क्या पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में कोला बऊ स्नान के साथ दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई?

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क्या पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में कोला बऊ स्नान के साथ दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई?

सारांश

कोलकाता में दुर्गा पूजा की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोला बऊ स्नान की परंपरा ने भक्तों का ध्यान आकर्षित किया है। यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। जानिए इस पर्व की विशेषताएं और मान्यताएं।

मुख्य बातें

दुर्गा पूजा का त्योहार भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कोला बऊ स्नान एक अद्वितीय अनुष्ठान है।
यह उत्सव सामाजिक एकता का प्रतीक है।
भक्तों का उत्साह इस पर्व की विशेषता है।
दुर्गा पूजा में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

कोलकाता, 29 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा का विशेष आयोजन आरंभ हुआ, जिसमें कोला बऊ स्नान की परंपरा ने सभी का ध्यान खींचा।

दुर्गा पूजा का यह त्योहार लगभग दस दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें पांच मुख्य दिन, महाषष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और विजयदशमी, विशेष महत्व रखते हैं।

महासप्तमी को सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में कोला बऊ (केले का पौधा) को स्नान कराया जाता है। यह दुर्गा पूजा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें एक केले के पौधे को लाल धोती और सिंदूर पहनाकर दुल्हन की तरह सजाया जाता है और गंगा या किसी जलाशय में स्नान कराया जाता है।

इस अनुष्ठान के बाद, कोला बऊ नवपत्रिका (नौ पौधों) के हिस्से के रूप में दुर्गा पूजा पंडाल में गणेश के बगल में स्थापित की जाती है।

इस बीच सोमवार को गंगा नदी के तट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां से गंगा के पवित्र जल से भरे मिट्टी के कुल्हड़ मंदिरों में लाए गए। इसके बाद शहर के तमाम मंदिरों और पंडालों में मां दुर्गा की मूर्तियों की विशेष पूजा और आह्वान किया गया।

मंत्रोच्चार और ढाक की थाप के बीच भक्तों ने मां की आराधना की। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति भजनों का आयोजन भी होता है।

हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन माता की पूजा करने से साधक के जीवन से जुड़ी सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस अनुष्ठान को मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में मनाया जाता है।

यह उत्सव न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। दुर्गा पूजा का यह उत्सव भारत के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है, जो हमारी विविधता और एकता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोला बऊ स्नान का महत्व क्या है?
कोला बऊ स्नान मां दुर्गा की पूजा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें केले के पौधे को सजाकर स्नान कराया जाता है।
दुर्गा पूजा कब शुरू होती है?
दुर्गा पूजा का त्योहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि से शुरू होता है।
दुर्गा पूजा के कौन से मुख्य दिन होते हैं?
दुर्गा पूजा में महाषष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और विजयदशमी के दिन विशेष महत्व रखते हैं।
दुर्गा पूजा का उत्सव किस प्रकार मनाया जाता है?
यह उत्सव धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भक्ति भजनों के साथ मनाया जाता है।
कोला बऊ स्नान का आयोजन कहाँ होता है?
यह अनुष्ठान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और ओडिशा में मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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