10 अक्टूबर 2026
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सर्व पितृ अमावस्या 2026: चित्रकूट, प्रयागराज, अयोध्या और कोलकाता के घाटों पर उमड़े लाखों श्रद्धालु

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सर्व पितृ अमावस्या 2026: चित्रकूट, प्रयागराज, अयोध्या और कोलकाता के घाटों पर उमड़े लाखों श्रद्धालु

सारांश

सर्व पितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को देशभर के घाट आस्था से भर उठे — चित्रकूट में 500+ पुलिसकर्मी, प्रयागराज के संगम से कोलकाता के गंगा घाट तक लाखों श्रद्धालुओं ने पितरों को तर्पण दिया। पितृ पक्ष का यह समापन-दिन भारतीय सनातन परंपरा की जीवंत राष्ट्रव्यापी अभिव्यक्ति बनकर उभरा।

मुख्य बातें

सर्व पितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर 2026 को देशभर के धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं ने तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए।
चित्रकूट में मंदाकिनी तट पर लाखों श्रद्धालु जुटे; प्रशासन ने 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए।
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर पिंडदान और श्राद्ध; अयोध्या में सरयू घाट पर तर्पण।
कोलकाता में महालया पर बागबाजार गंगा घाट पर भक्तों ने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी।
बंगाल में महालया के साथ पितृ पक्ष का समापन और देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है।

पितृ पक्ष के अंतिम और सबसे पवित्र दिन सर्व पितृ अमावस्या पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, प्रयागराज और अयोध्या से लेकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक, पवित्र नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न किए। सुबह से ही घाटों और धार्मिक स्थलों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

चित्रकूट: मंदाकिनी तट पर लाखों का जनसैलाब

धर्मनगरी चित्रकूट में पितृ विसर्जनी अमावस्या के अवसर पर लाखों श्रद्धालु पहुँचे। भक्तों ने मंदाकिनी नदी के तट पर पवित्र स्नान कर अपने पितरों का तर्पण किया। इसके पश्चात भगवान कामतानाथ के दर्शन किए और कामदगिरि पर्वत की पंचकोसी परिक्रमा आरंभ की। रामघाट और परिक्रमा मार्ग पर भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी।

गौरतलब है कि चित्रकूट में प्रत्येक अमावस्या पर भारी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं, किंतु पितृ पक्ष की अमावस्या का महत्व विशेष माना जाता है। इस बार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा समेत देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुँचे। भीड़ के मद्देनज़र प्रशासन ने 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया।

प्रयागराज: त्रिवेणी संगम पर श्राद्ध-तर्पण

प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर भी सर्व पितृ अमावस्या के उपलक्ष्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। भक्तों ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई और पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान तथा श्राद्ध कर्म संपन्न किए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों के लिए किए गए अनुष्ठानों का विशेष फल मिलता है। पितृ पक्ष के समापन पर संगम तट श्रद्धा और आस्था के रंग में डूबा रहा।

अयोध्या: सरयू घाट पर आस्था की डुबकी

अयोध्या में भी इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुँचने की खबर है। तीर्थयात्रियों ने सरयू नदी में स्नान कर पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण की रस्में निभाईं। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पूजा-अर्चना का सिलसिला दिनभर जारी रहा।

कोलकाता: महालया पर गंगा घाट में तर्पण

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में महालया के अवसर पर बागबाजार स्थित शारदा माँ के मंदिर के समीप गंगा घाट पर भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। लोगों ने अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए तर्पण किया। बंगाल की परंपरा में महालया के साथ पितृ पक्ष का समापन और देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है, जिससे यह दिन धार्मिक दृष्टि से दोहरा महत्व रखता है।

परंपरा और आस्था का राष्ट्रव्यापी संगम

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक आयोजनों में जन-भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सर्व पितृ अमावस्या का यह सामूहिक अनुष्ठान भारतीय सनातन परंपरा की उस जीवंत निरंतरता का प्रतीक है जहाँ पीढ़ियाँ पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता को सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्त करती हैं। अगले वर्ष यह परंपरा और भी व्यापक रूप में देखने को मिलने की संभावना है, विशेषकर प्रयागराज में महाकुंभ के बाद बढ़ी तीर्थयात्रा की गति को देखते हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रयागराज और अयोध्या जैसे बड़े तीर्थों में सुरक्षा और सुविधाओं की पर्याप्तता पर सवाल बने रहते हैं। महाकुंभ के बाद तीर्थयात्रा की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए, इन स्थलों पर स्थायी क्षमता-विस्तार की ज़रूरत अब वैकल्पिक नहीं, अनिवार्य है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्व पितृ अमावस्या क्या है और इसका क्या महत्व है?
सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जिस पर सभी पूर्वजों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए अनुष्ठानों का फल विशेष होता है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या कब मनाई गई?
इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को मनाई गई। इस दिन चित्रकूट, प्रयागराज, अयोध्या और कोलकाता सहित देशभर के धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए।
चित्रकूट में सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए थे?
चित्रकूट में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया। रामघाट और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर विशेष निगरानी रखी गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
कोलकाता में महालया और पितृ अमावस्या का क्या संबंध है?
बंगाल की परंपरा में महालया के दिन पितृ पक्ष का समापन और देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन कोलकाता के बागबाजार गंगा घाट पर श्रद्धालु दिवंगत पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं, और यही दिन दुर्गा पूजा के आगमन का प्रतीक भी होता है।
किन-किन राज्यों से श्रद्धालु चित्रकूट पहुँचे?
चित्रकूट में इस बार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा समेत देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुँचे। पितृ पक्ष की अमावस्या पर यहाँ प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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