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क्या ममता बनर्जी के 'धार्मिक पुनर्गठन' के प्रयास चुनावी अटकलों को बढ़ावा दे रहे हैं?

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क्या ममता बनर्जी के 'धार्मिक पुनर्गठन' के प्रयास चुनावी अटकलों को बढ़ावा दे रहे हैं?

सारांश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर की आधारशिला रखकर आगामी चुनावों के मद्देनजर विपक्षी आरोपों का सामना किया है। क्या यह कदम अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है?

मुख्य बातें

महाकाल मंदिर का निर्माण सिलीगुड़ी में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर विपक्षी दलों द्वारा अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप लगाया जा रहा है।
राज्य में 30% से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।
दुर्गा आंगन का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना है।
दुर्गा पूजा समितियों के लिए अनुदान में वृद्धि की गई है।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में एक विशाल महाकाल मंदिर परिसर की आधारशिला रखी। इस कदम को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ‘अल्पसंख्यक तुष्टीकरण’ के आरोपों से छुटकारा पाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लंबे समय से ऐसे कल्याणकारी उपायों को लागू करने का आरोप है, जिनसे उनके आलोचकों का कहना है कि मुसलमानों को असमान रूप से लाभ पहुंचा है।

राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर ऐसे कदम उठाने का आरोप लगाया है, जिनका उद्देश्य कथित तौर पर मुस्लिम वोट हासिल करना है। राज्य में 30 प्रतिशत से अधिक मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं।

इसलिए, वर्तमान में भव्य मंदिरों के निर्माण के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

पूर्वी मेदिनीपुर जिले के दीघा में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण लगभग 250 करोड़ रुपए की लागत से हुआ है। यह मंदिर एक प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें विशाल जनसमूहों और रथ यात्रा एवं पुष्प अभिषेक जैसे त्योहारों के अनुष्ठानों के लिए पर्याप्त स्थान है।

मुख्यमंत्री बनर्जी ने 2025 के अंत में कोलकाता में 262 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले दुर्गा आंगन की आधारशिला रखी। इसे दुर्गा पूजा मनाने और बंगाली कला, शिल्प तथा सामुदायिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह परिसर 17 एकड़ में फैला होगा, जिसमें मंदिर, संग्रहालय और सांस्कृतिक क्षेत्र शामिल होंगे।

दुर्गा आंगन का उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना, कारीगरों को एक मंच प्रदान करना और निवासियों को त्योहारों तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना है।

इससे पहले 2025 में, मुख्यमंत्री बनर्जी ने दुर्गा पूजा समितियों के लिए सरकारी अनुदान में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की थी। पहले 40,000 आयोजकों में से प्रत्येक को 85,000 रुपए मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 1.10 लाख रुपए कर दिया गया।

इसके अतिरिक्त, उनके कर और सेवा शुल्क भी माफ कर दिए गए।

अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाओं के बाद, राज्य चुनावों से पहले आई इस संपूर्ण तेजी को कुछ वर्गों द्वारा दोहरी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करना और साथ ही भाजपा के हिंदुत्ववादी विचारों का मुकाबला करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह समझना महत्वपूर्ण है कि ममता बनर्जी के कदमों का उद्देश्य अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करना और भाजपा की चुनौतियों का सामना करना है। यह राजनीति का एक सामान्य हिस्सा है, जहां नेता अपने-अपने समुदायों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न उपाय करते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी का मंदिर निर्माण का उद्देश्य क्या है?
ममता बनर्जी का मंदिर निर्माण का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करना और भाजपा की धार्मिक नीतियों का मुकाबला करना है।
क्या इस कदम से भाजपा को नुकसान होगा?
इस कदम से भाजपा को नुकसान हो सकता है यदि यह अल्पसंख्यक समुदाय को एकजुट करने में सफल होता है।
राष्ट्र प्रेस
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