ममता बनर्जी का ऐलान: राजनीतिक संन्यास नहीं, BJP को रिटायर कराना है मेरा लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगी और तब तक सक्रिय रहेंगी, जब तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर करने पर मजबूर नहीं कर देतीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता ने सरकार बदलने के महज चार महीने के भीतर ही BJP का असली चेहरा पहचान लिया है।
अन्नपूर्णा भंडार विवाद: ममता का BJP पर सीधा हमला
बनर्जी ने फेसबुक लाइव के ज़रिये BJP सरकार पर आरोप लगाया कि वह 'अन्नपूर्णा भंडार' वित्तीय सहायता योजना के तहत मासिक भत्ता देने में जानबूझकर देरी कर रही है और अयोग्यता का बहाना बनाकर लाभार्थियों की संख्या घटाई जा रही है। उन्होंने कहा, 'राज्य में महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना के लिए सड़कों पर रोते-बिलखते घूमना पड़ रहा है।'
बनर्जी ने अपने कार्यकाल की 'लक्ष्मी भंडार' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार लगभग 2 करोड़ 42 लाख माताओं और बहनों को इस योजना का लाभ देती थी और मार्च 2026 में विधानसभा चुनाव से पहले भी भुगतान किया गया था। उनके अनुसार, चुनाव के बाद लगभग 75 प्रतिशत महिलाओं को भत्ता मिलना बंद हो गया है।
BJP पर धर्म-जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप
बनर्जी ने आरोप लगाया कि BJP 'अन्नपूर्णा भंडार' का पैसा देने के लिए धर्म और जाति को आधार बना रही है, जो चुनाव-पूर्व वादे का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, 'वादा करते समय कोई शर्त नहीं रखी गई थी। लेकिन अब जब आप आवेदन करने जाते हैं, तो कहा जाता है कि आपने पात्रता मानदंड पूरे नहीं किए हैं। असल में यह पूरी तरह से धोखाधड़ी है।' उन्होंने कहा कि वह उन महिलाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश करेंगी जो इस योजना से वंचित रह गई हैं।
जनगणना पर चेतावनी: NRC की 'गुप्त कोशिश' का आरोप
बनर्जी ने जनगणना प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) को लागू करने की एक और गुप्त कोशिश है और इसे राजनीतिक दलों से सलाह किए बिना थोपा गया है। उन्होंने लोगों को जनगणना फॉर्म पर हस्ताक्षर करने और निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतने की चेतावनी दी, यह कहते हुए कि इससे उनकी निजी बचत पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नई BJP सरकार के शुरुआती महीनों में कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राज्यभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ममता बनर्जी की यह आक्रामक मुद्रा तृणमूल कांग्रेस (TMC) को विपक्ष में पुनर्स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला बड़ा जन-आंदोलन है जिसे TMC ने हवा देने की कोशिश की है।
आने वाले हफ्तों में TMC के विरोध प्रदर्शन और तेज होने की संभावना है, खासकर यदि अन्नपूर्णा भंडार के लाभार्थियों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।