विजयादशमी पर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन
सारांश
मुख्य बातें
गोरखपुर के ऐतिहासिक गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी (दशहरा) 2026 के पावन अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का विशिष्ट पूजन-अनुष्ठान संपन्न किया। विशेष पारंपरिक परिधान धारण कर मंगलवार सुबह उन्होंने गोरक्षपीठ की परंपरा का विधि-विधान से पालन करते हुए चराचर जगत के कल्याण और प्रदेशवासियों के सुखमय, शांतिमय एवं समृद्धिमय जीवन की कामना की।
पूजन का विस्तृत क्रम
गोरक्षपीठ में विजयादशमी का यह विशिष्ट अनुष्ठान दो घंटे से अधिक समय तक चला। पूजन की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ से हुई, जहाँ शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से ही जगतजननी आदिशक्ति की आराधना के अनुष्ठान चल रहे थे। शक्तिपीठ में वेदी पूजन और लोकमंगल की प्रार्थना के पश्चात मुख्यमंत्री योगी, मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ व अन्य साधु-संतों के साथ, संस्कृत विद्यापीठ के आचार्यगण और वेदपाठी छात्रों के वैदिक मंत्रोच्चार तथा शंख, डमरू, घंट और तुरही की गूंज के बीच गुरु गोरखनाथ जी के मुख्य मंदिर के गर्भगृह में पहुँचे।
नाथपंथ की परंपरा से पूजन-अर्चन
गर्भगृह में नाथपंथ के विधान से महायोगी गोरखनाथ जी की विशिष्ट पूजा संपन्न हुई। विविध पूजन सामग्री के साथ शक्तिपीठ की वेदी पर उगाए गए जौ के जवारे चढ़ाए गए, आरती उतारी गई और हाथ से चँवर झुलाकर श्रद्धासेवा अर्पित की गई। गुरु गोरखनाथ जी की विधिवत आराधना के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर की अखंड ज्योति, समस्त देव विग्रहों, नाथपंथ के मनीषियों के विग्रहों, अखंड धूना, यज्ञशाला तथा भीम सरोवर का विशिष्ट पूजन किया। इसके बाद उन्होंने करबद्ध होकर महायोगी गोरखनाथ जी और समस्त देव विग्रहों की परिक्रमा भी की।
पूर्वज संतों की समाधि पर श्रद्धांजलि
पूजन क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सहित अन्य संतों की समाधि स्थल पर भी पहुँचे। उन्होंने गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज तथा योगिराज बाबा गंभीरनाथ जी महाराज आदि मनीषियों की प्रतिमाओं के समक्ष शीश नवाया और विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया।
गोपूजन और गोसेवा
विजयादशमी के पूजन क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में गोपूजन किया और गोमाता को श्रद्धाभाव से गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की। गोसेवा के दौरान वह गोवंश को दुलारते भी रहे। साथ ही उन्होंने भीम सरोवर में मछलियों को भी लाई खिलाई। इस पूरे अनुष्ठान के दौरान नाथपंथ के परंपरागत विशेष वाद्य यंत्र — नागफनी, शंख, ढोल, घंट, डमरू, तुरही और बैंड बाजे की गूंज से मंदिर परिसर भक्ति तरंगों से झंकृत रहा। आगामी वर्षों में भी यह गोरक्षपीठ की जीवंत परंपरा के रूप में जारी रहने की संभावना है।