।
जींद के सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
पितृ अमावस्या को महालया अमावस्या भी कहते हैं — यह पितृ पक्ष के 16 दिनों का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

पितृ पक्ष के अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन — पितृ अमावस्या — पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को बिहार के गया स्थित देवघाट और हरियाणा के जींद स्थित सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचे। तर्पण, पिंडदान और दान जैसे अनुष्ठानों के लिए लोगों ने पवित्र नदियों में स्नान किया, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्म पितरों को सभी दिनों का फल दिला सकते हैं।

देवघाट पर गंगा स्नान और तर्पण

गया के देवघाट पर भारी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और पितृ तर्पण के लिए एकत्रित हुए। गंगा स्नान करने आए डॉ. नागेंद्र सिंह ने कहा, "मोक्ष और ज्ञान की धरती बोध गया में अपने पितरों के तर्पण के लिए परिवार के साथ आया हूं। तर्पण करने के बाद शांति और सुकून मिल रहा है। पितरों की मुक्ति के लिए हिंदू धर्म के लोग यहां आकर तर्पण करते हैं।"

एक अन्य श्रद्धालु पंकज पाठक ने इस दिन की विशेषता को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा, "आज पितृ अमावस्या का दिन है। इस दिन का महत्व इसलिए है, क्योंकि जो अन्य दिनों में पिंडदान या तर्पण नहीं कर पाए हैं। अगर वे आज के दिन पिंडदान और तर्पण करते हैं तो पितरों को सभी दिनों का फल मिल सकता है और उनको मुक्ति मिल सकती है।" पाठक ने बताया कि इसमें दान, तर्पण और पिंडदान — तीनों का विशेष महत्व है, और दान करने से 'दुर्गति का नाश' होता है।

जींद के सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में कड़े सुरक्षा प्रबंध

श्राद्ध अमावस्या के अवसर पर हरियाणा के जींद स्थित ऐतिहासिक तीर्थस्थल सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। श्रद्धालुओं की बड़ी तादाद को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

इस अवसर पर राघव नंद जी महाराज ने कहा, "आज श्राद्धों के अमावस्या का पर्व है। देश में अपने पूर्वजों के प्रति बहुत श्रद्धा होती है। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए आज का दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है।" उन्होंने इस तीर्थ के जल, पृथ्वी और आकाश के धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

सोमतीर्थ का पौराणिक महत्व

राघव नंद जी महाराज ने बताया कि इस तीर्थस्थल का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। उनके अनुसार, "भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को आदेश दिया था कि सोमतीर्थ पांडु पिंडारा में जाकर पिंडदान करने से अकाल मृत्यु मरने वालों को शांति मिलेगी।" उन्होंने यह भी बताया कि पांडवों ने यहाँ 12 वर्ष निवास किया था, जो इस स्थान को विशेष आस्था का केंद्र बनाता है।

पितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व

पितृ पक्ष हिंदू पंचांग में 16 दिनों का वह विशेष काल होता है जब पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किए जाते हैं। अंतिम दिन — महालया अमावस्या या पितृ अमावस्या — को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मान्यता के अनुसार इस दिन किया गया अनुष्ठान पूरे पक्ष के अनुष्ठानों के बराबर फल देता है। गया को पितृ तर्पण के लिए देश का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ माना जाता है।

इस वर्ष भी दोनों तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की असाधारण उपस्थिति ने भारत की गहरी पैतृक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा को रेखांकित किया। आने वाले दिनों में नवरात्रि के उत्सव के साथ धार्मिक कैलेंडर में गतिविधियाँ और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पारिवारिक और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। हालाँकि इन तीर्थों पर बढ़ती भीड़ के साथ भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और नदी संरक्षण जैसी व्यावहारिक चुनौतियाँ भी सामने आती हैं, जिन पर प्रशासन को दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। गया जैसे तीर्थों की वैश्विक पहचान और जींद जैसे कम चर्चित स्थलों का पुनरुत्थान यह भी दिखाता है कि धार्मिक पर्यटन भारत के आंतरिक जिलों की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ अमावस्या क्या है और इसका महत्व क्यों है?
पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन है, जिसे महालया अमावस्या भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को 16 दिनों के सभी अनुष्ठानों का फल मिलता है और उन्हें मुक्ति मिलती है।
गया का देवघाट पितृ तर्पण के लिए क्यों प्रसिद्ध है?
गया को हिंदू धर्म में मोक्ष और ज्ञान की धरती माना जाता है। देवघाट पर गंगा स्नान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व है; यहाँ देश विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए पिंडदान करने आते हैं।
जींद का सोमतीर्थ पांडु पिंडारा क्या है?
सोमतीर्थ पांडु पिंडारा हरियाणा के जींद में स्थित एक पौराणिक तीर्थस्थल है। मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर पांडवों ने यहाँ पिंडदान किया था और वे 12 वर्षों तक यहाँ निवास कर चुके हैं।
पितृ पक्ष में दान, तर्पण और पिंडदान — तीनों में क्या अंतर है?
श्रद्धालु पंकज पाठक के अनुसार, दान करने से 'दुर्गति का नाश' होता है, तर्पण जल अर्पित करने की विधि है जिससे पितरों को तृप्ति मिलती है, और पिंडदान पिंड (चावल तिल का पिंड) अर्पित करने की क्रिया है जो पितरों को मुक्ति दिलाती है। तीनों मिलकर श्राद्ध कर्म को पूर्ण बनाते हैं।
क्या जो लोग पितृ पक्ष के अन्य दिनों में तर्पण नहीं कर पाए, वे अमावस्या को कर सकते हैं?
हाँ, धार्मिक मान्यता के अनुसार जो लोग पितृ पक्ष के अन्य दिनों में पिंडदान या तर्पण नहीं कर पाए, वे पितृ अमावस्या पर यह अनुष्ठान कर सकते हैं। इस दिन किए गए कर्म से पितरों को सभी दिनों का फल मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले