महिला आरक्षण विधेयक: पीएम मोदी की प्रतिबद्धता का प्रतीक - पद्म पुरस्कार विजेता
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक से महिलाओं को मिलेगें 33 प्रतिशत आरक्षण
- प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत प्रतिबद्धता
- महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण
- सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
- एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पद्म पुरस्कार से सम्मानित शशि सोनी और भीमाव्वा डोड्डाबलाप्पा शिल्लेक्याथारा ने गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए बताया कि यह कानून, जो लंबे समय से लंबित था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शक्ति और प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। उन्होंने देशभर की महिलाओं से अपील की कि वे आगे आएं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
सोनी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह विधेयक, विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है, जो एक ऐतिहासिक क्षण है और महिलाओं को संसद में सार्थक योगदान देने के नए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इस कानून को संसद में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है, जो उनके निर्णायक नेतृत्व और महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के इरादे को दर्शाता है।
भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने महिलाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे आने और विकास में योगदान देने का आग्रह किया। उनका मानना है कि आज महिलाएं नेतृत्व करने की शक्ति और क्षमता रखती हैं। उन्हें अपनी सोच को मजबूत करने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और सार्वजनिक जीवन में सच्चाई और गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता है।
संसद में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए सोनी ने संतुलन बनाए रखने और देश की छवि की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए महिला प्रतिनिधियों को व्यवधानों के बजाय रचनात्मक बहस और राष्ट्र-निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
बढ़ी हुई भागीदारी की परिवर्तनकारी क्षमता के बारे में उन्होंने कहा कि विधायिकाओं में महिलाओं की अधिक उपस्थिति विचारों को व्यक्त करने और नीतियों को बनाने के लिए एक मजबूत मंच स्थापित करेगी। उन्होंने आगे कहा कि जमीनी स्तर पर भागीदारी और महिलाओं के बीच सहयोग प्रगति को तेज करेगा और एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत बनाने में योगदान देगा।
सरकार की विभिन्न पहलों की सराहना करते हुए सोनी ने कहा कि आज महिलाओं को बोलने, नेतृत्व करने और अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने की अधिक स्वतंत्रता मिली है। उन्होंने इस आरक्षण को एक महत्वपूर्ण अवसर बताया और संसद में प्रवेश करने वाली महिलाओं से ईमानदारी से कार्य करने, शांति को बढ़ावा देने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी आभार व्यक्त किया, उनके लिए शक्ति और दीर्घायु की कामना की, और कहा कि महिलाएं राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तत्पर हैं।
वहीं, कर्नाटक के कोप्पल में पद्म श्री से सम्मानित भीमव्वा डोड्डाबलप्पा शिल्लेक्याथारा ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं और प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया। उन्होंने इस कदम का समर्थन करते हुए इसे देश में महिलाओं के अधिक सशक्तिकरण और प्रतिनिधित्व की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम बताया।