क्या महाराष्ट्र ने 2 लाख रुपए तक के कृषि ऋणों पर स्टांप शुल्क माफ किया?
सारांश
Key Takeaways
- कृषि ऋणों पर स्टांप शुल्क माफ किया गया है।
- यह निर्णय किसानों के लिए वित्तीय राहत लाएगा।
- ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कागजी कार्यवाही को कम किया गया है।
- किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों में निवेश करने का अवसर मिलेगा।
- यह नीति महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता को दर्शाती है।
मुंबई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सरकार ने कृषि समुदाय को सहायता प्रदान करने और कृषि विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस संदर्भ में, महाराष्ट्र सरकार ने 1 जनवरी से 2 लाख रुपए तक के फसल और कृषि ऋणों से संबंधित सभी दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क को पूरी तरह से माफ करने की घोषणा की है।
यह ऐतिहासिक निर्णय ऋण समझौतों, गिरवी दस्तावेजों, गारंटियों और नोटिसों सहित महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर लागू होगा। इस छूट का उद्देश्य स्टांप शुल्क से जुड़े अतिरिक्त खर्चों को खत्म करके राज्यभर के लाखों किसानों पर वित्तीय बोझ को कम करना है, जिससे समय पर संस्थागत ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस पहल को किसानों के लिए 'नए साल का उपहार' बताते हुए कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दूरदर्शी नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय किसानों के लिए लागत में काफी बचत करेगा। अब वे इस बचत को बीज, उर्वरक और आधुनिक कृषि पद्धतियों जैसे आवश्यक इनपुट पर खर्च कर सकते हैं, जिससे बेहतर फसल और उत्पादकता प्राप्त होगी।”
उन्होंने कहा कि इस उपाय से कागजी कार्यवाही को कम करके और स्टांप पेपर की आवश्यकता को समाप्त करके ऋण वितरण प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करना तेज और अधिक सम्मानजनक हो गया है।
उन्होंने कहा कि यह किसान-हितैषी नीति महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शी और किफायती बैंकिंग सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे मजबूत कृषि और किसानों की समग्र समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, उत्तर प्रदेश में आलू की संभावित रिकॉर्ड पैदावार को देखते हुए प्रदेश सरकार ने किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।
उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने आगामी आलू उपज के प्रबंधन, भंडारण और विपणन व्यवस्था की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और पूर्व नियोजित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को उपज बेचने या सुरक्षित रखने में कोई परेशानी न हो।