24 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र एटीएस ने माहिम से जैश-ए-मोहम्मद संदिग्ध को दबोचा, टेलीग्राम पर फैला रहा था कट्टरपंथी सामग्री

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महाराष्ट्र एटीएस ने माहिम से जैश-ए-मोहम्मद संदिग्ध को दबोचा, टेलीग्राम पर फैला रहा था कट्टरपंथी सामग्री

सारांश

महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई के माहिम से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध को दबोचा है जो रैपिडो राइडर की आड़ में टेलीग्राम पर कट्टरपंथी सामग्री फैला रहा था। यह गिरफ्तारी 14 अक्टूबर की बड़ी छापेमारी के बाद की कड़ी है — और डिजिटल मंचों पर आतंकी प्रचार की बढ़ती चिंता को रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र एटीएस ने 24 अक्टूबर 2026 को माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से संदिग्ध मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर (33 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने और टेलीग्राम पर कट्टरपंथी सामग्री फैलाने का आरोप है।
आरोपी ने कथित तौर पर 1 जून को जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भड़काऊ ऑडियो ग्रुप पर अपलोड किए थे।
वह पाकिस्तान-समर्थित चैनल 'इब्न-ए-कासिम' का सक्रिय सदस्य भी बताया गया है।
14 अक्टूबर को एटीएस ने राज्य के पाँच स्थानों पर छापेमारी की थी; एक अंतरराष्ट्रीय वॉट्सऐप ग्रुप की भी जांच जारी है।

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई के माहिम इलाके से 33 वर्षीय एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, जिस पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखने का आरोप है। एटीएस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया के ज़रिए सांप्रदायिक नफरत और राष्ट्र-विरोधी भावनाएं फैलाने में लगा था।

गिरफ्तारी का विवरण

आरोपी की पहचान मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के रूप में हुई है। एटीएस की कालाचौकी यूनिट ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे माहिम मेट्रो स्टेशन के निकट से पकड़ा। जांच एजेंसी के अनुसार, वह रैपिडो राइडर और इत्र विक्रेता के रूप में काम करने की आड़ में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार कर रहा था।

सोशल मीडिया पर आतंकी प्रचार के आरोप

एटीएस ने बताया कि आरोपी एक टेलीग्राम ग्रुप संचालित करता था, जिस पर उसने कथित तौर पर 1 जून को जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भड़काऊ ऑडियो भाषण अपलोड किए थे। ये भाषण बाबरी मस्जिद और अन्य संवेदनशील मुद्दों से जुड़े थे। एजेंसी के मुताबिक, वह 'इब्न-ए-कासिम' नाम के एक पाकिस्तान-समर्थित चरमपंथी टेलीग्राम चैनल का भी सक्रिय सदस्य था।

जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से इन गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई है, जो जांच एजेंसी के लिए अहम साक्ष्य मानी जा रही है।

पूर्व में भी हुई थी एटीएस की छापेमारी

गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को महाराष्ट्र एटीएस ने राज्य के पाँच अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कई लोगों से पूछताछ की थी। उस जांच के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय वॉट्सऐप ग्रुप का पता चला था, जिसमें पाकिस्तान और खाड़ी देशों सहित विभिन्न देशों के सदस्य जुड़े थे।

रत्नागिरी जिले के राजापुर में रहने वाले एक शिक्षक से कई घंटों तक पूछताछ की गई थी, हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। जांच एजेंसी ने यह भी जाँचा कि उक्त वॉट्सऐप ग्रुप हिज़बुल मुजाहिदीन से जुड़ा है या नहीं।

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर की सुरक्षा एजेंसियाँ डिजिटल माध्यमों से होने वाले कट्टरपंथी प्रचार पर कड़ी नज़र रख रही हैं। एटीएस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म — विशेषकर टेलीग्राम — आतंकी संगठनों के प्रचार माध्यम बनते जा रहे हैं। आरोपी के संपर्क सूत्रों और नेटवर्क की आगे जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें पाकिस्तान और खाड़ी देशों के संपर्क भी शामिल हो सकते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह जांच महज एकल गिरफ्तारी तक सिमटती है या पूरे डिजिटल नेटवर्क को बेनकाब करती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र एटीएस ने माहिम से किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
एटीएस ने मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर नामक 33 वर्षीय संदिग्ध को माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया। उस पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने और टेलीग्राम के ज़रिए कट्टरपंथी सामग्री फैलाने का आरोप है।
आरोपी के खिलाफ क्या सबूत मिले हैं?
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन से कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद हुई है। उसने कथित तौर पर टेलीग्राम ग्रुप पर जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भड़काऊ ऑडियो भाषण अपलोड किए थे और वह पाकिस्तान-समर्थित चैनल 'इब्न-ए-कासिम' का सक्रिय सदस्य था।
14 अक्टूबर की एटीएस छापेमारी का इस गिरफ्तारी से क्या संबंध है?
14 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र एटीएस ने राज्य के पाँच स्थानों पर छापेमारी की थी और एक अंतरराष्ट्रीय वॉट्सऐप ग्रुप का पता लगाया था। 24 अक्टूबर की यह गिरफ्तारी उसी व्यापक जांच का हिस्सा प्रतीत होती है।
जैश-ए-मोहम्मद क्या है और यह भारत के लिए क्यों खतरनाक है?
जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तान-आधारित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जिसकी स्थापना मौलाना मसूद अजहर ने की थी। भारत में इसे आतंकी संगठन घोषित किया गया है और इस पर 2001 के संसद हमले सहित कई बड़े आतंकी हमलों में संलिप्तता का आरोप है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
एटीएस के अनुसार, आरोपी के संपर्क सूत्रों और नेटवर्क की जांच जारी है। पाकिस्तान और खाड़ी देशों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय वॉट्सऐप ग्रुप की भी जांच चल रही है, जिससे आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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