20 अक्टूबर 2026
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विजयादशमी पर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन

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विजयादशमी पर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन

सारांश

दशहरा 2026 पर गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाथपंथ के पूर्ण विधान से महायोगी गोरखनाथ जी का दो घंटे से अधिक का विशिष्ट पूजन-अनुष्ठान किया — शक्तिपीठ से गर्भगृह, गोशाला से समाधि स्थल तक, यह गोरक्षपीठ की अखंड परंपरा का जीवंत दर्शन था।

मुख्य बातें

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी पर गोरखनाथ मंदिर में महायोगी गोरखनाथ जी का विशिष्ट पूजन किया।
पूजन अनुष्ठान दो घंटे से अधिक समय तक चला और शक्तिपीठ से प्रारंभ होकर गर्भगृह तक पहुँचा।
मुख्यमंत्री ने नाथपंथ के विधान से अखंड ज्योति, देव विग्रहों, अखंड धूना, यज्ञशाला और भीम सरोवर का भी पूजन किया।
उन्होंने गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी , दादागुरु महंत दिग्विजयनाथ जी और योगिराज बाबा गंभीरनाथ जी की समाधियों पर शीश नवाया।
गोशाला में गोपूजन कर गोमाता को गुड़ खिलाया और भीम सरोवर में मछलियों को लाई खिलाई।

गोरखपुर के ऐतिहासिक गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी (दशहरा) 2026 के पावन अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ जी का विशिष्ट पूजन-अनुष्ठान संपन्न किया। विशेष पारंपरिक परिधान धारण कर मंगलवार सुबह उन्होंने गोरक्षपीठ की परंपरा का विधि-विधान से पालन करते हुए चराचर जगत के कल्याण और प्रदेशवासियों के सुखमय, शांतिमय एवं समृद्धिमय जीवन की कामना की।

पूजन का विस्तृत क्रम

गोरक्षपीठ में विजयादशमी का यह विशिष्ट अनुष्ठान दो घंटे से अधिक समय तक चला। पूजन की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ से हुई, जहाँ शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से ही जगतजननी आदिशक्ति की आराधना के अनुष्ठान चल रहे थे। शक्तिपीठ में वेदी पूजन और लोकमंगल की प्रार्थना के पश्चात मुख्यमंत्री योगी, मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ व अन्य साधु-संतों के साथ, संस्कृत विद्यापीठ के आचार्यगण और वेदपाठी छात्रों के वैदिक मंत्रोच्चार तथा शंख, डमरू, घंट और तुरही की गूंज के बीच गुरु गोरखनाथ जी के मुख्य मंदिर के गर्भगृह में पहुँचे।

नाथपंथ की परंपरा से पूजन-अर्चन

गर्भगृह में नाथपंथ के विधान से महायोगी गोरखनाथ जी की विशिष्ट पूजा संपन्न हुई। विविध पूजन सामग्री के साथ शक्तिपीठ की वेदी पर उगाए गए जौ के जवारे चढ़ाए गए, आरती उतारी गई और हाथ से चँवर झुलाकर श्रद्धासेवा अर्पित की गई। गुरु गोरखनाथ जी की विधिवत आराधना के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर की अखंड ज्योति, समस्त देव विग्रहों, नाथपंथ के मनीषियों के विग्रहों, अखंड धूना, यज्ञशाला तथा भीम सरोवर का विशिष्ट पूजन किया। इसके बाद उन्होंने करबद्ध होकर महायोगी गोरखनाथ जी और समस्त देव विग्रहों की परिक्रमा भी की।

पूर्वज संतों की समाधि पर श्रद्धांजलि

पूजन क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सहित अन्य संतों की समाधि स्थल पर भी पहुँचे। उन्होंने गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज तथा योगिराज बाबा गंभीरनाथ जी महाराज आदि मनीषियों की प्रतिमाओं के समक्ष शीश नवाया और विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया।

गोपूजन और गोसेवा

विजयादशमी के पूजन क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में गोपूजन किया और गोमाता को श्रद्धाभाव से गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की। गोसेवा के दौरान वह गोवंश को दुलारते भी रहे। साथ ही उन्होंने भीम सरोवर में मछलियों को भी लाई खिलाई। इस पूरे अनुष्ठान के दौरान नाथपंथ के परंपरागत विशेष वाद्य यंत्र — नागफनी, शंख, ढोल, घंट, डमरू, तुरही और बैंड बाजे की गूंज से मंदिर परिसर भक्ति तरंगों से झंकृत रहा। आगामी वर्षों में भी यह गोरक्षपीठ की जीवंत परंपरा के रूप में जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गोरक्षपीठाधीश्वर की भूमिका और मुख्यमंत्री पद के बीच की वह अटूट कड़ी है जो उनकी राजनीतिक पहचान को परिभाषित करती है। यह समझना ज़रूरी है कि नाथपंथ की यह परंपरा उत्तर प्रदेश की सत्ता-राजनीति में सांस्कृतिक वैधता का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है। हालाँकि आलोचक यह प्रश्न उठाते हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों की इतनी व्यापक मीडिया कवरेज शासन की उपलब्धियों पर जन-विमर्श को कहीं प्रभावित तो नहीं करती।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजयादशमी पर गोरखनाथ मंदिर में क्या हुआ?
20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ जी का नाथपंथ के विधान से दो घंटे से अधिक समय तक विशिष्ट पूजन-अनुष्ठान संपन्न किया। पूजन की शुरुआत शक्तिपीठ से हुई और यह गर्भगृह, समाधि स्थल तथा गोशाला तक विस्तृत रही।
गोरक्षपीठाधीश्वर कौन हैं?
गोरक्षपीठाधीश्वर गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर के पीठाधीश्वर (प्रमुख) की उपाधि है। वर्तमान में यह पद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धारण करते हैं, जो नाथपंथ की गोरक्षपीठ की परंपरा के उत्तराधिकारी हैं।
विजयादशमी पर गोरखनाथ मंदिर में किस परंपरा का पालन किया जाता है?
गोरक्षपीठ में विजयादशमी पर नाथपंथ के विधान से महायोगी गोरखनाथ जी का विशिष्ट पूजन-अनुष्ठान किया जाता है। इसमें शक्तिपीठ में वेदी पूजन, गर्भगृह में जवारे चढ़ाना, आरती, चँवर सेवा, अखंड ज्योति पूजन तथा पूर्वज संतों की समाधि पर नमन शामिल होता है।
योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर किन संतों की समाधि पर श्रद्धा अर्पित की?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और योगिराज बाबा गंभीरनाथ जी महाराज की प्रतिमाओं के समक्ष शीश नवाया और विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया।
गोपूजन और गोसेवा का क्या महत्व था?
विजयादशमी के पूजन क्रम में मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में गोपूजन किया और गोमाता को गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की। यह नाथपंथ और हिंदू परंपरा में गोसेवा को धार्मिक कर्तव्य के रूप में मान्यता देने का प्रतीकात्मक कार्य माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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