महुआ मोइत्रा का चुनाव आयोग पर तीखा हमला: 'नौटंकी बंद करो, वोट चोर जेल जाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने 13 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची सुधार अभियान पर भारत निर्वाचन आयोग को सीधे निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि पहले लाखों वैध मतदाताओं के नाम सूची से अवैध रूप से हटाए गए और अब उन्हीं को जोड़ने का 'दिखावा' किया जा रहा है। उनकी इस तीखी प्रतिक्रिया ने राज्य में चुनावी राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
मोइत्रा का एक्स पर सीधा वार
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की एक पोस्ट के जवाब में लिखा, 'भाजपा के लिए वोट चोरी करने और लाखों वैध मतदाताओं के नाम अवैध रूप से रद्द करने के बाद कृपया यह नौटंकी मत कीजिए। वोट चोरों, आप जेल जाओगे।' यह बयान तत्काल वायरल हो गया और विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर अपनी प्रतिक्रियाएँ दर्ज कराईं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की पहल
पश्चिम बंगाल के CEO कार्यालय ने 12 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य के सभी 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) ने एक सक्रिय अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न रह जाए। विज्ञप्ति के अनुसार, पूरे राज्य में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
जिन मतदाताओं को शिकायत है, उन्हें संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) या जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) से संपर्क करने को कहा गया है।
राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। TMC का आरोप है कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम हटाए, जबकि BJP इसे नियमित सफाई प्रक्रिया बताती है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और मतदाता सूची का मुद्दा केंद्रीय राजनीतिक बहस बन गया है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
फिलहाल, भारत निर्वाचन आयोग अथवा पश्चिम बंगाल CEO कार्यालय की ओर से महुआ मोइत्रा की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की चुप्पी संदेह को और बढ़ाती है।
आगे क्या होगा
मोइत्रा की टिप्पणी के बाद इस विवाद के और गहराने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच सकता है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विश्वसनीयता अगले चुनावी चक्र में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बने रहने की आशंका है।