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टीएमसी अंदरूनी कलह के बीच ममता बनर्जी ने लिखी 'गिरगिट' कविता, बागी नेताओं को परोक्ष चेतावनी

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टीएमसी अंदरूनी कलह के बीच ममता बनर्जी ने लिखी 'गिरगिट' कविता, बागी नेताओं को परोक्ष चेतावनी

सारांश

ममता बनर्जी की 'गिरगिट' कविता महज साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं — यह टीएमसी के बागी नेताओं को खुली चेतावनी है। अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधने वाले नेताओं के बीच यह कविता पार्टी की आंतरिक दरार को उजागर करती है और बताती है कि ममता अभी भी पार्टी की सर्वोच्च सत्ता हैं।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने बुधवार रात फेसबुक पर बंगाली में 'गिरगिट' शीर्षक कविता साझा की।
कविता को टीएमसी के बागी नेताओं के लिए परोक्ष चेतावनी माना जा रहा है।
पार्टी में असंतोष का केंद्र महासचिव एवं लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी पर लगाए जा रहे आरोप हैं।
चुनाव नतीजों के बाद ममता ने विधायकों से कहा था कि पार्टी छोड़ने के इच्छुक लोग स्वतंत्र हैं — उसके बाद से असंतोष और बढ़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में गहराते अंदरूनी संकट के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार रात अपने फेसबुक पेज पर बंगाली भाषा में 'गिरगिट' शीर्षक की एक कविता साझा की, जिसे राजनीतिक हलकों में पार्टी के बागी नेताओं के लिए सीधा परोक्ष संदेश माना जा रहा है। यह कदम ऐसे समय आया है जब पार्टी के कई नेता टीएमसी महासचिव एवं लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी पर लगातार निशाना साध रहे हैं।

कविता में क्या कहा ममता ने

कविता की शुरुआती पंक्तियों में ममता बनर्जी ने लिखा, 'गिरगिटों से भी ज्यादा खतरनाक वे बहुरूपी लोग हैं, जो अपने स्वार्थ और कमाई के स्रोत बचाने के लिए और तेजी से रंग बदलते हैं।' कविता में आगे कहा गया कि ऐसे लोग अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कुछ ही घंटों में रंग और चरित्र बदल लेते हैं तथा कार्यकर्ताओं और आम लोगों के आत्मसम्मान को दाँव पर लगा देते हैं।

कविता में बागियों को परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हुए उन्होंने लिखा, 'जैसे रथ के पहिए चलते हैं, वैसे ही तुम्हारे पहिए भी चलेंगे। तुम्हें इसका परिणाम मिलेगा। उस दिन गद्दार समझेंगे कि अमानवीयता और मूल्यहीनता क्या होती है।'

पार्टी में बढ़ता अंदरूनी विरोध

गौरतलब है कि चुनाव नतीजों के बाद नव-निर्वाचित विधायकों के साथ पहली बैठक में ममता बनर्जी ने स्वयं कहा था कि जो लोग टीएमसी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। उस बयान के बाद से पार्टी में अंदरूनी असंतोष और तीव्र हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी को पार्टी के भीतर उभरते असंतोष का पहले से ही अंदेशा था।

यह ऐसे समय में आया है जब अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग खुलकर असहमति जता रहा है, जिससे टीएमसी की आंतरिक एकता पर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक संदर्भ और महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कविता के माध्यम से राजनीतिक संदेश देना ममता बनर्जी की पुरानी शैली रही है। इस बार 'गिरगिट' का रूपक सीधे उन नेताओं पर निशाना माना जा रहा है जो कथित तौर पर पार्टी के भीतर रहते हुए विरोधी खेमे से तालमेल बिठा रहे हैं। यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े टकराव का संकेत हो सकता है।

आगे क्या होगा

ममता बनर्जी की इस कविता ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व बागी नेताओं के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या नहीं। टीएमसी के भीतर यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार का संदर्भ अधिक गंभीर है — पार्टी के भीतर से ही अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती मिल रही है, जो उत्तराधिकार की राजनीति का सीधा संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या कविता से असंतोष थमेगा, या यह औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले की अंतिम चेतावनी है। टीएमसी की एकजुटता की असली परीक्षा तब होगी जब बागी नेता सार्वजनिक रूप से और मुखर होंगे।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी की 'गिरगिट' कविता किस संदर्भ में लिखी गई?
यह कविता तृणमूल कांग्रेस में बढ़ते अंदरूनी संकट के बीच लिखी गई है, जब पार्टी के कई नेता महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साध रहे थे। ममता बनर्जी ने इसे बुधवार रात फेसबुक पर साझा किया।
कविता में ममता बनर्जी ने क्या संदेश दिया?
कविता में उन्होंने लिखा कि बहुरूपी लोग गिरगिट से भी खतरनाक होते हैं जो स्वार्थ के लिए रंग बदलते हैं। साथ ही चेतावनी दी कि गद्दारों को उनके कर्मों का परिणाम मिलेगा।
टीएमसी में अंदरूनी कलह की शुरुआत कब से हुई?
चुनाव नतीजों के बाद नव-निर्वाचित विधायकों के साथ बैठक में ममता बनर्जी ने कहा था कि पार्टी छोड़ने के इच्छुक लोग स्वतंत्र हैं। उसके बाद से पार्टी में अंदरूनी विरोध और तेज हो गया।
अभिषेक बनर्जी पर क्यों निशाना साधा जा रहा है?
कथित तौर पर पार्टी के एक वर्ग को अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और नेतृत्व शैली से आपत्ति है। हालाँकि ममता बनर्जी ने उनके समर्थन में परोक्ष रूप से यह कविता लिखी मानी जा रही है।
इस कविता का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कविता ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा की है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व बागी नेताओं के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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