महाष्टमी पर CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर में महानिशा पूजन किया, जगत कल्याण की माँगी दुआ
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्र की महाष्टमी तिथि पर रविवार, 18 अक्टूबर 2026 की रात गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में गोरक्षपीठ की सुदीर्घ परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत् महानिशा पूजन एवं हवन संपन्न किया। दो घंटे से अधिक चले इस पूजा अनुष्ठान में उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और समस्त चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।
अनुष्ठान का क्रम
गोरखपुर पहुँचते ही मुख्यमंत्री सीधे गोरखनाथ मंदिर गए और सबसे पहले शिवावतार बाबा गोरखनाथ के मुख्य मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। इसके उपरांत उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर शीश नवाकर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया।
देर शाम से रात तक गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में महानिशा पूजा का विस्तृत अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। गोरक्षपीठाधीश्वर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही शक्तिपीठ वैदिक मंत्रोच्चार और माँ भगवती के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
महानिशा पूजन में किए गए देव-अनुष्ठान
दो घंटे से अधिक चले इस अनुष्ठान में गोरक्षपीठाधीश्वर ने गौरी गणेश पूजन, वरुण पूजन, पीठ पूजन, यंत्र पूजन, माँ दुर्गा का विधिवत् पूजन, भगवान राम-माता सीता-लक्ष्मण जी का षोडशोपचार पूजन, भगवान कृष्ण एवं गोमाता का पूजन, नवग्रह पूजन, विल्व पूजन, अधिष्ठात्री देवता पूजन, शस्त्र पूजन, द्वादश ज्योतिर्लिंग, अर्धनारीश्वर एवं शिव-शक्ति पूजन, बटुक भैरव, काल भैरव तथा त्रिशूल पर्वत पूजन किया।
हवन और प्रार्थना
हवन की वेदी पर ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और अग्नि देवता का आह्वान कर पूजन किया गया। शक्तिपीठ में स्थापित वेदी पर उगे जौ के पौधों को काटकर आदिशक्ति माँ दुर्गा से समस्त नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की गई। सम्पूर्ण अनुष्ठान श्रीदुर्गासप्तशती के पाठ एवं वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न हुआ।
महानिशा पूजन से पहले मुख्यमंत्री ने जगतजननी माँ आदिशक्ति के अष्टम स्वरूप माँ महागौरी की विधिपूर्वक आराधना की। अंत में आरती एवं क्षमा याचना के पश्चात् प्रसाद वितरण हुआ और बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तगण अनुष्ठान के साक्षी बने।
गोरक्षपीठ की परंपरा और महत्त्व
गौरतलब है कि गोरक्षपीठ की परंपरा में शारदीय नवरात्र की महाष्टमी तिथि पर महानिशा पूजन विशेष महत्त्व रखता है। यह अनुष्ठान पीठाधीश्वर के नेतृत्व में प्रतिवर्ष संपन्न होता है। योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में इस परंपरा का निर्वाह करते आ रहे हैं — मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद भी यह धार्मिक दायित्व अनवरत जारी है। आने वाली महानवमी पर भी मंदिर में विशेष अनुष्ठान अपेक्षित हैं।