4 अक्टूबर 2026
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ममता बनर्जी ने सालबोनी में वकीलों पर हमले की निंदा की, BJP पर लगाया आरोप

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ममता बनर्जी ने सालबोनी में वकीलों पर हमले की निंदा की, BJP पर लगाया आरोप

सारांश

पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी में कलकत्ता हाई कोर्ट के वकीलों पर कथित तीन बार हमले के बाद ममता बनर्जी ने BJP पर निशाना साधा। पाँच वकील घायल, महिला वकीलों से छेड़छाड़ का आरोप। मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद अधिवक्ता शमीम अहमद सुरक्षित घर लौटे।

मुख्य बातें

पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी क्षेत्र में कलकत्ता हाई कोर्ट के वकीलों को कथित तौर पर तीन बार हमले का निशाना बनाया गया।
पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के नव निर्वाचित सदस्य अधिवक्ता शमीम अहमद सहित 5 वकील घायल ; महिला वकीलों से छेड़छाड़ का आरोप।
हमलों में लाठी, फावड़े और बांस के इस्तेमाल का आरोप; तीन वाहनों में तोड़फोड़।
ममता बनर्जी ने हमले के लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया; प्रशासन से सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की माँग।
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद शमीम अहमद सुरक्षित घर लौटे।
बनर्जी ने बैंकशाल और बारुईपुर कोर्ट में हुए हालिया वकील-हमलों को भी 'अस्वीकार्य' बताया।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 4 अक्टूबर 2026 को पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी पुलिस थाना क्षेत्र में कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता शमीम अहमद और अन्य वकीलों पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन से वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

मुख्य घटनाक्रम

वकीलों के एक समूह — जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट और मिदनापुर न्यायालय के अधिवक्ता शामिल थे — को सालबोनी पुलिस थाना क्षेत्र पहुँचने से पहले धाडिका बाजार क्षेत्र में कथित तौर पर तीन बार निशाना बनाया गया। वकीलों के अनुसार, हमलों में लाठी, फावड़े और बांस का इस्तेमाल किया गया।

इस कथित हमले में कलकत्ता हाई कोर्ट के तीन पुरुष वकील और दो महिला वकील घायल हो गए। आरोप है कि महिला वकीलों के साथ छेड़छाड़ भी की गई — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

घटना के बाद पश्चिम मिदनापुर पुलिस ने वकीलों को सुरक्षित इलाके से बाहर निकाला, लेकिन आरोप है कि सालबोनी पुलिस स्टेशन के पास उन पर दोबारा हमला हुआ। तीन वाहनों में तोड़फोड़ की गई।

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी ने कहा, 'सालबोनी पुलिस थाना क्षेत्र के पास पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के नव निर्वाचित सदस्य अधिवक्ता शमीम अहमद पर हुआ क्रूर हमला बेहद चिंताजनक है। मुझे यह जानकर गहरा सदमा लगा है कि उन पर अपनी शिकायत बदलने का दबाव भी डाला गया।' उन्होंने यह भी बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद शमीम सुरक्षित घर लौट आए।

बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, 'मैं BJP के गुंडों द्वारा किए गए इस तरह के बार-बार होने वाले अत्याचारों की कड़ी निंदा करती हूँ और प्रशासन से वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करने का आग्रह करती हूँ।' गौरतलब है कि BJP ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

व्यापक संदर्भ

बनर्जी ने बैंकशाल कोर्ट और बारुईपुर कोर्ट में वकीलों पर हुए हालिया हमलों का भी उल्लेख किया और उन्हें 'उतना ही अस्वीकार्य' बताया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अदालत परिसरों के आसपास वकीलों की सुरक्षा को लेकर बार एसोसिएशनें पहले से चिंतित हैं।

बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'पश्चिम बंगाल में धमकी और जंगल राज की संस्कृति को पनपने नहीं दिया जा सकता' और 'कानून का शासन राजनीतिक हिंसा पर हावी होना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक वकील, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का हो, बिना किसी डर के अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम होना चाहिए।

आम जनता और कानूनी बिरादरी पर असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वकीलों पर हमले न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करते हैं और न्याय तक पहुँच पर सीधा असर डालते हैं। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के नव निर्वाचित सदस्य का इस घटना में शामिल होना इसे सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना से अलग बनाता है।

आलोचकों का कहना है कि यदि अधिवक्ताओं को भी धमकाया जाने लगे, तो आम नागरिकों के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और भी कठिन हो जाएगा। राज्य पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं — क्योंकि कथित तौर पर पुलिस थाने के पास ही दूसरा हमला हुआ।

क्या होगा आगे

मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद अब यह देखना होगा कि न्यायालय स्वयं इस घटना का संज्ञान लेती है या नहीं। पश्चिम मिदनापुर पुलिस द्वारा जाँच की प्रगति और इस मामले में किसी को गिरफ्तार किया जाता है या नहीं, यह अगले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की जगह सीधे BJP पर आरोप लगाती हैं। असली सवाल यह है कि पुलिस थाने के ठीक पास दूसरा हमला कैसे हुआ — यह प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार से भी अलग नहीं की जा सकती। वकीलों पर बार-बार हमले — सालबोनी, बैंकशाल, बारुईपुर — एक चिंताजनक पैटर्न बनाते हैं जो न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा असर डालता है। जब तक मामले में ठोस गिरफ्तारी और जाँच की पारदर्शिता नहीं आती, निंदा के बयान महज राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सालबोनी में वकीलों पर हमला क्या हुआ?
4 अक्टूबर 2026 को पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी क्षेत्र में कलकत्ता हाई कोर्ट और मिदनापुर न्यायालय के वकीलों के एक समूह पर कथित तौर पर तीन बार हमला किया गया। हमलों में लाठी, फावड़े और बांस के इस्तेमाल का आरोप है, जिसमें 5 वकील घायल हुए और तीन वाहनों में तोड़फोड़ हुई।
ममता बनर्जी ने हमले पर क्या कहा?
ममता बनर्जी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे BJP के गुंडों द्वारा की गई कार्रवाई बताया और प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त व निष्पक्ष कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जंगल राज नहीं चल सकता।
अधिवक्ता शमीम अहमद कौन हैं?
शमीम अहमद कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता और पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के नव निर्वाचित सदस्य हैं। उन पर सालबोनी क्षेत्र में हमला हुआ और कथित तौर पर उन पर अपनी शिकायत बदलने का दबाव भी डाला गया।
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
ममता बनर्जी के बयान के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद अधिवक्ता शमीम अहमद सुरक्षित घर लौट सके। यह दर्शाता है कि मामला न्यायिक स्तर तक पहुँच चुका है।
क्या पश्चिम बंगाल में वकीलों पर हमले पहले भी हुए हैं?
ममता बनर्जी ने स्वयं बैंकशाल कोर्ट और बारुईपुर कोर्ट में वकीलों पर हुए हालिया हमलों का उल्लेख करते हुए उन्हें 'उतना ही अस्वीकार्य' बताया। यह संकेत देता है कि राज्य में वकीलों की सुरक्षा एक बार-बार उभरती चिंता बन चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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