महाराजा हरि सिंह पुण्यतिथि: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और भाजपा नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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महाराजा हरि सिंह पुण्यतिथि: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और भाजपा नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और दिनेश शर्मा ने श्रद्धांजलि अर्पित की। 1947 में भारत के साथ विलय का ऐतिहासिक निर्णय लेने वाले जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक का 26 अप्रैल 1961 को निधन हुआ था।

Key Takeaways

  • 26 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि मनाई गई।
  • उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने महाराजा को 'भारत माता का प्रिय सपूत' और 'महान राजनेता' बताते हुए श्रद्धांजलि दी।
  • बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने भी एक्स पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
  • महाराजा हरि सिंह ने 1947 में पाकिस्तानी आक्रमण के विरुद्ध भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
  • 1923 में अपने चाचा महाराज प्रताप सिंह के निधन के बाद वे जम्मू-कश्मीर के शासक बने और 1952 तक इस पद पर रहे।
  • उनका निधन 26 अप्रैल 1961 को मुंबई में हुआ था; उनके पुत्र डॉ. कर्ण सिंह उनकी विरासत के वाहक हैं।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि (26 अप्रैल) पर देशभर के नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से महाराजा की स्मृति को नमन किया और उनकी विरासत को अमर बताया।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का श्रद्धांजलि संदेश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, "महान राजनेता और भारत माता के प्रिय सपूत, महाराजा हरि सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन।" उन्होंने आगे कहा कि महाराजा की चिरस्थायी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी और सामाजिक न्याय, समावेशी शासन, एकता व सद्भाव के उन मूल्यों की याद दिलाती रहेगी जिनके वे जीवनभर पक्षधर रहे।

अन्य नेताओं ने भी किया नमन

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर लिखा कि जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक, जननायक, प्रजा के हितेषी और स्वतंत्र भारत के प्रबल समर्थक महाराजा हरि सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने भी एक्स पर महाराजा हरि सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें जम्मू-कश्मीर का जननायक, प्रजा का हितैषी और स्वतंत्र भारत का प्रबल समर्थक बताया।

महाराजा हरि सिंह: जीवन परिचय और ऐतिहासिक योगदान

महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के अंतिम डोगरा शासक थे। वे महाराज रणबीर सिंह के वंशज और राजा अमर सिंह के सबसे छोटे पुत्र थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर की राजगद्दी अपने चाचा महाराज प्रताप सिंह से 1923 में उनके निधन के बाद विरासत में मिली।

महाराजा हरि सिंह ने अपने जीवनकाल में चार विवाह किए। उनकी चौथी पत्नी महारानी तारा देवी से उन्हें एक पुत्र हुआ जिनका नाम कर्ण सिंह है, जो बाद में जम्मू-कश्मीर के सदर-ए-रियासत और केंद्रीय मंत्री रहे।

भारत में विलय का ऐतिहासिक निर्णय

1947 में भारत की स्वतंत्रता के पश्चात महाराजा हरि सिंह प्रारंभ में जम्मू-कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में बनाए रखना चाहते थे। परंतु जब पाकिस्तानी सेना और कबायली सशस्त्र आक्रमणकारियों ने रियासत पर हमला किया, तब उन्होंने भारतीय सेना की सहायता प्राप्त करने के लिए भारत के साथ विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय भारतीय इतिहास के सबसे निर्णायक क्षणों में से एक माना जाता है।

1952 तक वे राज्य के नाममात्र के महाराजा बने रहे, जब भारत सरकार ने राजशाही व्यवस्था को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने मुंबई में अपना शेष जीवन व्यतीत किया और 26 अप्रैल 1961 को उनका निधन हो गया।

विरासत और आज की प्रासंगिकता

महाराजा हरि सिंह के भारत में विलय के निर्णय को लेकर इतिहासकारों में मतभेद रहे हैं, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि उनके उस फैसले ने जम्मू-कश्मीर को भारतीय गणराज्य का अभिन्न अंग बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाई। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटने (2019) के बाद से जम्मू-कश्मीर में महाराजा हरि सिंह की विरासत को नए सिरे से रेखांकित किया जा रहा है और उनकी पुण्यतिथि को अब अधिक राजकीय महत्व दिया जाने लगा है।

आने वाले वर्षों में महाराजा हरि सिंह की स्मृति और उनके योगदान को लेकर जम्मू-कश्मीर में और अधिक सांस्कृतिक व ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है।

Point of View

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक संदेश है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर की डोगरा विरासत को पुनः स्थापित करने की कोशिश में लगी है, और महाराजा हरि सिंह इस कथा के केंद्र में हैं। यह विडंबना ही है कि जिस महाराजा को कभी कश्मीरी नेशनल कॉन्फ्रेंस और नेहरू सरकार ने हाशिए पर धकेला था, आज उन्हीं की विरासत को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। मुख्यधारा की मीडिया इस राजनीतिक पुनर्व्याख्या को नजरअंदाज कर रही है, जबकि यह जम्मू-कश्मीर की पहचान की लड़ाई का एक अहम अध्याय है।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

महाराजा हरि सिंह कौन थे और उनका जम्मू-कश्मीर से क्या संबंध था?
महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के अंतिम डोगरा शासक थे, जिन्होंने 1923 से 1952 तक शासन किया। उन्होंने 1947 में भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर करके जम्मू-कश्मीर को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाया।
महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि कब मनाई जाती है?
महाराजा हरि सिंह की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष 26 अप्रैल को मनाई जाती है। उनका निधन 26 अप्रैल 1961 को मुंबई में हुआ था।
महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय का निर्णय क्यों लिया?
1947 में पाकिस्तानी सेना और कबायली आक्रमणकारियों के हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारतीय सेना की सहायता प्राप्त करने के लिए भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय उन्होंने अपनी रियासत की सुरक्षा के लिए लिया था।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने महाराजा हरि सिंह को कैसे याद किया?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा कि महाराजा हरि सिंह एक महान राजनेता और भारत माता के प्रिय सपूत थे। उन्होंने महाराजा की विरासत को सामाजिक न्याय, एकता और सद्भाव का प्रतीक बताया।
महाराजा हरि सिंह के पुत्र कौन हैं?
महाराजा हरि सिंह के पुत्र का नाम डॉ. कर्ण सिंह है, जो उनकी चौथी पत्नी महारानी तारा देवी से हुए थे। कर्ण सिंह जम्मू-कश्मीर के सदर-ए-रियासत और बाद में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
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